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तेज बारिश नहीं होने से सोयाबीन पर संकट के बादल

कृषि विभाग के अधिकारी बोले- किसानों को समझाइश दे रहे हैं

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। देश में सर्वाधिक सोयाबीन उत्पादन करने वाला राज्य मध्य प्रदेश है। राज्य में अधिकांश सोयाबीन मालवा-निमाड़ में उपजता है, किंतु इस बार सोयाबीन पर फिलहाल संकट के बादल है। कई दिनों से क्षेत्र में तेज बारिश नहीं हुई है। इससे फसलों में इल्लियों और कीट का प्रकोप की आशंका किसानों को डरा रही है।

हालांकि कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में अभी किसी भी क्षेत्र से कीट के प्रभाव की खबर नहीं है। किसानों को लगातार कीटनाशक का छिड़काव और अन्य उपयों की एडवाइजरी जारी की जा रही है। विभाग भी किसानों से संपर्क कर फीडबेक ले रहा है।

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एक तरफ तेज बारिश नही होना संकट का कारण है, वहीं रिमझिम वर्षा भी दिक्कत पैदा कर रही है। किसानों का कहना है कि रिमझिम बारिश की वजह से फसलों पर हर समय नमी बनी रहती है। इस कारण किसान अभी खेतों में कीटनाशक का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं। बताया जाता है कि यह कीटनाशक पत्तियों से धुलकर जमीन पर गिर जाता है।

तेज वर्षा के अभाव, सतत रिमझिम का दौर चलने से फसल पर इल्ली व अन्य कीट का असर पड़ सकता है। इस सीजन में इल्ली व अन्य कीटों को पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनता जा रहा है। अब नियंत्रण के सिर्फ दो ही उपाय हैं या तो तेज बारिश का दौर चले या फिर कुछ दिन धूप खिले और बचे किसान इस खुले मौसम में कीटनाशक का छिड़काव कर लें।

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इल्लियां फसल को नष्ट करती हैं

तेज वर्षा के अभाव में सोयाबीन फसल पर तना मक्खी, गर्डर बीटल और व्हाइट ग्रब यानी गोबर के कीड़े का प्रकोप संभव है। तना मक्खी से लेकर गर्डर बीटल व अन्य कीटों का अपना जीवन चक्र होता है। जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के प्रथम सप्ताह में अंडों से इल्ली निकालने का दौर शुरू होता है और यह इल्लियां फसल को नष्ट करती हैं। अधिकांश कीट ऐसे हैं जो तने को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सोयाबीन के उत्पादन में गिरावट की स्थिति बनती है।

इनका कहना

यह सही है कि लगातार नमी व बादल छाए रहने और समय पर कीटनाशक छिड़काव नहीं होने से फसलों में इल्लियों का प्रकोप हो सकता है,लेकिन उज्जैन जिले में फिलहाल सोयाबीन फसल पर कीट प्रकोप जैसी स्थिति सामने नहीं आई है। कृषि विभाग की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण कर फसलों की स्थिति पर नजर रख रही हैं। किसानों को दवा छिड़काव के बारे में जानकारी दी जा रही है।-आरपीएस नायक, कृषि उपसंचालक उज्जैन।

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