बच्चे से हो जाए लड़ाई तो ऐसे बनेगी बात

घर में टीनेजर बच्चों से कभी पढ़ाई को लेकर बहस छिड़ जाती है, तो कभी दोस्तों की वजह से पैरेंट्स की चिंता बढ़ जाती है। दरअसल, इस उम्र में बच्चों को लगता है कि उन्हें पूरी आजादी मिलनी चाहिए, जबकि पैरंट्स को लगता है कि इस समय उनका कंट्रोल बनाए रखना बेहद जरूरी है। इन्हीं वजहों से कई बार बात इतनी बिगड़ जाती है कि पैरंट्स और बच्चों के बीच बोलचाल तक बंद हो जाती है। अब ऐसे में अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है बातचीत दोबारा कैसे शुरू करें? अगर आप भी इसी स्थिति से गुजर रहे हैं, तो ये बातें ध्यान में रखें।
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न दें साइलेंट ट्रीटमेंट: अगर 13 से 17 साल के टीनेज बच्चों से झगड़ा हो जाए, तो दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए माता-पिता ध्यान रखें कि बातचीत को कुछ समय के लिए बंद करना चाहिए लेकिन पूरी तरह से संपर्क नहीं तोडऩा। लड़ाई के बाद शांत होना बहुत जरूरी है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप बच्चे को नजरअंदाज करें या खामोश रहकर उन्हें सजा देने की कोशिश करें।
बातचीत की पहल करें: कई बार बच्चा खुद बातचीत शुरू नहीं करता, लेकिन अंदर ही अंदर वो इस इंतजार में होता है कि पहले आप पहल करें। जब माता-पिता पहला कदम बढ़ाते हैं, तो बच्चे को यह महसूस होता है कि मेरी कद्र है। इसलिए संवाद की पहल आप कर सकते हैं। टीनेजर बच्चों और माता-पिता के बीच टकराव होना आम हो जाता है। ऐसे में अगर बच्चा कुछ नहीं बोल रहा है तो आप उनसे बात करने के ये तरीके अपना सकते हैं।
ऐसा बिल्कुल न कहें: लड़ाई के दौरान बच्चों को माता-पिता की जिस एक बात से सबसे ज्यादा तकलीफ होती है, वो होता है पैरंट्स का ईगो। दरअसल होता क्या है कि पैरंट्स बातचीत के लिए तैयार तो होते हैं, लेकिन शुरुआत ऐसे करते हैं कि तुमने ऐसा किया, इसलिए मैं चिल्लाई या अगर तुमने बात मानी होती, तो मैं गुस्सा ही क्यों करता ? ऐसा बिल्कुल भी न कहें।