जैसा खाता वैसा दाम…एक खाते पर 30 से 40 हजार तक कमाते हैं ठग

मामला लोन के नाम पर लोगों के खाते खुलवाकर एटीएम, चैकबुक जारी कराने का

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन ऑनलाइन फ्रॉड करने वाली गैंग द्वारा लोगों के बैंक में खाते खुलवाने के बाद पासबुक, एटीएम, चैक लेकर इस काम में लगे गुर्गों को 30 से 40 हजार रुपये एक खाते के बदले दिये जाते थे। पुलिस गिरफ्त में आये बदमाशों ने रिमाण्ड में यह बात भी कबूली कि जिस प्रकार का खाता होता उतने दाम मिलते थे।
चिमनगंज थाना एसआई विकास देवड़ा ने चर्चा में बताया कि पिछले दिनों भुवन परमार निवासी राघवी और सुरेन्द्र साहू निवासी कवर्धा छत्तीसगढ़ को एमआर-5 स्थित ब्रिज के पास से पकडक़र इनके कब्जे से अलग-अलग बैंकों के 30 एटीएम, 20 चैकबुक, 15 सिमकार्ड, बैंक की पासबुक, चैकबुक और अनेक लोगों के नाम लिखी पर्चियां बरामद हुई थीं।
पकड़ाये बदमाशों ने पुलिस को पूछताछ में बताया था कि वह लोग छोटा मोटा व्यापार, धंधा करने वाले लोगों को बैंक से बड़ा लोन दिलाने के नाम पर उनसे आधार, वोटर आईडी, एड्रेस प्रूफ आदि लेकर बैंकों में खाता खुलवाते। खाते सेविंग या करंट होता था। लोगों के बैंक में खाते खुलने के बाद उक्त लोग पासबुक, एटीएम, चैकबुक आदि अपने पास रख लेते और लोगों को लोन की प्रक्रिया होने का झांसा देते थे। इसके बाद शुरू होता था खातों को बेचने का सिलािसला।
फर्जी ट्रांजेक्शन के उपयोग में आते हैं खाते
एसआई देवड़ा ने बताया कि ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले, टैक्स चोरी और हवाला कारोबारी ऐसे बैंक खातों का उपयोग करते हैं। फिलहाल जिन बदमाशों के नाम सामने आये हैं उनके तार ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े होने की बात सामने आई है। बदमाशों द्वारा लोगों से ओटीपी, लिंक भेजकर या दूसरे तरीकों से ऑनलाइन धोखाधड़ी करने के बाद उनके बैंक खातों से रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करते हैं। यह उन्हीं लोगों के खाते होते हैं जिन्हें लोन दिलाने के नाम पर पुलिस गिरफ्त में आये बदमाश खुलवाकर बेच रहे थे। एसआई देवड़ा के अनुसार उक्त खातों में लाखों-करोड़ों का लेनदेन फर्जी तरीके से होता है। जब बैंक की सायबर क्राइम टीम की नजर में ऐसे खाते आते हैं तो बैंक द्वारा ही खातों को फ्रीज करने की कार्यवाही की जाती है।
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में बैठे ठग खरीदते थे अकाउंट्स
पुलिस ने जब रिमाण्ड पर लेकर दोनों युवकों से पूछताछ शुरू की तो उन्होंने राजनांदगांव छत्तीसगढ़ में रहने वाले अपने साथी सुरेन्द्र साहू की जानकारी दी। बदमाशों ने कबूला कि सुरेन्द्र साहू द्वारा हमसे बैंक खाते, एटीएम व पासबुक खरीदी जाती थी। करंट या सेविंग अकाउंट के रेट अलग-अलग थे। उसके अलावा अन्य लोग भी खाते खरीदते थे जिसके बदले एक खाते पर 30 से 40 हजार रुपये मिलते थे। छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र में भी खाते बेचना बदमाशों ने कबूला है। पुलिस ने छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में दबिश दी लेकिन वहां से दो बदमाश पहले ही फरार हो गये। वहीं पुलिस टीम अब महाराष्ट्र पहुंचकर एक बदमाश की तलाश करेगी।









