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महापौर का सम्मान करने पहुंचे कांग्रेस के नेता, भाजपा ने की दिनभर मनुहार

फ्रीगंज में अंबेडकर प्रतिमा के नीचे सत्याग्रह पर अड़े महापौर

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कांग्रेस विधायक और नेता प्रतिपक्ष ने महापौर के समर्थन में संभाला मैदान, बैरवा समाज भी उतरा

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रथ से उतारे जाने से आहत महापौर मुकेश टटवाल का सम्मान करने शनिवार को कांग्रेस नेता पहुंच गए। जिलाध्यक्ष महेश परमार, शहर अध्यक्ष मुकेश भाटी और नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने उन्हें पगड़ी पहनाई और हार-फूल पहनाकर स्वागत किया। हालांकि शुक्रवार को प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में भाजपा नेताओं ने महापौर से मुलकात की थी और उनकी मनुहार की थी। हालांकि महापौर रविवार को फ्रीगंज स्थित अंबेडकर प्रतिमा के नीचे बैठकर सत्याग्रह करने पर अड़े हुए हैं। वे पूर्वाह्न 11 से दोपहर 3बजे तक गांधीवादी तरीके से विरोध प्रकट करेंगे। उनके समर्थन में बैरवा समाज भी मैदान में आ गया है।

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दरअसल, चार साल पहले उज्जैन शहर की जनता ने टटवाल को चुना था। तब उन्होंने सोचा भी नहीं था कि वह सिर्फ कागजी महापौर बन जाएंगे। वह बताते हैं कि ननि में उपेक्षा का यह हाल है उनके मौखिक आदेश अदना सा कर्मचारी भी नहीं मानता। अफसरों की तो बात ही छोड़ दीजिए।

महापौर ने बताया कैसे हो रही उपेक्षा

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प्रमुख मीटिंग में नहीं बुलाना: महापौर बताते हैं कि उन्हें प्रमुख मीटिंग में बुलाया ही नहीं जाता। श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति में वे पदेन सदस्य हैं। पर समिति की मीटिंग में पिछले दो साल उन्हें बुलाया ही नहीं गया।

नगर निगम के अलग-अलग वार्डों में होने वाले भूमिपूजन कार्यक्रम में भी उन्हें नहीं बुलाया जाता। टटवाल कहते हैं कि निमंत्रित नहीं किए जाने से वे भूमिपूजन कार्यक्रम में नहीं जाते हैं।

मीटिंग में वे जो मौखिक निर्देश देते हैं, उस पर अमल नहीं होता। टटवाल कहते हैं ऐसे में अब वे पत्र लिखकर अपनी बात कहते हैं।

बैरवा समाज की बैठक, झलका गुस्सा

बैरवा समाज से आने वाले महापौर मुकेश टटवाल के समर्थन में बैरवा समाज ने शुक्रवार को बैठक की। समाजजनों ने महापौर के साथ रविवार को सत्याग्रह कार्यक्रम में शरीक होने का फैसला किया है। अखिल भारतीय बैरवा समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र मरमट ने बताया कि शहर के प्रथम नागरिक का अपमान है। उनका अपमान लंबे समय से हो रहा है। समाज ने बैठक कर विरोध करने का फैसला किया है। रविवार को समाजजन सत्याग्रह में शामिल होंगे। अगर महापौर के अपमान पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है तो समाजजन से मोहल्लेवार हस्ताक्षर करवाएंगे और प्रदेश स्तर पर यह लड़ाई लड़ेंगे।

दिनभर भाजपा नेता करते रहे मनुहार: इधर डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा नेताओं ने मोर्चा संभाला। प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल के नेतृत्व में सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा महापौर निवास पहुंचे। बैठक में नगर अध्यक्ष भी थे। करीब 1 घंटे तक इन्होंने मनुहार की। सूत्रों का कहना है कि नगर अध्यक्ष ने गलती मान ली। हालांकि महापौर के सामने अब इधर कुआं उधर खाई सी स्थिति है। पीछे हटते हैं तो समाज नाराज और सत्याग्रह करते हैं तो करियर प्रभावित होगा।

इस संबंध में भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल से चर्चा की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।

दलित समाज का अपमान किया

महापौर के साथ हुई अपमानजनक घटना दलित समाज का अपमान है। दलित समाज के टटवाल को राष्ट्रीय अध्यक्ष के रथ से उतारना पूरे दलित समाज का अपमान है। महापौर शहर के प्रथम नागरिक हैं। किसी राजनैतिक कार्यक्रम में उनके साथ क्या व्यवहार किया जाता है यह उस पार्टी का आंतरिक विषय हो सकता है। लेकिन नितिन नवीन का कार्यक्रम सार्वजनिक था, उसमें महापौर को रथ से उतारना लोकतांत्रिक मर्यादा का अपमान है। भाजपा सामाजिक समरसता की बात करती है लेकिन वह इससे कोसों दूर है। कांग्रेस किसी व्यक्ति के पद, पार्टी या राजनैतिक विचारधारा के आधार पर उसके सम्मान का पैमाना तय नहीं करती। महापौर उज्जैन के प्रथम नागरिक हैं तो कांग्रेस के लिए वह सम्मानीय हैं। निर्वाचित महापौर बैरवा समुदाय से आते हैं और भाजपा के सामाजिक समरसता पर सवाल उठना लाजिमी है। कांग्रेस इस मुद्दे पर भाजपा नेतृत्व से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मंाग करते हैं। हम महापौर की पीड़ा में उनके साथ है। हम उनके साथ खड़े हैं।
महेश परमार, विधायक अध्यक्ष जिला कांग्रेस

महापौर का मान-सम्मान रहना चाहिए
महापौर मुकेश टटवाल शहर के प्रथम नागरिक हैं। वे संवैधानिक पद पर हैं। वह चाहे किसी भी राजनैतिक दल के हों, लेकिन सभी को उनका सम्मान करना चाहिए। उनको वाहन से उतार देना गलत है। महापौर की वेदना में हम उनके साथ है। हम उनका सम्मान करने आए हैं। भाजपा के लोगों को इस पर खेद प्रकट करना चाहिए। इस मुद्दे पर पूरी कांग्रेस महापौर के साथ है।
रवि राय, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम

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