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चैत्र मास में आएंगा विशेष पर्वों का दौर 19 मार्च को रंगपंचमी से होगी शुरुआत

30 मार्च को मनाया जाएगा हिंदू नववर्ष, इसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की शुरुआत 15 मार्च से होगी। इसके बाद पांच विशेष पर्व मनाए जाएंगे। सबसे पहले 19 मार्च को रंगपंचमी पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन से भगवान चिंतामण गणेश की जत्रा भी शुरू होगी। इस बार चार जत्रा रहेगी। इसके बाद क्रमश: 26 मार्च, 2 अप्रैल और 9 अप्रैल को जत्राएं होंगी।

21 मार्च को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। इस दिन मां शीतला को ठंडे भोजन का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। घरों में इसी प्रसाद को ग्रहण किया जाता है। महिलाएं यह पूजन ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय होने के पहले तक किया जाता है। शीतला माता की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इससे परिवार के बच्चों को कोई बीमारी नहीं होती। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस दिन ठंडा भोजन करने से ऋतु परिवर्तन का प्रभाव कम होता है। साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

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24 को दशा माता का पूजन
24 मार्च को दशमी तिथि पर दशा माता का पूजन होगा। यह तिथि पूर्ण तिथि मानी जाती है। इस दिन महिलाएं उपवास रखकर पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करती हैं। इसके अलावा कथा भी सुनाई जाती है। दशा माता के धागे में दस गांठें लगाई जाती हैं। इन दस गांठों का अर्थ है 10 प्रकार के दोषों से मुक्ति और 10 शुभ संकल्पों की प्राप्ति। यह पूजन परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए किया जाता है।

30 मार्च को गुड़ी पड़वा और नवरात्रि
30 मार्च को हिंदू नववर्ष मनाया जाएगा। अलसुबह सूर्य को अघ्र्य देकर नववर्ष का स्वागत किया जाएगा। इस दौरान शंख ध्वनि गूंजेगी। इसके अलावा महाराष्ट्रीय परिवारों में गुड़ीपड़वा पर्व मनाया जाएगा। गुड़ी सजाकर उसकी पूजा की जाएगी और विभिन्न तरह के व्यंजन भी बनाए जाएंगे। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की शुुरुआत होगी। दैवीय मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान होंगे और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी।

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