देश में बिजली की किल्लत! 9 राज्यों ने केंद्र से मांगी एक्स्ट्रा बिजली

देश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर चिंता का विषय बनता जा रहा है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत 9 राज्यों ने बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए अतिरिक्त बिजली की मांग की है। खासतौर पर रात के समय मांग के अनुसार बिजली उपलब्ध कराना चुनौती बन रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में कुछ इलाकों में बिजली कटौती की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पिछले कुछ महीनों में देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की उपलब्धता को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। अब बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर भी चर्चा में है। कोयले से बिजली उत्पादन बढ़ने के बावजूद कई जगहों पर जरूरत के मुताबिक बिजली उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है।
सितंबर में बिजली की कमी बढ़कर 56 करोड़ यूनिट हुई
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत में बिजली की कमी बढ़कर करीब 56 करोड़ यूनिट यानी 560 मिलियन किलोवाट-घंटे तक पहुंच गई। रिपोर्ट में इसे अगस्त 2023 के बाद बिजली की सबसे बड़ी कमी बताया गया है। बिजली की मांग बढ़ने और उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई राज्यों को अतिरिक्त बिजली की जरूरत पड़ रही है। खासकर शाम और रात के समय घरेलू इस्तेमाल, एयर कंडीशनर, कूलर और कृषि क्षेत्र की मांग पूरी करना बिजली कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है।
इन 9 राज्यों में बिजली की कमी की चिंता
बिजली की मांग को पूरा करने के लिए राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली ने अतिरिक्त बिजली की मांग की है। इन राज्यों में बिजली की जरूरत अलग-अलग कारणों से बढ़ सकती है। कहीं घरेलू और औद्योगिक खपत अधिक है, तो कहीं खेती में सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बनी हुई है। रात के समय मांग बढ़ने पर बिजली की उपलब्धता बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, अतिरिक्त बिजली की मांग का मतलब यह नहीं है कि इन सभी राज्यों में निश्चित रूप से बिजली कटौती होगी। वास्तविक स्थिति राज्यवार बिजली की उपलब्धता, मांग और आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
बिजली संकट बढ़ने के पीछे क्या हैं प्रमुख कारण?
1. कम बारिश से जलविद्युत उत्पादन प्रभावित
बिजली उत्पादन के लिए बारिश और जलाशयों में पानी का पर्याप्त स्तर महत्वपूर्ण होता है। कम बारिश होने पर जलविद्युत परियोजनाओं से बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे बिजली की कुल उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
2. कोयले की कमी और सीमित भंडार
भारत में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयले पर निर्भर है। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में कोयले से बिजली उत्पादन में 13.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बावजूद कोयले के सीमित भंडार की समस्या बनी रही। ग्रिड-इंडिया के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 47 प्रतिशत कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के पास निर्धारित जरूरत के एक-चौथाई से भी कम कोयला उपलब्ध था। ऐसे हालात में बिजली संयंत्रों के लिए लगातार पर्याप्त उत्पादन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
3. बिजली संयंत्रों का रखरखाव
बिजली संयंत्रों में मरम्मत और रखरखाव का काम भी उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। यदि अधिक मांग के समय कुछ संयंत्रों की उत्पादन क्षमता सीमित हो जाए, तो बिजली की उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
4. गर्मी और सिंचाई से बढ़ी मांग
मौसम सामान्य से ज्यादा गर्म रहने पर कूलर और एसी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। इसके अलावा, किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए भी बिजली की जरूरत होती है। घरेलू, कृषि और औद्योगिक मांग एक साथ बढ़ने पर बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
बिजली संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही सरकार?
बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग स्तर पर प्रयास कर रही हैं। जरूरत वाले राज्यों को अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था करना, कोयले से घरेलू उत्पादन बनाए रखना और बिजली आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन करना इन प्रयासों का हिस्सा है।
इसके साथ ही, सौर ऊर्जा से बनने वाली बिजली को बैटरी में स्टोर करने की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे दिन में पैदा होने वाली सौर ऊर्जा का इस्तेमाल जरूरत के समय किया जा सकता है। ऊर्जा भंडारण की बेहतर व्यवस्था होने पर शाम और रात के समय बिजली की मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है।
आम लोगों पर क्या पड़ सकता है असर?
अगर बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर लंबे समय तक बना रहता है, तो कुछ इलाकों में लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर घरों, दुकानों, उद्योगों और खेती से जुड़े कामों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा, जरूरत पूरी करने के लिए महंगी बिजली खरीदने पर बिजली वितरण कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बिजली के बिल तुरंत बढ़ जाएंगे। बिजली दरों में बदलाव संबंधित नियमों और नियामक फैसलों पर निर्भर करता है।
फिलहाल, बिजली की उपलब्धता बनाए रखना और बढ़ती मांग के अनुसार आपूर्ति करना सबसे बड़ी चुनौती है। आने वाले समय में स्थिति कैसी रहेगी, यह कोयले की उपलब्धता, बिजली उत्पादन, मौसम और मांग के प्रबंधन पर निर्भर करेगा।









