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गफलत में जुटाई व्यवस्था, स्नान करने 20 लोग भी नहीं पहुंचे

उज्जैन। त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर पर शनिश्चरी अमावस्या की गफलत में प्रशासनिक अधिकारियों ने एसडीएम के लेटर के बाद तमाम व्यवस्थाएं जुटाई लेकिन जिनकी ड्यूटी लगाई वे हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। शनिवार की सुबह यहां स्नान के लिए 20 लोग भी नहीं पहुंचे। मंदिर में भी सामान्य ही भीड़ रही, यह उतनी ही थी जितनी हर शनिवार को रहती है। अक्षर विश्व ने शुक्रवार के अंक में ही खुलासा किया था कि प्रशासनिक अधिकारियों ने शनिश्चरी अमावस्या की गफलत की वजह से कई सारे अधिकारियों-कर्मचारियों की स्नान पर्व के मद्देनजर ड्यूटी लगा दी है जबकि शनिवार को अमावस्या मानी ही नहीं गई।

 

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यह स्थिति एसडीएम कोठी महल द्वारा जारी किए गए एक लेटर के बाद निर्मित हुई। अधिकारियों की ड्यूटी लगाने वाले किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने अपने स्तर पर यह पता करने की कोशिश ही नहीं की कि ड्यूटी तो लगा रहे है, लेकिन वास्तव में शनिश्चरी अमावस्या है भी या नहीं। एक लेटर आया तो तमाम सरकारी विभागों में कट, कॉपी, पेस्ट का खेल शुरू हो गया और इसके बाद पुराने ड्यूटी आदेशों में नाम बदलकर नए जारी कर दिए गए।

शनिवार की सुबह त्रिवेणी घाट पर केवल एक गाड़ी में कुछ बाहरी दर्शनार्थी पहुंचे थे। इन्होंने ही यहां स्नान किया, दर्शन किए और रवाना हो गए। इसके अलावा घाट पर सन्नाटा पसरा था। त्रिवेणी शनि मंदिर में सुबह 7 से 10 बजे के बीच बमुश्किल 500 लोग दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर के पुजारी राकेश बैरागी के मुताबिक हमने मंदिर समिति प्रशासक और अन्य अधिकारियों को काफी पहले ही बता दिया था कि शनिवार को अमावस्या का पर्व आंशिक रहेगा लिहाजा इसे स्नान पर्व नहीं माना जाएगा।

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