न अमेरिका, न IMF… पाकिस्तान को सबसे ज्यादा कर्ज दे रहा यह देश

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लंबे समय से मुश्किलों में घिरी हुई है। देश को अपनी जरूरतें पूरी करने और अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए लगातार विदेशों से कर्ज लेना पड़ रहा है। पिछले 10 सालों में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज लगभग दोगुना हो चुका है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान को सबसे ज्यादा कर्ज देने वालों में न तो अमेरिका का नाम है और न ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का। इस मामले में एक ऐसा देश सबसे आगे है, जिसके साथ पाकिस्तान की दोस्ती की चर्चा अक्सर होती रहती है। आइए जानते हैं कि पाकिस्तान पर किस देश का कितना कर्ज है और उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है।
10 साल में दोगुना हुआ पाकिस्तान का विदेशी कर्ज
वर्ल्ड बैंक की ‘इंटरनेशनल डेट रिपोर्ट 2026’ के मुताबिक, पाकिस्तान का विदेशी कर्ज लगातार बढ़ा है। साल 2015 में पाकिस्तान पर 68.673 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज था। वहीं, 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 135.107 अरब डॉलर हो गया। यानी महज 10 साल में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज करीब दोगुना हो गया है। इस बढ़ते कर्ज का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। विदेशी कर्ज का बड़ा हिस्सा सरकार और सरकारी संस्थानों की जिम्मेदारी है। ऐसे में कर्ज की किस्त और ब्याज चुकाना पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
चीन है पाकिस्तान का सबसे बड़ा कर्जदाता
पाकिस्तान को सबसे ज्यादा कर्ज देने वाले देशों में चीन पहले नंबर पर है। पाकिस्तान पर चीन का करीब 22.4 अरब डॉलर का कर्ज बकाया है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। चीन ने पाकिस्तान में कई बड़ी परियोजनाओं में निवेश भी किया है। चीन के बाद वर्ल्ड बैंक का नंबर आता है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पर वर्ल्ड बैंक का करीब 19.2 अरब डॉलर बकाया है। वहीं, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने पाकिस्तान को लगभग 16.83 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। इससे साफ है कि पाकिस्तान की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में चीन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की भी बड़ी भूमिका है।
पाकिस्तान के कुल विदेशी कर्ज में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के कुल विदेशी कर्ज में 107.076 अरब डॉलर सार्वजनिक और सार्वजनिक रूप से गारंटीकृत कर्ज है। इसमें वह कर्ज शामिल है, जो सरकार ने सीधे लिया है या जिसकी जिम्मेदारी सरकार ने अपने ऊपर ली है। इसके अलावा 17.58 अरब डॉलर का निजी गैर-गारंटीकृत कर्ज है। यह रकम पाकिस्तान की निजी कंपनियों ने अपने कारोबार और दूसरी जरूरतों के लिए विदेशी संस्थाओं से ली है। कुल कर्ज में 10.45 अरब डॉलर अल्पकालिक कर्ज भी शामिल है।
पाकिस्तान को किन संस्थाओं और देशों से मिला कर्ज?
पाकिस्तान के सार्वजनिक और सार्वजनिक रूप से गारंटीकृत कर्ज को देखें तो इसमें अलग-अलग तरह के लेनदारों की हिस्सेदारी है।
- बहुपक्षीय संस्थाएं: 56.83 अरब डॉलर
- द्विपक्षीय लेनदार: 42.43 अरब डॉलर
- निजी लेनदार: 7.8 अरब डॉलर
बहुपक्षीय लेनदारों में वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक जैसी संस्थाएं शामिल हैं। वहीं, द्विपक्षीय कर्ज किसी दूसरे देश की सरकार से लिया जाता है। चीन इसी श्रेणी का एक प्रमुख कर्जदाता है।
कर्ज चुकाने के लिए पाकिस्तान को मिला 16 साल का समय
रिपोर्ट में पाकिस्तान को मिले कर्ज की शर्तों का भी जिक्र किया गया है। आधिकारिक लेनदारों से लिए गए कर्ज को चुकाने के लिए पाकिस्तान को औसतन 16 साल का समय मिला है। इसमें 4 साल का ग्रेस पीरियड भी शामिल है। इसका मतलब है कि कर्ज मिलने के शुरुआती चार साल तक पाकिस्तान को मूलधन की किस्त चुकाने से राहत मिलती है। इसके अलावा इन कर्जों पर औसतन 3.6 फीसदी ब्याज दर लागू है। यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलने वाले सामान्य कमर्शियल लोन की तुलना में कम है।
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ता कर्ज क्यों है चिंता?
पाकिस्तान का विदेशी कर्ज लगातार बढ़ना उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। देश को एक तरफ पुराने कर्ज का ब्याज और किस्त चुकानी है, तो दूसरी तरफ विकास योजनाओं और जरूरी आयात के लिए भी विदेशी मुद्रा की जरूरत पड़ती है। ऐसे में पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी कमाई बढ़ाने और विदेशी कर्ज पर निर्भरता कम करने की है। अगर देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं होती है, तो आने वाले समय में कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है।









