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चैंबर में उतरे ठेका कंपनी के कर्मचारी की मौत

जहरीली गैस की चपेट में आया, बचाने उतरे दो साथी भी बेहोश हुए, ननि ने कंपनी के खिलाफ दिया एफआईआर आवेदन

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। पीपलीनाका क्षेत्र में मंगलवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। सीवरेज चैंबर की सफाई के दौरान टाटा की सहयोगी कंपनी के सुपरवाइजर संतुलन बिगडऩे से चैंबर में जा गिरे। इन्हें बचाने दो कर्मचारी नीचे उतरे तो वह भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। सुपरवाइजर की मौके पर ही मौत हो गई। दो को चैंबर से निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नगरनिगम प्रशासन नेकंपनी के खिलाफ जीवाजीगंज थाने में एफआईआर का आवेदन दिया है।

मृत सुपरवाइजर के परिजनों को 30 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। पीपलीनाका क्षेत्र में मंगलवार दोपहर करीब 12.30 बजे हाईटेक कंपनी के अशोक, गोपाल और रमेश चौहान जेटिंग मशीन से सफाई करने पहुंचे थे। दरअसल यहां चैंबर चोक होने की सूचना मिली थी। इनमें सबसे आगे अशोक थे। चैंबर का ढक्कन खोलने के दौरान अशोक का पैर स्लीप हुआ और वह भीतर जा गिरे। 15 फीट गहरे चैंबर में दूषित गैस से उनकी सांसें फूलने लगी। उन्हें गिरता देख पहले गोपाल और बाद में रमेश चैंबर में उतरा लेकिन यह भी गैस के प्रभाव आ गए। क्षेत्रीय पार्षद हेमंत गेहलोत ने माजरा देखा तो आसपास के लोगों को बुलाया और पुलिस, प्रशासन और नगरनिगम को इत्तला दी।

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एसपी ने रोका वाहन और शुरू किया रेस्क्यू
घटना के समय कालभैरव मंदिर जा एसपी प्रदीप शर्मा ने भीड़ देखी तो वे रुक गए और ेस्क्यू में जुट गए। चैंबर से सबसे पहले गोपाल, फिर रमेश और अंत में अशोक को निकाला गया। गैस के प्रभाव से तीनों की हालत खराब थी। थोड़ी ही देर में अशोक ने दम तोड़ दिया। गोपाल और रमेश कोजिला अस्पताल भेजा गया। यहां दोनों की स्थिति में शाम तक सुधार हो गया था।

परिजनों को मिलेंगे 30 लाख
नगर निगम ने घटना में जान गंवाने वाले अशोक के परिजन को 30 लाख रुपए देने की घोषणा की है। यह राशि पुनर्वास अधिनियम के तहत दी जाएगी। अशोक रतलाम के सालाखेड़ी के रहने वाले थे।

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5 मिनट में निकाला, 7 मिनट में अस्पताल भेजा

इस पूरे रेस्क्यू की खासियत टाइमिंग रही। चैंबर करीब १५ फीट गहरा हैा। जैसे ही कर्मचारी एक के बाद एक गिरे, पार्षद हेमंत गेहलोत ने स्थानीय लोगों के साथ मोर्चा संभाल लिया। अनुभवी एसपी प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में अभियान चला और टेंट में लगने वाले पाइप की मदद से तीनों को पांच मिनट में चैंबर से निकाल लिया गया। अगर थोड़ी ज्यादा देर होती तो गैस दो अन्य कर्मचारियों की जान भी ले लेती। एसपी के वाहन से ही गैस प्रभावित कर्मचारियों को अस्पताल भेजा गया।

बाबा महाकाल की कृपा थी लोगों ने खूब मदद की
बाबा महाकाल की कृपा थी। लोगों ने भी खूब मदद की। मौका स्थल पर मौजूद हर शख्स ने अपना योगदान दिया। नगरनिगम, प्रशासन की टीम ने भी प्रभावी काम किया। पार्षद हेमंत गेहलोत और उनकी टीम भी लगी रही। सबका फोकस कर्मचारियों की जान बचाने पर था। चूंकि चैंबर में गैस थी ऐसे में रिस्क भी काफी था। बावजूद सबने मेहनत की। ५ मिनट में रेस्क्यू पूरा हो गया था और ७ मिनट में गैस प्रभावित कर्मचारी अस्पताल दाखिल हो गए।
(जैसा एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया)

क्या है जेटिंग मशीन

दरअसल, जेटिंग मशीन (या हाइड्रो-जेटर) सीवर और ड्रेन लाइनों में रुकावटों को हटाने और साफ़ करने में प्रयुक्त होती है। यह तेज़ दबाव वाली पानी की धार का इस्तेमाल करती है। यह एक लचीले होज़ को पाइप के अंदर भेजती है, जो ग्रीस, कीचड़ और पेड़ों की जड़ों को तेज़ी से हटा देता है। म्युनिसिपल और इंडस्ट्रियल सफ़ाई सेवाओं में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। टाटा कंपनी के कर्मचारी इसी मशीन का इस्तेमाल कर रहे थे।

यह कैसे काम करती है
एक हाई-प्रेशर पंप पानी का दबाव बढ़ाता और इसे खास नोज़ल के ज़रिए तेज़ी से बाहर निकालता है। फॉरवर्ड जेट्स रुकावटों, मलबे और ब्लॉकेज को तोड़ते हैं। बैकवर्ड जेट्स एक ऐसा बल बनाते हैं जो होज़ को पाइप के अंदर गहराई तक ले जाता है। जब होज़ को वापस खींचा जाता है, तो ये जेट पाइप की अंदरूनी दीवारों को ज़ोरदार तरीके से साफ़ करते हैं और ढीले हुए मलबे को सिस्टम से बाहर निकाल देते हैं।

बगैर मॉस्क के थे कर्मचारी
सीवरेज चैंबर की सफाई में ठेका कंपनी की लापरवाही भी दिखाई दी। सीवरेज चैंबर में दूषित गैस होती है,इसे देखते हुए सफाई कर्मचारियों को मॉस्क और जरूरी सुरक्षा उपकरण के साथ उतरना था। लेकिन तीनों कर्मचारियों के पास मॉस्क नहीं था। न सुरक्षा उपकरण थे। यह कंपनी की लापरवाहीे दर्शाता है। एसपी ने बताया कि सीवरेज सफाई रिस्की काम हैै। ऐसे में पूरी सावधानी रखी जानी चाहिए थी। ऐसा नहीं किया गया। कंपनी पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

थाने पहुंचा केस का आवेदन
नगर निगम ने टाटा और उसकी सहयोगी कंपनी के खिलाफ एफआईआर का आवेदन दिया है। यह आवेदन सहायक यंत्री साहिल मैदावाला ने जीवाजीगंज थाने में दिया है। अशोक के परिजन को 30 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।

एफआईआर का आवेदन दिया है
टाटा की सहयोगी कंपनी के कर्मचारी हादसे का शिकार हुए थे। एक की मौत हुई है, दो की हालत ठीक है। कंपनी ने जरूरी सावधानी नहीं रखी, ऐसे में उसके खिलाफ एफआईआर का आवेदन दिया है।
पवन कुमार सिंह
अपर आयुक्त नगरनिगम

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