CM डॉ. मोहन यादव आज रखेंगे 85.40 करोड़ के विकास कार्यों की आधारशिला
सिंहस्थ 2028 से पहले सुविधाएं विकसित करने की तैयारी

आज होगा मां बगलामुखी देवी लोक के प्रथम चरण का भूमिपूजन
अक्षरविश्व न्यूज नलखेड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को मां बगलामुखी की नगरी नलखेड़ा पहुंचेंगे। यहां वे मंदिर में दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद प्रस्तावित मां बगलामुखी देवी लोक के प्रथम चरण के अंतर्गत 85 करोड़ 40 लाख रुपए की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। भाजपा नेता, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं द्वारा सीएम डॉ. यादव की अगवानी की जाएगी।
सीएम डॉ. यादव हेलिकॉप्टर से नलखेड़ा पहुंचेंगे। उनका हेलिकॉप्टर स्थानीय नवीन कृषि उपज मंडी परिसर में प्रशासन द्वारा बनाए गए हेलीपैड पर उतरेगा। यहां भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों द्वारा उनका स्वागत किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री कार से मां बगलामुखी मंदिर पहुंचकर माता रानी के दर्शन करेंगे और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करेंगे।
मंदिर के समीपवर्ती मैदान में आयोजित कार्यक्रम में वे देवी लोक के प्रथम चरण के विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इन कार्यों के पूरा होने से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही नलखेड़ा में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मां बगलामुखी देवी लोक का निर्माण प्रस्तावित है। इसके प्रथम चरण के कार्यों के लिए लगभग 85.40 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों के लिए गत अगस्त माह में टेंडर जारी किए गए थे। मप्र शासन की योजना के अनुसार करीब 20 हेक्टेयर भूमि पर देवी लोक का निर्माण भव्य स्वरूप में वास्तुशास्त्र के अनुरूप किया जाएगा। प्रथम चरण में मंदिर के विकास के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं, आवागमन, पार्किंग और धार्मिक गतिविधियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
मंदिर परिसर में होंगे ये प्रमुख निर्माण कार्य
प्रथम चरण में मुख्य मंदिर के गर्भगृह एवं सुपर स्ट्रक्चर का निर्माण, मंदिर कॉरिडोर के भव्य प्रवेश एवं निकास द्वार, प्रसाद शॉप जोन, जूता स्टैंड, हैंडवॉश सुविधा और मोबाइल जमा करने के लिए निर्धारित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा टॉयलेट ब्लॉक, पार्किंग एवं अन्य जनसुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
योजना में लखुंदर नदी के किनारे घाटों का विकास, वैदिक परंपराओं के अनुरूप विशाल यज्ञशाला, ड्राइव-वे एवं सड़कों का निर्माण, साइट लेवलिंग, जमीन का समतलीकरण एवं भराव, विभिन्न प्रकार की बाउंड्रीवॉल और प्रोटोकॉल भवन का निर्माण भी शामिल है। मंदिर परिसर में मौजूद शिव मंदिर क्रमांक एक एवं दो का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके साथ ही 18 मीटर, 12 मीटर और 9 मीटर चौड़े प्रवेश द्वारों का निर्माण भी प्रस्तावित है। इन निर्माण कार्यों का उद्देश्य मंदिर परिसर को व्यवस्थित करना और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
365 दिन की समयावधि निर्धारित
प्रथम चरण के निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए 365 दिन की समयावधि निर्धारित की गई है। ऐसे में सरकार की मंशा सिंहस्थ 2028 से पहले मां बगलामुखी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने की है। वर्तमान में सिद्धपीठ पर पार्किंग, यज्ञशाला और सुविधाघर जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं की कमी श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बनती है। विशेषकर नवरात्रि सहित प्रमुख धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। देवी लोक परियोजना के प्रथम चरण में इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी गई है।
प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता
नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित मां बगलामुखी मंदिर दस महाविद्याओं में से एक मां बगलामुखी को समर्पित है। यह मंदिर अपनी धार्मिक एवं तांत्रिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर युधिष्ठिर ने विजय की कामना से इस मंदिर की स्थापना करवाई थी। यहां मां बगलामुखी की प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है।








