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मुरैना-कूनो के 19 महीने के चीते को गोली मारी मौत

शरीर से निकले छर्रे, देश का दूसरा मामला

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घर में घुसकर बछड़ों का किया था शिकार

अक्षरविश्व न्यूज भोपाल। कूनो नेशनल पार्क से निकलकर मुरैना पहुंचे 19 महीने के मादा चीते को गोली मार दी गई। गोली लगने से चीते की मौत हो गई है। रविवार को बछड़ों का शिकार करने के बाद चीते पर हमला किया गया था। पहले जानकारी सामने आई थी कि ग्रामीणों ने चीते को लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया था।

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हालांकि, अब जबलपुर वेटरनरी कॉलेज की डॉक्टर डॉ. शोभा जावरे ने चीते को गोली लगने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान चीते के शरीर से छर्रे निकाले गए हैं। देश में किसी चीते को गोली मारने का यह दूसरा मामला है। कूनो नेशनल पार्क के चीतों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पार्क से बाहर निकलने वाले चीते सुरक्षित नहीं हैं। इन चीतों को कॉलर आईडी लगाई गई है, वन विभाग की टीमें लगातार उनकी निगरानी कर रही हैं। इसके बावजूद मादा चीते को गोली मार दी गई।

घटना के बाद वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश के वन अधिकारी चीतों की सुरक्षा के लिए आधुनिक इंतजाम होने का दावा करते रहे हैं। ऐसे में चीते के शावक को गोली लगने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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दुबे के मुताबिक, चीते आमतौर पर इंसानों का शिकार नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग को पहले सामने आए शिकारियों के गिरोहों से सबक लेना चाहिए था। उनका शक है कि मादा चीते निर्वा के शावक पर शिकार के इरादे से जानबूझकर हमला किया गया हो सकता है।

उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने की मांग की है। फिलहाल, घटना कैसे हुई, गोली किसने चलाई और शावक की हालत कैसी है, इस बारे में वन विभाग की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

बछड़ों का शिकार करने के बाद ग्रामीणों ने किया था हमला

मुरैना के बमोरी गांव में रविवार सुबह करीब 5 बजे दो चीते गांव के बाहर बने एक मकान में घुस गए। यहां आंगन में बंधे दो बछड़ों का उन्होंने शिकार कर लिया। बछड़ों के चिल्लाने की आवाज सुनकर टपरी में खटिया पर सो रहे सोमलावीर सिंह और उनकी पत्नी की नींद खुल गई। उन्होंने चीतों को देखा और ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। इस घटना के बाद मादा चीते निर्वा के 19 महीने के शावक के घायल होने की खबर सामने आई। यह शावक मुरैना जिले के पहाडग़ढ़ क्षेत्र में घायल मिला था। गंभीर हालत को देखते हुए वन विभाग की टीम उसे इलाज के लिए जबलपुर ले गई थी। हालांकि वन विभाग के अधिकारी का अभी भी यही कहना है कि चीते का इलाज चल रहा है।

ऑपरेशन के दौरान शरीर से निकाले छर्रे
जानकारी के मुताबिक, घायल शावक को इलाज के लिए जबलपुर के वेटरनरी अस्पताल लाया गया था। यहां वाइल्ड लाइफ स्कूल ऑफ फॉरेंसिक सेल में सर्जन डॉ. शोभा जावरे ने उसका ऑपरेशन किया। डॉ. जावरे ने बातचीत में बताया कि चीते के शरीर में गोली लगी थी। ऑपरेशन के दौरान उसके शरीर से छर्रे निकाले गए।

डॉक्टर ने इस मामले में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वन विभाग के अधिकारी ही इस बारे में आधिकारिक जानकारी दे सकते हैं। वहीं, कूनो नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने पहले बताया था कि शावक का इलाज चल रहा है। हालांकि, शावक की मौत होने की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन वन विभाग ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।

चीतों की ट्रैकिंग होती है, फिर कैसे हुआ हमला ?

वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि कूनो नेशनल पार्क के चीतों की लगातार ट्रैकिंग की जाती है। वन विभाग की टीमें भी उन पर नजर रखती हैं। इसके बावजूद चीते पर हमला होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दुबे ने कहा कि चीते कहीं भी जा सकते हैं। कई चीते राजस्थान पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ राजगढ़ तक गए हैं। ऐसे में ट्रैकिंग के बावजूद चीते पर हमला होना सरकारी व्यवस्था की विफलता को दिखाता है। वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में 53 चीते हैं। इनमें से 15 खुले जंगल में घूम रहे हैं।

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