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पांच गुना ज्यादा मरीज पहुंच रहे चरक भवन निजी अस्पतालों-क्लिनिकों में लगी भीड़

वायरल फीवर : हर घर में सर्दी खांसी और बुखार के मरीज

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पहली बार बुखार 104 फारेनाइट और खांसी ठीक होने में लग रहा दो सप्ताह का समय

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। बारिश की खेंच, मौसम में रोजाना हो रहे उतार-चढ़ाव, उमस-गर्मी के असर से शहर में वायरल फीवर तेजी से फैल रहा है। पहले चरक भवन में रोजाना केवल 50 मरीज आ रहे थे, अब इनकी संख्या 250 तक पहुंच गई है। पहली बार बुखार भी 104 फारेनाइट तक जा रहा है। वायरल फीवर में होने वाली खांसी तो ठीक होने में दो सप्ताह से ज्यादा का समय ले रही है। शहर के चिकित्सक मान रहे हैं कि वायरस में इस बार चेंज हुआ है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो रही है। सीनियर सिटीजन को उन्होंने फ्लू वैक्सीन लगाने की सलाह दी है। यह फ्लू का असर कम करती है और एक साल तक कारगर रहती है।

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वायरल फ्लू की स्थिति यह है कि इसकी चपेट में आने वाले व्यक्ति को शुरुआत में तेज सिरदर्द, गले में खराश, हाथ पैरों में तेज दर्द, ठंड लगकर बुखार आने की शिकायत होती है। एक बार दवा खाने के बाद भी बुखार आसानी से नहीं जाता। एक व्यक्ति को स्वस्थ होने में 8 से 10 दिन लग रहे हैं। इसके बाद भी खांसी की शिकायत बनी रहती है।

सरकारी अस्पताल के आंकड़े: चरक अस्पताल में सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक जनरल ओपीडी संचालित होती है। शाम 5 से 6 बजे के बीच भी ओपीडी में मरीजों का उपचार होता है। इसके अतिरिक्त समय में इमरजेंसी ओपीडी खुली रहती है। जनरल ओपीडी से मिली जानकारी के अनुसार 25 अगस्त से 1 सितंबर के बीच दोनों समय में करीब 2000 अधिक मरीज सर्दी, खांसी, बुखार का उपचार कराने पहुंचे हैं। यानी रोजाना करीब 250। इसके इमरजेंसी ओपीडी से मिली जानकारी के अनुसार रात में भी 40 से 50 मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। यह आंकड़े सरकारी अस्पताल के हैं, अगर निजी के जोड़ दिए जाए तो यह कई गुना हो सकता है। क्योंकि निजी क्लिनिकों और अस्पतालों में भी खूब भीड़ है।

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वायरस हुआ दमदार

इस बार मरीजों में रेस्पिेटरी वायरस (आरएसबी, एडिनो, राइनो) दोहरा अटैक कर रहे हैं।

दो वायरस के हमले से शरीर की इम्युनिटी तेजी से कमजोर हो रही है। इस वजह से खांसी लंबे समय तक बनी रह रही है।

दोहरे अटैक के कारण फीवर में शरीर का तापमान 104 फारेनाइट तक जा रहा है।

बदलती जीवनशैली स्ट्रांग कर रही वायरस

हमारी जीवनशैली में हो रहा बदलाव भी वायरस को स्ट्रांग कर रहा है। पहले उमस-गर्मी से बचने के लिए एसी का प्रयोग कम होता था, अब अमूमन घर-दफ्तर और कार तक में एसी का उपयोग हो रहा है।

 इस वजह से वेंटिलेशन का उपयोग कम हो गया है। वायरस एक ही जगह री-सर्कुलेट हो रहा है। इस वजह से उसकी ताकत बढ़ रही है।

 इन कारणों से यह मनुष्य शरीर में लोड भी जल्दी हो रहा है और नुकसान पहुंचा रहा है।

इस बार वायरल में क्या बदलाव

तेज बुखार। तापमान 104 फारेनाइट। पहले अमूमन 100 तक रहता था। सामान्य 98 फारेनाइट रहता है।

टाइम पीरियड बढ़ा। पहले अमूमन तीन से चार दिन में ठीक होता था, अब 7 से 10 दिन।

तीखी और सूखी खांसी। ठीक होने में 15 दिन तक लग रहे हैं।

 हाथ-पैरों में तीव्र दर्द। पहले ऐसा नहीं होता था।

क्या कहते हैं चिकित्सक सीनियर सिटीजन को ज्यादा परेशान कर रहा

अगस्त-सितंबर में हर साल फ्लू आता है। हर साल इसकी प्रकृति भी बदलती है। इस बार वायरस थोड़ा ज्यादा स्ट्रांग है। लोगों को ठीक होने में समय लग रहा है। खासकर सीनियर सिटीजन को यह ज्यादा ही परेशान कर रहा है। कई को तो एडमिट करने की स्थिति बन रही है।
डॉ. सुधीर गवारीकर
सीनियर डॉक्टर आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज

डिहाइड्रेशन की स्थिति भी पहली बार बन रही
इस बार का फ्लू ज्यादा स्ट्रांग है। वायरल को ठीक होने में समय भी ज्यादा लग रहा है। पहले तीन से चार दिन में मरीज ठीक हो जाता था, अब ऐसी स्थिति नहीं है। डिहाइड्रेशन की स्थिति भी बन रही है। ऐसा पहली बार हो रहा है। हालांकि मेडिकल तौर पर वायरस के पावरफुल होने की कोई नई जानकारी नहीं है। फिर भी ऐसा लग रहा है कि वायरस ने अपनी प्रकृति बदली है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा उपाय है। भीड़ में जाने से बचना चाहिए। मास्क का उपयोग करें।
डॉ. विक्रम रघुवंशी
प्रभारी माधवनगर सिविल अस्पताल

5-7 दिन का समय ले रहा है वायरस
वर्तमान में वायरल बुखार के साथ साथ सिरदर्द हाथ पैरों में दर्द की शिकायत वाले मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं। मरीज को स्वस्थ होने में 5 से 7 दिन का समय लग रहा है।
डॉ. जितेंद्र शर्मा
जिला अस्पताल

यूं बचें वायरल फीवर से

मॉस्क पहनें। खास कर भीड़भाड़ वाली जगह पर जाते समय।

कोई भी काम करने के बाद हाथ धोए।

सीनियर सिटीजन हैं तो फ्लू वैक्सीन लगाएं। यह बाजार में 1200 रुपए तक की कीमत पर उपलब्ध हैं। एक साल तक फ्लू से सुरक्षा करेगी।

हार्ट, शुगर पेंशेट के लिए यह बेहद जरूरी है।

एसी-कूलर का प्रयोग कम करें। अगर कर रहे हैं तो इनके फिल्टर चैक करवाएं। हर साल इनका बदलना जरूरी है।

घर-दफ्तर में प्राकृतिक हवा आने की व्यवस्था रखें। एक अच्छा वेंटिलेशन फ्लू रोकने में मददगार होता है।

खान-पान में भी बरतें सावधानी

खाना ताजा ही इस्तेमाल करें।

फल और सब्जियों का प्रयोग ज्यादा करें।

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