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महाकाल मंदिर के गर्भगृह में फिर एंट्री, अफसरों ने चुप्पी साधी

सावन सोमवार को कथावाचक पुंडरिक गोस्वामी व दर्जनभर लोगों ने अंदर प्रवेश किया

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सावन के दूसरे सोमवार 21 जुलाई की सुबह भाजपा विधायक गोलू शुक्ला का बेटे व समर्थकों के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश का मामला अभी थमा भी नहीं है कि चौथे सोमवार को फिर मंदिर के गर्भगृह में दर्जनभर लोगों को मनमाने प्रवेश दिए गए। इन्हें अनुमति किसने दी, इस मामले पर महाकाल मंदिर के जिम्मेदार अफसर चुप्पी साधे हैं।

सोमवार सुबह करीब 8.30 बजे मंदिर के गर्भगृह में कथावाचक पुंडरिक गोस्वामी ने सहयोगियों के साथ प्रवेश किया। पं. आकाश पुजारी के साथ अंदर गए इन लोगों ने गर्भगृह में 10 मिनट पूजन किया। पहले से ही महिला-बच्चों सहित आधा दर्जन से अधिक लोग गर्भगृह में पूजन कर रहे थे। ये लोग किसकी अनुमति से अंदर गए इस मामले में कोई बोलने को तैयार नहीं है। मंदिर उप प्रशासक सिम्मी यादव का कहना है कि दर्शन व प्रोटोकाल व्यवस्था उप प्रशासक एसएन सोनी देखते हैं। जबकि प्रशासक प्रथम कौशिक, उप प्रशासक सोनी, सुरक्षा अधिकारी जयंतसिंह राठौर इस मामले में चुप्पी साधे हैं।

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विधायक गोलू शुक्ला का मामला ठंडे बस्ते में रखने का संकेत
21 जुलाई को भस्मार्ती के बाद इंदौर से भाजपा विधायक गोलू शुक्ला और उनके पुत्र रुद्राक्ष द्वारा गर्भगृह में बिना अनुमति प्रवेश के मामले में मंदिर समिति ने 22 जुलाई को जांच बैठाई थी। जांच समिति को 7 दिन के अंदर रिपोर्ट देना थी। 13 दिन बीतने के बाद भी रिपोर्ट पेश नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि जांच को फिलहाल ठंडे बस्ते में रखने के संकेत है। समिति ने अभी तक इस दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया है। दो साल पहले भी होली पर रुद्राक्ष भस्मार्ती के दौरान गर्भगृह में मौजूद थे। इसकी जांच भी पेंडिंग है।

गर्भगृह में रोक नहीं, आम जनता पर घुमा रहे हैं मनमानी का डंडा

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मंदिर प्रशासन द्वारा गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंध बताया जाता है जबकि सच्चाई यह है कि प्रवेश पर प्रतिबंध के बारे कोई लिखित निर्णय किसी के पास नहीं है। गर्भगृह में प्रवेश पर प्रतिबंध का निर्णय 25 जून 2023 को हुई मंदिर समिति की बैठक में लिया गया था। इस वर्ष दो सावन माह होने के कारण 66 दिन 4 जुलाई से 11 सितंबर 2025 तक गर्भगृह में प्रवेश का प्रतिबंध लिया गया था। इसके बाद से गर्भगृह में प्रवेश शुरू ही नहीं किया गया और न ही स्थाई प्रतिबंध पर निर्णय लिया गया। अब हालात यह है कि आम जनता को नियमों में बांध दिया जाता है और कृपापात्र को प्रवेश करा दिया जाता है। हो-हल्ला होने पर अफसर चुप्पी साध लेते हैं या जांच बैठा दी जाती है जो कभी पूरी नहीं होती।

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