मां ने गहने बेचकर बेटे को दिए 16 लाख रुपये, आयकर विभाग ने उठाए सवाल

मां ने अपने सोने के गहने बेचकर बेटे को 16 लाख रुपये उपहार में दिए, लेकिन बैंक खाते में जमा रकम को लेकर आयकर विभाग ने सवाल खड़े कर दिए। मामला राजस्थान के जयपुर का है, जहां एक व्यक्ति को अपनी मां से मिले पैसों का हिसाब देना पड़ा। आखिरकार, आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने दस्तावेजों पर विचार करने के बाद करदाता को राहत दे दी। इस मामले में बैंक खाते में जमा 13.04 लाख रुपये को अघोषित आय मानकर जोड़ी गई रकम को हटाने का आदेश दिया गया। फैसले से यह बात सामने आई कि परिवार से मिले पैसों का स्रोत साबित करने के लिए सही दस्तावेज कितने महत्वपूर्ण होते हैं।
मां ने 642 ग्राम सोने के गहने बेचकर दिए थे 16 लाख रुपये
करदाता की ओर से बताया गया कि उनकी मां ने अपने पुराने सोने के आभूषण बेचकर पैसे जुटाए थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने 642 ग्राम सोने के गहने बेचे थे और प्राप्त रकम में से 16 लाख रुपये बेटे को उपहार के रूप में दिए थे। अपने दावे के समर्थन में बेटे ने नोटरी से तैयार कराई गई गिफ्ट डीड पेश की। इस दस्तावेज पर दो गवाहों के हस्ताक्षर भी थे। इसके अलावा, एक पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट में सोने के आभूषणों की कीमत 18.36 लाख रुपये बताई गई थी। इन दस्तावेजों के जरिए करदाता ने यह साबित करने की कोशिश की कि उसे मिली रकम का स्रोत उसकी मां के सोने के गहनों की बिक्री थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जयपुर के झूठा राम से जुड़ा है। उनका आयकर आकलन वर्ष 2012-13 के दौरान विभाग की जांच के दायरे में आया था। विभाग के सामने जानकारी आई कि उन्होंने करीब 20.23 लाख रुपये अचल संपत्ति खरीदने में लगाए थे। इसके अलावा, उनके बैंक खाते में लगभग 13.04 लाख रुपये नकद जमा हुए थे। शुरुआत में आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए जाने के कारण विभाग ने पुराने आकलन को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू की। बाद में करदाता ने अपनी आय का विवरण देते हुए रिटर्न दाखिल किया, लेकिन आयकर अधिकारी उनके वित्तीय लेनदेन से जुड़े स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद संपत्ति में निवेश और बैंक खाते में जमा नकदी को लेकर उनकी आय में अतिरिक्त रकम जोड़ दी गई।
पहले भी मिली थी आंशिक राहत
मामले की अपील के दौरान संपत्ति में निवेश से जुड़ी करीब 20.23 लाख रुपये की बढ़ोतरी हटा दी गई थी। हालांकि, बैंक खाते में जमा 13.04 लाख रुपये को लेकर की गई कार्रवाई बरकरार रही। इसके बाद करदाता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) का रुख किया। वहां उन्होंने मां से मिले उपहार और रकम के स्रोत से जुड़े दस्तावेज पेश किए।
ITAT ने क्यों हटाई 13.04 लाख रुपये की बढ़ोतरी?
ITAT की जयपुर पीठ ने मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और करदाता की दलीलों पर विचार किया। मां और बेटे के रिश्ते, गिफ्ट डीड, गवाहों के हस्ताक्षर और सोने के आभूषणों की मूल्यांकन रिपोर्ट जैसे प्रमाणों को ध्यान में रखा गया। ट्रिब्यूनल ने दस्तावेजों के आधार पर करदाता के पक्ष को स्वीकार करते हुए बैंक खाते में जमा 13.04 लाख रुपये को अघोषित आय मानकर की गई बढ़ोतरी हटाने का आदेश दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह फैसला 6 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया। इस तरह मां से मिले पैसों के स्रोत के समर्थन में पेश किए गए दस्तावेज करदाता के लिए राहत का आधार बने।
माता-पिता से मिले पैसों पर कितना लगता है टैक्स?
आयकर नियमों के अनुसार, माता-पिता जैसे निर्दिष्ट रिश्तेदारों से मिले वास्तविक उपहार सामान्यतः प्राप्तकर्ता के हाथों में कर-मुक्त होते हैं। हालांकि, किसी रकम को उपहार बताना और उसके वास्तविक स्रोत को साबित करना अलग-अलग बातें हैं। यदि आयकर विभाग बैंक खाते में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल करता है, तो संबंधित व्यक्ति को यह बताने के लिए दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है कि पैसा कहां से आया और किस उद्देश्य से दिया गया था। इसलिए परिवार के किसी सदस्य से बड़ी रकम मिलने पर गिफ्ट डीड, बैंक स्टेटमेंट, सोने या अन्य संपत्ति की बिक्री से जुड़े प्रमाण और भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखना उपयोगी हो सकता है।
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इस मामले से क्या सीख मिलती है?
जयपुर का यह मामला बताता है कि परिवार से मिले पैसों के लेनदेन में भी दस्तावेजों की अहम भूमिका होती है। माता-पिता से उपहार मिलने पर सामान्यतः टैक्स नहीं लगता, लेकिन जरूरत पड़ने पर रकम के स्रोत और लेनदेन की वास्तविकता का प्रमाण देना पड़ सकता है। इसलिए बड़ी रकम के लेनदेन में उचित रिकॉर्ड रखना समझदारी है। किसी विशेष मामले में टैक्स की स्थिति जानने के लिए संबंधित दस्तावेजों के आधार पर कर विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।









