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नेतन्याहू की सत्ता पर संकट, आइजनकोट के समर्थन में उतरीं 6 पार्टियां

इजराइल में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को संसद के 120 में से 67 सदस्यों का समर्थन मिला है, जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसदों ने अपनी राय दी है। अब सभी की नजरें राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के फैसले पर टिकी हैं। वह रविवार को ऐलान करेंगे कि किस नेता को नई सरकार बनाने का पहला मौका दिया जाएगा।

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हालांकि, आइजनकोट को ज्यादा सांसदों का समर्थन मिलने के बावजूद सरकार बनाना आसान नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि उनका समर्थन कर रही सभी पार्टियां एक साथ गठबंधन सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में इजराइल में नई सरकार का रास्ता अभी भी उलझा हुआ है।

आइजनकोट को 67 सांसदों का समर्थन, नेतन्याहू को मिले 46 वोट

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इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने 5 नवंबर को संसद में चुनी गई पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद बताया कि गादी आइजनकोट को 67 सांसदों ने सरकार बनाने की सिफारिश की है। वहीं, मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में 46 सांसद सामने आए हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ने साफ किया कि केवल सांसदों की संख्या देखकर फैसला नहीं लिया जा सकता। उनके मुताबिक, राजनीतिक दलों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं और कुछ पार्टियां एक-दूसरे के साथ सरकार बनाने को तैयार नहीं हैं। इसलिए वह पार्टी नेताओं से अलग-अलग बातचीत भी करेंगे।

छह पार्टियों ने आइजनकोट का नाम सुझाया, लेकिन गठबंधन में पेंच

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गादी आइजनकोट को छह राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है। इनमें चार यहूदी पार्टियां और दो अरब पार्टियां शामिल हैं। इन सभी दलों के सांसदों की संख्या मिलाकर 67 होती है। आइजनकोट के समर्थन वाले यहूदी दलों के पास कुल 48 सीटें हैं, जबकि अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि चार यहूदी दलों में से तीन अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं। दूसरी ओर, अरब पार्टियां नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के लिए आइजनकोट का समर्थन कर रही हैं। ऐसे में उन्हें समर्थन तो मिल रहा है, लेकिन सभी दलों को एक साथ लाकर सरकार बनाना बड़ी चुनौती होगी।

क्या है जॉइंट लिस्ट और क्यों है इसकी भूमिका अहम?

इजराइल की राजनीति में जॉइंट लिस्ट अरब समुदाय से जुड़ा एक अहम राजनीतिक गठबंधन रहा है। साल 2015 में चार अरब पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। इनमें हदाश, राअम, ताल और बलद शामिल थीं। इस गठबंधन का मकसद अरब समुदाय के नागरिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करना था।

इन पार्टियों की विचारधारा और राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग रही हैं।

  • हदाश: वामपंथी विचारधारा वाली पार्टी है। यह अरब और यहूदी नागरिकों के समान अधिकार, मजदूरों के हित और फिलिस्तीन के साथ शांति की वकालत करती है।
  • ताल: अहमद तिबी से जुड़ी पार्टी है। यह अरब नागरिकों के अधिकार, शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों की मांग करती है।
  • बलद: अरब राष्ट्रवादी और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाली पार्टी है। यह सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों की बात करती है।
  • राअम: मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली अरब पार्टी है, जो नागरिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के मुद्दों पर काम करती है।

साल 2015 में इन चारों दलों ने मिलकर जॉइंट लिस्ट के नाम से चुनाव लड़ा था और 13 सीटें हासिल की थीं। बाद के चुनावों में गठबंधन की सीटों में बदलाव हुआ और साल 2020 में इसे 15 सीटें मिली थीं।

नेतन्याहू को इन पार्टियों का समर्थन

बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड को चुनाव में सबसे ज्यादा 27 सीटें मिली थीं। हालांकि, उनके साथ गठबंधन में शामिल धार्मिक और राष्ट्रवादी दलों को मिलाकर कुल 53 सीटें ही हुईं। सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

नेतन्याहू के समर्थन में मुख्य रूप से ये दल सामने आए हैं:

  • लिकुड: बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी।
  • शास: आर्ये डेरी के नेतृत्व वाली धार्मिक पार्टी।
  • रिलिजियस जायनिज्म: बेजालेल स्मोट्रिच की पार्टी।
  • ओत्जमा येहुदित: इतमार बेन ग्विर के नेतृत्व वाली पार्टी।

वहीं, यूनाइटेड तोराह जूडिज्म ने इस बार किसी भी नेता के नाम की सिफारिश नहीं की। इस पार्टी के पास सात सीटें हैं और यह पहले नेतन्याहू की सहयोगी रही है। इसके समर्थन से सरकार बनाने के समीकरण बदल सकते हैं।

इजराइल में सरकार बनाने के लिए मिलता है 42 दिन का समय

इजराइल में राष्ट्रपति की भूमिका सरकार गठन के दौरान काफी अहम होती है। चुनाव के बाद राष्ट्रपति उस सांसद को सरकार बनाने का मौका देते हैं, जिसके पास गठबंधन तैयार करने की बेहतर संभावना होती है। सरकार बनाने का मौका मिलने के बाद संबंधित नेता को 28 दिन का समय मिलता है। अगर इस अवधि में सरकार नहीं बन पाती, तो राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। इस तरह कुल 42 दिनों के भीतर सरकार बनाने की कोशिश करनी होती है। अगर कोई भी नेता सरकार बनाने में सफल नहीं होता, तो राष्ट्रपति किसी दूसरे सांसद को मौका दे सकते हैं। सभी प्रयास नाकाम होने पर देश में फिर से चुनाव कराने की स्थिति बन सकती है।

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10 नवंबर को होगी नई संसद की पहली बैठक

इजराइल की नई संसद यानी नेसेट की पहली बैठक 10 नवंबर को होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति रविवार को बताएंगे कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। इसके बाद संबंधित नेता को बहुमत जुटाने के लिए सहयोगी दलों से बातचीत करनी होगी। फिलहाल गादी आइजनकोट के पास सांसदों की सिफारिशों का आंकड़ा ज्यादा है, लेकिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ऐसे में राष्ट्रपति का फैसला और उसके बाद होने वाली गठबंधन की बातचीत इजराइल की राजनीति की अगली दिशा तय करेगी।

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