शह और मात के खेल में ‘चार्वी’ जीत से गढ़ रही सुनहरा भविष्य

धार्मिक नगरी उज्जैन में ऐसे कई सितारे छिपे हैं जो समय-समय पर अपनी चमक बिखेरकर देश-दुनिया में अपनी छाप छोड़ते हैं। ऐसी ही शहर की एक बेटी चार्वी मेहता शह और मात के खेल शतरंज में विरोधियों को पछाड़ते हुए अपने सुनहरे कल को गढ़ रही हैं। मस्क्यूलर डिस्क्रॉफी से पीडि़त होने के बावजूद चार्वी ने उसे कभी अपने पर हावी होने नहीं दिया और उसे हराते हुए जीत की इबारत लिख रही हैं।

विक्रम एवं विश्वामित्र अवार्डी पिता की बेटी
चार्वी मेहता केंद्रीय विद्यालय में कक्षा 10वीं की छात्रा हैं। उनके पिता डॉ. आशीष मेहता इंटरनेशल मलखंभ अंपायर एवं विक्रम व विश्वामित्र अवार्ड से अलंकृत हैं, जबकि मां तरूश्री मेहता इंजीनियर हैं। पढ़ाई में बेहद होनहार चार्वी ने आठवीं तक स्कूल में टॉप किया है।
भाई को माना रोल मॉडल उसी ने खेलना सिखाया
चार्वी ने वर्ष 2020 से शतरंज खेलना शुरू किया। उनके कजिन ब्रदर मलय जैन जो खुद भी चेस के नेशनल प्लेयर हैं, उन्होंने ही चार्वी को सिखाया और उसकी बारीकियां सिखाईं जिसके बाद से चार्वी ने पीछे मुडक़र नहीं देखा और इतनी कामयाबी हासिल की। वह भाई मलय को ही रोल मॉडल मानती हैं।
मनोरंजन के लिए सोशल मीडिया
चार्वी पढ़ाई व खेल के बीच संतुलन बनाकर चलती हैं। कोचिंग के लिए टेब, मोबाइल एवं लैपटॉप के बीच रहती हैं लेकिन कभी सोशल मीडिया को आदत नहीं बनाया। सिर्फ मनोरंजन के लिए कुछ देर इनका इस्तेमाल करती हैं, उसके बाद अपने काम में जुट जाती हैं। यह उनकी सक्सेस का मंत्र है।
हाईलाइटर
मप्र की फस्र्ट प्लेयर जिसने एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया
3 राष्ट्रीय पैरा चैंपियनशिप में महिला वर्ग में राष्ट्रीय विजेता
चीन में हुए एशियन पैरा गेम्स में क्लासिकल व रेपिड फॉर्मेट में चौथा स्थान
गोवा में हुई 24वीं वल्र्ड इंडिविजुअल चेस चैंपियनशिप में एक सिल्वर और दो ब्रांज मैडल पर कब्जा जमाया।
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