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तड़के 5 बजे अचानक निगम की पोकलेन पहुंची श्री सिद्ध सुकृत ट्रस्ट का निर्माण ढहाया

कार्रवाई- 15 दिन में लालपुल- नृसिंह घाट पर चौथे बड़े निर्माण पर तोडफ़ोड़

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दो दिन पहले पहुंचा था प्रशासनिक अमला, मांगी थी अंडर स्टैडिंग

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ क्षेत्र में हो रहे ताजा निर्माण पर निगम की पोकलेन कहर बनकर टूट रही है। लालपुल-नृसिंह घाट पर 15 दिन के चौथा निर्माण रविवार को ढहा दिया गया। तड़के पांच बजे अचानक निगम की टीम पोकलेन लेकर पहुंची और श्री सिद्ध महादेव, सुकृत संस्कृत ट्रस्ट का लालपुल-नृसिंह घाट रोड के निर्माणाधीन भवन के दो हॉल तोड़ दिए। कमरे का सामान निकालने के लिए ट्रस्ट पदाधिकारियों को टाइम दिया है, अगर इन्होंने नहीं हटाया तो फिर से कार्रवाई होगी। इस रोड पर करीब 20 निर्माण की पहचान तोडऩे के लिए की गई है।

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दरअसल, सिंहस्थ की तैयारी अब शहर में युद्ध स्तर पर शुरू हो गई है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है सिंहस्थ क्षेत्र में हो रहे नए निर्माण। महाकाल लोक बनने के बाद लालपुल-नृसिंह घाट रोड पर स्थित आश्रम-मठों की जमीन पर तेजी से निर्माण काम चल रहे हैं। इनमें से कई को लग्जरी बनाया जा रहा है।

पहले खुली पड़ी रहने वाली जमीनों पर हजारों स्क्वेयर फीट में निर्माण चल रहा है। समन्वय परिवार ट्रस्ट को छोड़ दे तो कइयों के पास अनुमति तक नहीं है। ऐसे में इन निर्माणों को ढहाने की कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में नृसिंह घाट रोड स्थित श्री सिद्ध महादेव सुकृत संस्कृत ट्रस्ट का निर्माण तोड़ा गया। इस ट्रस्ट के प्रमुख इंदौर के सुरेश शाहरा हैं और उनके परिवार के मनीष और नितेश शाहरा की देखरेख में यह निर्माण किया जा रहा था।

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फोन आने की चर्चा
कार्रवाई रुकने का कारण भले ही सामान निकालना बताया जा रहा है लेकिन यह भी चर्चा है कि निर्माण हटाने के बाद ताबड़तोड़ फोन आए। इसके बाद नगरनिगम की टीम चुपचाप मौके से लौट गई।

दो नोटिस दिए थे, जवाब नहीं आया, निर्माण नहीं रोका: संबंधित ट्रस्ट को दो नोटिस दिए थे। इनका जवाब नहीं आया। बावजूद इसके निर्माण नहीं रोका गया। तड़के दो हॉल तोड़े हैं। कमरों का सामान निकालने के लिए समय दिया गया है।
राजकुमार राठौर,
भवन अधिकारी, जोन 3

15 दिन में आश्रम-मठ के निर्माण पर चौथी कार्रवाई: नगरनिगम की 15 दिन में आश्रम मठ के निर्माण पर यह चौथी कार्रवाई है। यह सवालों के घेरे में इसलिए है कि यह निर्माण एक से लेकर दो साल से चल रहे थे। यह ५ से लेकर १५ हजार स्केवयर फीट एरिया तक के हैं। ऐसे में काम शुरू होते ही समय इन्हें क्यों नहीं रोका गया। अगर तब ही रोक दिया जाता तो इतनी बड़ी बिल्डिंगें नहीं बनतीं और इन पर हुए खर्च का नुकसान भी नहीं होता।

अंडर स्टैंडिंग लेने आए थे, नहीं दी तो तोड़ा: दो दिन पहले राजस्व की टीम अंडरस्टैंडिंग लेने आई थी। वह चाहती थी कि ट्रस्ट लिखकर दे कि सिंहस्थ में यह भवन प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। इस पर बात नहीं बनी, इसलिए तोड़ दिया।
शिवम मिश्रा, केयर टेकर
श्री सिद्ध महादेव, सुकृत संस्कृत ट्रस्ट

क्या था निर्माण
ट्रस्ट के पास यहां करीब डेढ़ बीघा जमीन (33,750 स्क्वेयर फीट)है। इसमें से 50 बाय 100फीट (5 हजार स्क्वेयर फीट पर ) पर निर्माण किया गया था। दो मंजिला भवन की निचली मंजिल पर दो हॉल और ऊपर कमरे बने थे। आगे निर्माण करने के लिए कॉलम-बीम डाल दिए गए थे। जनवरी में नोटिस दिया गया था। दो नोटिस का जवाब तक नहीं दिया गया था। ऐसे में नगरनिगम की टीम तड़के पांच बजे पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी। दो हॉल तोडऩे के बाद केयर टेकर शिवम मिश्रा ने कमरों का सामान निकालने के लिए समय मांगा तो कार्रवाई रेाक दी गई।

इनके अब तक भवन तोड़े
1 माधवानंद आश्रम, लालपुल के पास। करीब 10 हजार स्क्वेयर फीट में बना दो मंजिला भवन ढहाया।

2 श्री स्वामी संादीपेंद्र आश्रम लालपुर। 8 हजार स्क्वेयर फीट का भवन तोड़ा।

3 हरियाणा आश्रम। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्योतिगिरी। 8 हजार स्कवेयर फीट का चार मंजिला भवन गिराया। ३५ कमरे निर्माणाधीन थे।

4 श्री सिद्ध महादेव, सुकृत संस्कृत ट्रस्ट । 5 हजार स्क्वेयर फीट का निर्माण तोड़ा।

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