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भोले-शंभू, भोलेनाथ के जयकारों से गूंजी अवंतिका, सीएम डॉ. यादव ने रामघाट पर किया पूजन

उज्जैन। सोमवार को एक बार फिर अवंतिका भोले शंभू, भोलेनाथ के जयकारों से गंूज उठी। श्रावण-भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में यह पांचवी सवारी थी। हालांकि इस सवारी में सावन की चार सवारियों की तुलना में कम ही श्रद्धालु पहुंचे। सीएम डॉ. मोहन यादव रामघाट पर सवारी में शामिल हुए।

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दत्तअखाड़ा से रामघाट तक का सफर उन्होंने बोट से किया। रामघाट पर ही हेलिकॉप्टर ने पालकी पर पुष्पवर्षा भी की। पांचवीं सवारी का आकर्षण 84 महादेव थे। इंदौर से आए रोबोट महाकाल सेवक ने भी अपनी उपस्थिति में सवारी में नया आकर्षण पैदा किया। राजसी सवारी 7 सितंबर को निकलेगी। सवारी शुरू होने से पहले सभा मंडपम में सभी मुघौटों का पूजन किया गया। सीएम भी यहां पहुंचने वाले थे लेकिन ओरछा से देरी से पहुंचने के कारण पूजन की रस्म प्रभारी मंत्री गौतम टैटवाल, मंत्री नरेंद्र पटेल, लखन पटेल, प्रतिमा बागरी, विधायक सतीश मालवीय आदि ने पूरी की।

सीएम ने झांझ, मंजीरे, डमरू और ढोल बजाया

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मुख्यमंत्री ने रामघाट पर क्षिप्रा नदी के जल से भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया। दत्त अखाड़ा घाट से वे बोट में सवार होकर पहुंचे थे। भगवान श्री महाकालेश्वर की पालकी के रामघाट पहुंचने पर शंखनाद भी किया गया। पूजन एवं आरती के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर बैंड द्वारा मधुर शिवधुनों की प्रस्तुतियां दी गईं। पुलिस बैंड ने भी यहां तराने सुनाए। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में सीएम डॉ. मोहन यादव भी भावविभोर हो गए। उन्होंने झांझ, मंजीरे, डमरू और ढोल बजाया।

मां क्षिप्रा के जल से भगवान का अभिषेक एवं पूजन करने के बाद पालकी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक एवं गोपाल मंदिर पहुंची। यहां सिंधिया ट्रस्ट के पुजारी ने पालकी पूजन किया। यहां से सवारी पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची, जहां सवारी का विश्राम हुआ।

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