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पटनी बाजार के सराफा व्यापारियों का सोना लेकर बंगाली कारीगर फरार

फिलहाल रिपोर्ट दर्ज नहीं, कारोबारी कर रहे लौटने का इंतजार

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। पटनी बाजार के सराफा व्यापारियों की नींद इन दिनों उड़ी हुई है। इसकी वजह है सालों से काम कर रहा एक बंगाली आभूषण कारीगर। यह कारीगर पिछले पांच दिन से लापता है और उसके मकान पर ताला लगा है। उसके पास व्यापारियों का करीब डेढ़ किलो सोना है। मकान पर ताला होने से व्यापारी घबराए हुए हैं और कारीगर की अपने स्तर पर तलाश कर रहे हैं। हालांकि व्यापारियों को उम्मीद हैं कि कारीगर एक दो दिन में लौट आएगा। फिलहाल इसी कारण मामला थाने तक नहीं पहुंचा है।

जामा मस्जिद सब्जीमंडी के पास रहने वाले अलीभाई बंगाली आभूषण कारीगर हैं। वह करीब 35 सालों से उज्जैन में काम कर रहे हैं। वह व्यापारियों से सोना लेते हैं और पारिश्रमिक पर गहने बनाते हैं। अमूमन सोना लेने के दो से तीन दिन बाद वह आभूषण तैयार कर व्यापारियों को लौटा देते हैं। मंगलवार को भी उन्होंने व्यापारियों से सोना लिया था और गुरुवार तक उन्हें गहने लौटाने थे लेकिन वह नहीं आए। गुरुवार के बाद शुक्रवार भी गुजरा तो व्यापारियों को शंका हुई और इनमें से कुछ अलीबाई के घर पहुंचे लेकिन वहां ताला था। ऐसे में चर्चाएं शुरू हो गईं। अलीभाई के लापता होने के बाद व्यापारी उनको दिए सोने का हिसाब मिलाने लगे। बताया जा रहा है कि करीब 10 व्यापारियों का डेढ़ किलो सोना अलीभाई के पास है। फिलहाल इस संबंध में व्यापारियों ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। अलीभाई की साख को देखकर व्यापारी उम्मीद जता रहे हैं कि वह लौट आएंगे।

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बहती गंगा में हाथ धोने को कुछ व्यापारी तैयार
अली भाई के पास करीब 10 व्यापारियों का सोना हैं लेकिन उनके जाने के बाद अब कुछ नए व्यापारी भी सामने आ रहे हैं। वह अपना सोना जाने की बात भी कर रहे हैं। सच क्या है, यह अलीभाई के सामने आने पर ही पता चलेगा।

दो तरह के कारीगर सक्रिय हैं बाजार में सराफा बाजार में दो तरह के कारीगर हैं। पहले वह हैं जो पारिश्रमिक पर काम करते हैं। यह व्यापारियों से सोना लेकर गहने बनाते हैं और अपना भुगतान ले लेते हैं।

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दूसरे कारीगर वह होते हैं जो अपने सोने से ही गहने बनाते हैं और व्यापारियों को बेचने के लिए मुहैया कराते हैं। इस श्रेणी के कारीगर कम हैं और इनके लापता होने की आशंका कम रहती है, क्योंकि सोने के आभूषण इनके खुद के होते हैं। अलीभाई पहली श्रेणी के कारीगर थे।

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