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UPI चार्ज को लेकर BharatPe और अश्नीर ग्रोवर आमने-सामने, MDR पर बढ़ा विवाद

₹2,000 से ज्यादा के UPI लेनदेन पर MDR को लेकर कंपनी ने किया समर्थन, अश्नीर ग्रोवर ने फैसले पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली। UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों, व्यापारी संगठनों और रिटेलर्स की ओर से इस व्यवस्था का विरोध किया जा रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि MDR कोई टैक्स नहीं है, बल्कि UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की व्यवस्था है। सरकार के मुताबिक, इसका सीधा शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा।

इसी बीच देश की प्रमुख फिनटेक कंपनियों में शामिल BharatPe ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के MDR फ्रेमवर्क का समर्थन किया है। दूसरी ओर, कंपनी के सह-संस्थापक और पूर्व CEO अश्नीर ग्रोवर ने इस फैसले की आलोचना की है। दोनों के रुख अलग होने के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है।

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BharatPe ने MDR फ्रेमवर्क का किया समर्थन

BharatPe के CEO नलिन नेगी ने कहा कि नया MDR फ्रेमवर्क UPI को ग्राहकों के लिए मुफ्त बनाए रखने के साथ-साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत और टिकाऊ बनाने में मदद करेगा।

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उन्होंने कहा कि ग्राहकों से UPI भुगतान के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही P2PM फ्रेमवर्क के तहत छोटे और माइक्रो मर्चेंट्स को शून्य MDR के साथ सुरक्षा मिलती रहेगी।

नेगी ने NPCI के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि करीब 96% पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन पर नए फ्रेमवर्क का कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि BharatPe हमेशा छोटे व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता देता रहा है और ऐसा ढांचा जरूरी है जो व्यापारियों के साथ पूरे डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को भी मजबूत करे।

₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर ग्रोवर ने उठाए सवाल

अश्नीर ग्रोवर ने ₹2,000 से ज्यादा के UPI लेनदेन पर MDR लगाने के फैसले की आलोचना की है। उनका तर्क है कि UPI भुगतान पर लगाया जाने वाला कोई भी शुल्क स्पष्ट रूप से टैक्स की श्रेणी में बताया जाना चाहिए।

ग्रोवर के बयान के बाद BharatPe ने स्पष्ट किया कि उनके विचार कंपनी की वर्तमान नीति या आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

BharatPe ने ग्रोवर से दूरी स्पष्ट की

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि अश्नीर ग्रोवर का 2024 से BharatPe के साथ कोई संबंध नहीं है। प्रवक्ता के मुताबिक, ग्रोवर न तो कंपनी के शेयरधारक हैं और न ही किसी अन्य रूप में कंपनी से जुड़े हैं।

कंपनी ने कहा कि MDR फ्रेमवर्क और डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को लेकर BharatPe का आधिकारिक पक्ष उसकी मौजूदा नेतृत्व टीम और अधिकृत प्रवक्ताओं द्वारा ही रखा जाता है।

BharatPe की स्थापना में ग्रोवर की थी भूमिका

BharatPe की स्थापना 2018 में अश्नीर ग्रोवर और शाश्वत नकरानी ने की थी। कंपनी मुख्य रूप से दुकानदारों और छोटे व्यापारियों के लिए QR कोड आधारित डिजिटल भुगतान समाधान उपलब्ध कराने के साथ वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में काम करती है।

अश्नीर ग्रोवर ने 2022 में BharatPe छोड़ दी थी। इसके बाद से कंपनी की मौजूदा नेतृत्व टीम और ग्रोवर के बीच सार्वजनिक स्तर पर कई बार मतभेद सामने आते रहे हैं।

MDR को लेकर क्या है विवाद?

MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान लेनदेन की प्रक्रिया में व्यापारी पक्ष से भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों को दिया जाता है। UPI के संदर्भ में इसे लेकर मुख्य बहस इस बात पर है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाए।

BharatPe का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था से छोटे व्यापारियों और आम ग्राहकों पर असर सीमित रहेगा, जबकि अश्नीर ग्रोवर ने शुल्क व्यवस्था के संभावित आर्थिक बोझ को लेकर सवाल उठाए हैं।

फिलहाल MDR को लेकर सरकार, भुगतान कंपनियों, व्यापारियों और डिजिटल भुगतान क्षेत्र से जुड़े पक्षों के बीच बहस जारी है।

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