LLB में एडमिशन के लिए उम्र की सीमा हटी

LLB में दाखिला लेने के लिए अब उम्र की कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 3 साल और 5 साल के लॉ डिग्री कोर्स में एडमिशन के लिए तय ऊपरी आयु सीमा हटा दी है। बार काउंसिल ने सुप्रीम कोर्ट को भी अपने इस फैसले की जानकारी दी है। इससे उन लोगों के लिए कानून की पढ़ाई का रास्ता खुल गया है, जो उम्र संबंधी शर्तों के कारण पहले लॉ कॉलेज में दाखिला नहीं ले पा रहे थे।
इस फैसले से नौकरी कर रहे लोगों, दूसरे क्षेत्र में करियर बना चुके उम्मीदवारों और निजी कारणों से पहले लॉ की पढ़ाई नहीं कर पाने वालों को राहत मिलेगी। अब वे भी अपनी इच्छा के अनुसार कानून की पढ़ाई कर वकालत के क्षेत्र में भविष्य बना सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में BCI ने क्या जानकारी दी?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि काउंसिल की जनरल काउंसिल ने लॉ कोर्स में दाखिले की अधिकतम आयु सीमा हटाने का प्रस्ताव पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया गया कि इस फैसले के पीछे शैक्षणिक कारणों पर विचार किया गया है। BCI का मानना है कि केवल उम्र के आधार पर किसी योग्य उम्मीदवार को कानूनी शिक्षा से रोकना उचित नहीं है। काउंसिल के मुताबिक, लॉ की पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पहले से ही उपस्थिति, परीक्षा, पढ़ाई के घंटे और ट्रेनिंग जैसे नियम मौजूद हैं। ऐसे में अधिकतम उम्र की अलग से शर्त रखने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने BCI के इस फैसले को रिकॉर्ड पर लेते हुए उम्र सीमा को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया।
पहले LLB एडमिशन के लिए क्या थी उम्र सीमा?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लीगल एजुकेशन रूल्स 2008 के तहत लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अलग-अलग आयु सीमा तय की गई थी।
- 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड LLB कोर्स: सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र 20 साल और आरक्षित वर्ग के लिए 22 साल थी
- 3 वर्षीय LLB कोर्स: इसमें दाखिले के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 साल निर्धारित की गई थी।
बाद में सितंबर 2016 में BCI ने एक सर्कुलर जारी कर इन आयु सीमाओं को दोबारा लागू कर दिया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। मार्च 2017 में शीर्ष अदालत ने इन आयु सीमाओं पर रोक लगा दी थी। इसके बाद अलग-अलग अदालतों में भी इस नियम को लेकर मामले सामने आए। अब BCI के नए फैसले से इस विवाद पर विराम लगने की उम्मीद है।
3 साल और 5 साल के LLB कोर्स में क्या होगा फायदा?
BCI के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जो उम्र बढ़ने के कारण कानून की पढ़ाई का सपना पूरा नहीं कर पा रहे थे। अब ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद कोई भी योग्य उम्मीदवार 3 साल के LLB कोर्स में दाखिला लेने के लिए आवेदन कर सकेगा। वहीं, 12वीं के बाद 5 साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों पर भी अधिकतम आयु सीमा की बाधा नहीं रहेगी। इससे उन लोगों के लिए भी रास्ता खुलेगा, जो किसी दूसरे क्षेत्र में काम करने के बाद कानून की पढ़ाई शुरू करना चाहते हैं। हालांकि, एडमिशन के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता, प्रवेश परीक्षा और संबंधित कॉलेज के नियमों का पालन करना होगा।
क्या अब किसी भी उम्र में बन सकेंगे वकील?
BCI के इस फैसले से अब कानून की पढ़ाई के लिए अधिकतम उम्र की बाधा हट गई है। इसका मतलब है कि योग्य उम्मीदवार अपनी उम्र की परवाह किए बिना LLB कोर्स में प्रवेश लेने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, केवल डिग्री हासिल करना वकालत शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार को कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत से जुड़े अन्य जरूरी नियमों और बार काउंसिल की निर्धारित प्रक्रियाओं को भी पूरा करना होगा। कुल मिलाकर, BCI का यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत है, जो किसी भी उम्र में कानून की पढ़ाई शुरू करना चाहते हैं। अब उम्र उनके LLB करने के सपने के रास्ते में रुकावट नहीं बनेगी।
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