करवा चौथ 2026: जानें गर्भवती महिलाएं व्रत रखें या नहीं

करवा चौथ का त्योहार 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। कई महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक बिना कुछ खाए-पिए रहती हैं। लेकिन जो महिलाएं गर्भवती हैं, उनके लिए यह व्रत रखने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को मां और गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों की जरूरतों के लिए पर्याप्त पोषण और पानी चाहिए। ऐसे में लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से कमजोरी, चक्कर और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्भावस्था में करवा चौथ का व्रत रखने का फैसला करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का निर्जला व्रत रखना कितना सुरक्षित है?
गर्भावस्था में हर महिला की सेहत और शारीरिक जरूरतें अलग होती हैं। कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान उल्टी, थकान या ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव की समस्या हो सकती है। ऐसे में पूरे दिन बिना पानी और भोजन के रहना जोखिम बढ़ा सकता है। निर्जला व्रत के कारण शरीर में पानी की कमी, सिरदर्द, चक्कर आना और ब्लड शुगर कम होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गर्भावस्था में लंबे समय तक उपवास रखने की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इसे सभी गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता। खासकर जिन महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज, एनीमिया, लगातार उल्टी, कम वजन या प्रेग्नेंसी से जुड़ी कोई अन्य परेशानी है, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के व्रत नहीं रखना चाहिए। गर्भावस्था के शुरुआती और आखिरी महीनों में भी विशेष सावधानी जरूरी है।
करवा चौथ की परंपरा निभानी है, तो क्या करें?
अगर आप प्रेग्नेंट हैं और करवा चौथ की पूजा करना चाहती हैं, तो सबसे पहले अपने गायनेकोलॉजिस्ट से बात करें। डॉक्टर आपकी गर्भावस्था और स्वास्थ्य की स्थिति के आधार पर उचित सलाह दे सकते हैं।

ध्यान रखें कि फलाहार या पानी पीकर व्रत रखना भी हर गर्भवती महिला के लिए अपने आप सुरक्षित नहीं हो जाता। अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।
व्रत के दौरान इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
प्रेग्नेंसी में व्रत के दौरान अगर चक्कर आएं, बहुत कमजोरी महसूस हो, सिरदर्द बढ़े, पेशाब कम हो या उसका रंग गहरा दिखाई दे, तो इसे शरीर में पानी की कमी का संकेत माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखने के बजाय तुरंत पानी और जरूरी पोषण लेने के बारे में चिकित्सकीय सलाह लें। अगर बेहोशी, तेज पेट दर्द, योनि से खून आना या गर्भावस्था के उस चरण में बच्चे की हलचल सामान्य से कम महसूस हो, जब नियमित हलचल महसूस होती है, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें।
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मां और बच्चे की सेहत सबसे जरूरी
करवा चौथ आस्था और परंपरा से जुड़ा त्योहार है, लेकिन गर्भावस्था में मां और बच्चे की सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है। व्रत रखना या उसमें बदलाव करना आपकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए किसी की देखा-देखी निर्जला व्रत न रखें और फैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पूजा और परंपरा निभाने के ऐसे तरीके चुनें, जिनमें आपकी सेहत से समझौता न हो।









