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News

  • देश पे वारा

    सरहद के प्रहरी ने अपने, प्राणों को देश पे वारा। चाहे दिन हो चाहे रात, हर पल अपना देश पे…

  • गजल… कांच के घर है

    हाथों में जिन- जिनके आज पत्थर है सोच ले सौ बार उनके कांच के घर है सांप का काटा तो…

  • गजल… कांच के घर है

    हाथों में जिन- जिनके आज पत्थर है सोच ले सौ बार उनके कांच के घर है सांप का काटा तो…

  • गजल… दुनियादारी से जुदा

    कर ना पाये कुछ हम दुनियादारी से जुदा आसां कब था होना दुनिया सारी से जुदा पग पग पर समझौते…

  • गजल… दुनियादारी से जुदा

    कर ना पाये कुछ हम दुनियादारी से जुदा आसां कब था होना दुनिया सारी से जुदा पग पग पर समझौते…

  • लघुकथा :मोल-भाव

    ‘आम कैसे दिए?’घर के बाहर बैठी आम वाली से मैंने पूछा पूछा। ’60 रुपये किलो।’उसने बताया। 60 रुपये देकर 1…

  • लघुकथा :मोल-भाव

    ‘आम कैसे दिए?’घर के बाहर बैठी आम वाली से मैंने पूछा पूछा। ’60 रुपये किलो।’उसने बताया। 60 रुपये देकर 1…

  • कविता :लॉकडाउन आभार तुम्हारा

    लॉकडाउन, शुक्रिया तुम्हारा संवार दिया बचपन हमारा। कुछ नया सीखने की इच्छा क्षमता दिलाई तुमने सच कहती हूँ, बहुत कुछ…

  • कविता :लॉकडाउन आभार तुम्हारा

    लॉकडाउन, शुक्रिया तुम्हारा संवार दिया बचपन हमारा। कुछ नया सीखने की इच्छा क्षमता दिलाई तुमने सच कहती हूँ, बहुत कुछ…

  • व्यंग्य :गाड़ी बुला रही है…

    गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है गाने की ये पंक्तियां सुनकर ही मन इतना प्रफुल्लित हो जाता था…

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