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इंदौर में जल संकट की आहट, 50 करोड़ के पैकेज की मांग

इंदौर। मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून ने जल संकट की आशंका बढ़ा दी है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार केवल 23 इंच पानी बरसा है। इसे देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग की है। आगामी गर्मी में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, नगर निगम और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं।

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रोज 800 एमएलडी तक पानी की जरूरत

इंदौर की आबादी करीब 40 लाख है। शहर में घरेलू जरूरतों के लिए रोजाना लगभग 620 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की आवश्यकता होती है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोगों को जोड़ने पर कुल मांग 750 से 800 एमएलडी तक पहुंच जाती है। वर्ष 2008 में भी शहर में करीब 20 इंच बारिश हुई थी, जिससे जल संकट की स्थिति बनी थी। अब 18 साल बाद कम बारिश के कारण एक बार फिर गर्मी में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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डीमार्ट के पास फूटी नर्मदा पाइपलाइन

इसी बीच गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा की पाइपलाइन फूट गई। पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी निकलने के कारण सड़क पर जाम लग गया। पानी भरने से अंडरपास भी बंद करना पड़ा। इस घटना ने शहर की जलापूर्ति व्यवस्था और पाइपलाइन की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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नर्मदा से रोज मिलता है 440 एमएलडी पानी

विशेषज्ञों के मुताबिक, इंदौर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है। नर्मदा से शहर को रोजाना करीब 440 एमएलडी पानी मिलता है। लीकेज और अन्य कारणों से लगभग 22 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। ऐसे में पाइपलाइन की मरम्मत और जल वितरण व्यवस्था में सुधार करना भी जरूरी है।

भूजल दोहन 90 प्रतिशत तक पहुंचा

शहर में एक लाख से ज्यादा निजी बोरवेल हैं, जबकि नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखा गया है। रिपोर्ट में भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत बताया गया है। भूजल पर बढ़ती निर्भरता और कम बारिश के कारण आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में इंदौर के सामने जल स्रोतों का संरक्षण, लीकेज रोकना, भूजल दोहन पर नियंत्रण और पानी की बर्बादी कम करना बड़ी चुनौती है। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आगामी गर्मी में शहर को पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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