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सोना-चांदी हुए सस्ते, इस हफ्ते कीमतों में बड़ी गिरावट

वैश्विक और घरेलू मोर्चे पर आए बड़े बदलावों के चलते इस सप्ताह सर्राफा बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, बहुमूल्य धातुओं (सोने और चांदी) की कीमतों में इस हफ्ते बड़ी कटौती देखने को मिली है। 24 कैरेट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने का भाव 2,830 रुपये की कमजोरी के साथ घटकर 1.45 लाख रुपये के स्तर पर आ गया है, जो इसके पिछले सप्ताह (13 जून) 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

 

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सोने की ही तरह चांदी के बाजार में भी बड़ी गिरावट का रुख रहा। औद्योगिक मांग घटने और वैश्विक बिकवाली के चलते चांदी 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पिछले स्तर से फिसलकर 2.32 लाख रुपये पर आ गई है। इस तरह एक ही हफ्ते में चांदी के खरीदारों को प्रति किलो 10,609 रुपये का बड़ा फायदा हुआ है।

रिकॉर्ड स्तर (All-Time High) से कितनी आई गिरावट?

इस साल सर्राफा बाजार में निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है। यदि पिछले कुछ महीनों के रुझान पर नजर डालें, तो कीमतें अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं:

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  • सोने की चाल: 31 दिसंबर 2025 को बाजार बंद होने के समय सोने का भाव 1.33 लाख रुपये था। इसके बाद जनवरी में आई भारी तेजी के कारण 29 जनवरी को सोना 1.76 लाख रुपये के अपने ऐतिहासिक ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया था। हालांकि, उस रिकॉर्ड स्तर से लेकर अब तक सोने की कीमतों में 31,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी गिरावट आ चुकी है।

  • चांदी की स्थिति: चांदी भी पिछले साल के आखिरी दिन (31 दिसंबर 2025) 2.30 लाख रुपये प्रति किलो पर थी, जो जनवरी की तेजी में उछलकर 3.86 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंची थी। इस उच्चतम स्तर से लेकर पिछले 142 दिनों के भीतर चांदी 1.54 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो चुकी है।

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सर्राफा बाजार की इस बड़ी गिरावट के 5 मुख्य कारण

बाजार विश्लेषकों और कमोडिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, कीमती धातुओं के दामों में आई इस अचानक गिरावट के पीछे पांच बड़े अंतरराष्ट्रीय कारक जिम्मेदार हैं:

  1. अमेरिका-ईरान शांति समझौता: मध्य-पूर्व (वेस्ट एशिया) में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव उस समय काफी कम हो गया, जब अमेरिका और ईरान के बीच एक युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए। युद्ध की आशंका टलने से निवेशकों ने सोने-चांदी जैसे ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) से अपना फंड निकालकर अन्य परिसंपत्तियों में लगाना शुरू कर दिया।

  2. यूएस फेडरल रिजर्व के कड़े संकेत: अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेड) ने हालिया बयानों में यह संकेत दिए हैं कि वह इस वर्ष ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय मुद्रास्फीति को रोकने के लिए उन्हें और बढ़ा सकता है। ऊंची ब्याज दरों के कारण सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो जाता है।

  3. मजबूत होता डॉलर इंडेक्स: फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बाद वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर इंडेक्स (DXY) में जोरदार मजबूती देखी गई है। आर्थिक नियमों के मुताबिक, जब भी अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बनता है।

  4. समान स्तर पर मुनाफावसूली (Profit Booking): जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद बड़े संस्थागत निवेशकों, हेज फंड्स और ट्रेडर्स ने ऊंचे भावों पर बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग की। इस भारी बिकवाली के दबाव ने कीमतों को अचानक नीचे धकेल दिया।

  5. ETFs से निवेशकों का मोहभंग: सुरक्षित निवेश की मांग घटने से गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में भारी बिकवाली देखी जा रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सिल्वर ईटीएफ में 6% और गोल्ड ईटीएफ में 3% की गिरावट दर्ज हुई है, जिसका सीधा असर घरेलू सर्राफा हाजिर बाजार पर पड़ा।

बाजार के उतार-चढ़ाव पर एक नजर

कमोडिटी (धातु) 31 दिसंबर 2025 का भाव 29 जनवरी का रिकॉर्ड स्तर इस हफ्ते का ताजा भाव रिकॉर्ड स्तर से कुल गिरावट
सोना (प्रति 10 ग्राम) ₹1.33 लाख ₹1.76 लाख ₹1.45 लाख ↓ ₹31,000
चांदी (प्रति किलोग्राम) ₹2.30 लाख ₹3.86 लाख ₹2.32 लाख ↓ ₹1.54 लाख

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