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धूप दशमी : मंदिरों में बने मंडल विधान, दिया संदेश

पर्युषण पर्व के दौरान श्रद्धालुओं ने 12 से 18 घंटे की मेहनत से तैयार किए आकर्षक मंडल विधान

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। पर्युषण पर्व के दौरान आई दशमी तिथि पर जैन समाज ने धूप दशमी (सुगंध दशमी ) मनाई। धूम की खुशबू से जिनालय महक उठे। श्रद्धालुओं ने 12 से 18 घंटे की मेहनत कर आकर्षक विधान मंडल सजाए। इनमें मोरधन (मिलेट्स) को अलग-अलग रंग में रंग कर जैन धर्म के अलग-अलग घटनाक्रम के आधार पर प्रसंग दर्शाए गए । इनके माध्यम से संदेश देने की कोशिश की गई। कई मंदिरों मेें मंडल की रचना करने में पूरी रात समाजजनों की हो गई।

दरअसल, दिगंबर जैन समाज में धूप दशमी का खास महत्व है। सोमवार को समाजजन भक्ति भाव के साथ जैन मंदिरों में पहुंचे और दर्शन किए। यहां उन्होंने धूप अर्पित की। मंदिरों में विशेष साज-सज्जा और रोशनी की गई और विधानमंडल बनाए गए।

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चंद्र प्रभु अतिशय क्षेत्र, भेरूगढ़
चंद्रप्रभु अतिशय क्षेत्र भेरूगढ़ में पर्व का उत्साह देखा गया। यहां रविवार रात से ही मंडल विधान बनाने की तैयारी शुरू हो गई थी। अनुश्री बाकलीवाल और आयुषी जैन नौहरकलां ने रंगोली से दसलक्षण पर्व का संदेश देता मंडल विधान बनाया। जानकारी राजकुमार बाकलीवाल ने दी।

श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, नयापुरा
श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नयापुरा में भी आकर्षक मंडल विधान बनाया गया। आशीष सोगानी, अर्पित पाटनी, हितेश पाटनी, चित्रांगदा गोधा, उमेश जैन, अर्पित बाकलीवाल, आशीष लुहाडिय़ा, आज्ञा अजमेरा, प्रांशी गोधा, मोक्ष पाटनी, देव लुहाडिय़ा ने इस कार्य में सहयोग दिया।

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यह संदेश दिया
रंगोली के माध्यम से दसलक्षण पर्व के दस अंग जैसे उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम अकिंचन, और उत्तम ब्रह्मचर्य को दर्शाया गया।

पवित्र प्रतीक- रचना के केंद्र में उगते सूर्य के समान प्रकाशमान आकृति के भीतर जैन धर्म के अहिंसा के प्रतीक (हथेली और चक्र)को उकेरा गया। यह आत्मिक शांति और अहिंसा का संदेश देता है।

कला- चमकीले पीले, लाल, भूरे और नीले रंग के अनूठे मेल से बनाई गई इस रंगोली के मुख्य भाग पर बड़े शब्दों में दसलक्षण धर्म का जिक्र किया गया।

पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, फ्रीगंज
यहां मोरधन से मंडल विधान सजाया गया। समाज के युवाओं ने मोरधन को पहले अलग-अलग कलर में रंगा। फिर इसे सुखाया गया। इसमें माधुरी हथिनि की वापसी का प्रसंग दर्शाया गया। रविवार शाम ५ से पांच लोगों की टीम ने काम शुरू किया और सोमवार की सुबह यह पूरा हुआ। अलग-अलग रंग में बने मंडल विधान को निहारने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

नेमिनाथ जैन मंदिर, जयसिंहपुरा

नेमिनाथ जैन मंदिर जयसिंहपुरा के मंदिर भी मंडल विधान बनाया गया। जैन धर्म के दसधर्म का प्रतीक मंडल आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण का संदेश देता है। मंडल के दस खंड उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य के प्रतीक हैं। मध्य में स्थित जिनेंद्र स्वरूप आत्मा की शुद्ध अवस्था और सिद्धत्व की ओर बढऩे का संकेत देता है। इस मंडल का संदेश है क्रोध, अहंकार, कपट और लोभ का त्याग कर संयम व आत्मचिंतन के माध्यम से आत्मा को शुद्धता की ओर ले जाना।

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