एक दिन में दो प्रदर्शन, एक में हजारों की उपस्थिति तो दूसरे में सैकड़ों की

20 साल से गुटबाजी में फंस कर शहर में जमीन खो चुकी कांग्रेस में फिर दिखी दो फाड़
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
मंडी प्रांगण की किसान न्याय यात्रा में गूंजे सरकार विरोधी नारे
कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व सीएम दिग्विजयसिंह और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भरा कार्यकर्ताओं में जोश
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 20 साल से उज्जैन शहर में जनाधारविहीन हो चुकी कांग्रेस में शुक्रवार को एक बार फिर दो फोड़ दिखी। किसानों की समस्याओं को लेकर दो आंदोलन हुए। एक में देशभर के नेताओं ने शिरकत की और केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया तो दूसरे में पूर्व विधायक डॉ. बटुकशंकर जोशी के नेतृत्व में दूसरे धड़े ने प्रदर्शन किया। इसमें संगठन में शहर एवं जिलाध्यक्ष पद पर हुई नियुक्ति पर सवाल खड़े किए । कांग्रेस के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के डरो मत के पोस्टर हाथ में लेकर इस गुट के कार्यकर्ताओं ने चामुंडा माता चौराहा के पास स्थित बिजासन माता मंदिर तक पैदल मार्च किया। करीब पांच सैकड़ा कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए। दूसरे वाले में हजारों लोगों ने शिरकत की।
दरअसल उज्जैन जिले में कांग्रेस भाजपा से नहीं कांग्रेस से ही हार रही है। इसके कई पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को फूलछाप नाम से जाना जाता है। करीब 25 साल से यह फूलछाप कांग्रेसी अपने हितो के लिए पार्टी की नैया पूरे जिले में डुबो रहे हैं। इसके चलते यह हाल बन रहे हैं कि कभी जिले की 7 में से 7 सीटें जीतने वाली कांग्रेस का स्कोर इस बार 2-5 हो गया है।
इसी गुटबाजी के चलते राजेंद्र भारती, योगेश शर्मा चुन्नु, जयसिंह दरबार, रामलाल मालवीय, संजय ठाकुर जैसे नेता कांग्रेस छोड़ भाजपाई हो गए हैं। शहर में तो कांग्रेस की हालत इतनी पतली है कि 2005 में सोनी मैहर के बाद तो उसके महापौर प्रत्याशी खेतते रहे हैं। दीपक मेहरा, कविता गोमे जैसे महापौर प्रत्याशी तो बीस-बीस हजार मतों से हार चुके हैं। पिछले महापौर चुनाव में विधायक महेश परमार ने जरूर दम भरा था लेकिन फूलछाप कांग्रेसियोंं की वजह से जीत उनके हाथ से फिसल गई थी।
ऐसी ही स्थिति विधानसभा चुनाव में भी रही है। शहर की दो विधानसभा सीट, उज्जैन उत्तर और दक्षिण में पिछले 22 साल से कांग्रेस जीत को तरस गई है। यह दोनों सीटें एक समय में कांग्रेस का गढ़ होती थी। लेकिन गुटबाजी, नेताओं के अपने समीकरण से अब यह सीटें भाजपा का गढ़ बन चुकी हैं। उज्जैन उत्तर को जातिगत समीकरण के मान से कांग्रेस के मुफीद माना जाता है लेकिन हर बार एक बागी खड़ा होने से कांग्रेस प्रत्याशी धूल चाट जाता है। कुछ ऐसी ही स्थिति दक्षिण की भी है। यहां भी कांग्रेसी एक -दूसरे को निपटाते हैं। खैर इस बार संगठन में युवा नेतृत्व आने से कांग्रेस में जान आने की उम्मीद थी लेकिन एक गुट विशेष के कार्यकर्ताओं ने अलग प्रदर्शन कर यह बता दिया कि कांग्रेस कभी एकजुट नहीं हो सकती।
किसान न्याय यात्रा में क्या हुआ
खाद-बीज संकट, बिजली कटौती, खराब सडक़ें, बेरोजगारी, फसल का उचित दाम नहीं मिलना जैसी किसानों की समस्याओं के साथ कांग्रेस ने वोट चोरी का मुद्दा भी किसान न्याय यात्रा में उठाया। प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ मंडी प्रांगण में हुए सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने कहा भाजपा सरकार वोट चोरी से बनी है। 2023 का विधान सभा चुनाव बीजेपी ने चोरी किया था। इसका सबूत इस चुनाव के पोस्टल बैलेट है, जिसमें कांग्रेस को भारी जीत मिली लेकिन ईवीएम खुलते ही रिजल्ट बदल गए। पोस्टल बैलेट में 199 सीटों में आगे रही कांग्रेस को 67 सीटें मिली।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने खाद-बीज की मारामारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसान परेशान है और शराबी ऐश कर रहे हैं। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता वोट चोरी को लगातार पकड़ेंगे। विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि ये जनता की सरकार नहीं है, ये किसानों की जमीन छीनने वाली सरकार है। जिलाअध्यक्ष महेश परमार ने कहा कि उज्जैन की सडक़ों पर कांग्रेस का कार्यकर्ता दो-दो हाथ करने के लिए हर दम तैयार है। सम्मेलन को ओंकारसिंह मरकाम, कमलेश्वर पटेल, कांतिलाल भूरिया, अजय सिंह राहुल भैया, पूर्व नेता प्रति पक्ष कुणाल चौधरी ने संबोधित किया।
टॉवरचौक पर माल्यार्पण
सभा के पश्चात मंडी से किसान न्याय यात्रा प्रारंभ हुई जो विभिन्न मार्गों से होती हुई फ्रीगंज स्थित टॉवर चौक पहुंची। जहां मध्य प्रदेश किसान कांग्रेस के अध्यक्ष धर्मेंद्र चौहान ने डॉ. भीमराव अम्बेडकरजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किसान न्याय यात्रा का समापन किया। आभार रवि राय ने माना।
उमस और गर्मी के बावजूद खचाखच भरा था पंडाल
चिमनगंज कृषि उपज मंडी में दोपहर में तापमान 32.7डिग्री था, अश्विन मास की तेज गर्मी और उमस के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग सभा में शामिल होने आए थे। खचाखच भरे पंडाल में कांग्रेस पदाधिकारियों ने १० हजार कुर्सियां लगाने का दावा किया है, अगर यह दावा सही तो करीब 12 से 15हजार लोग उपस्थित थे।
दिग्विजय ङ्क्षसह कार्यकर्ताओं के बीच बैठे
पूर्व सीएम दिग्विजयसिंह जनसभा में कार्यकर्ताओं के साथ आगे की पंक्ति में बैठे। वह संबोधन के समय ही मंच पर आए। संबोधन के बाद वह वापस नीचे चले गए।
सचिन पायलट का आधा भाषण होते ही माइक बंद
सचिन पायलट कुल जमा छह मिनट बोले। उनके भाषण के दो ही मिनट हुए थे कि माइक तेज आवाज के साथ बंद हो गया। इसे जैसे-तैसे ठीक किया तो एक बार फिर यह बंद हो गया। पायलट ने किसी तरह अपना संबोधन पूरा किया। लोग यह चर्चा भी करते रहे कि उनके संबोधन के समय माइक में पूर्व नियोजित गड़बड़ी करवाई गई है।
सृजन अभियान से नाराज स्थानीय कांग्रेसियों ने अलग मंच सजाया
उज्जैन।सृजन अभियान को गलत ठहराते हुए नाराज कांग्रेसियों ने आगररोड पर श्रमशिविर और निगम कार्यालय के बीच मंच सजाया। पूर्व विधायक डॉ बटुकशंकर जोशी के नेतृत्व में यहां जमा पांच सैकड़ा कांग्रेसियों ने डरो मत का नारा लगाते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। पीएचई कार्यालय परिसर स्थित बिजासन माता मंदिर तक जुलूस के साथ पहुंचे कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपा। इस मंच पर चेतन यादव, माया त्रिवेदी, मुरली मोरवाल, आजाद यादव, विक्की यादव, हेमंतसिंह चौहान, महेश सोनी, कैलाश बिसेन, दीपक मेहरे, रवि शुक्ला, परमानंद मालवीय, राजेंद्र गब्बर कुवाल, बद्री मरमट, इकबाल भाई, सावन यादव, विकास कपूर, नाना तिलकर, राजेश त्रिवेदी थे।,
माया त्रिवेदी दो, चेतन यादव और विवेक यादव एक बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। मुरली मोरवाल की तो विधानसभा में जमानत तक जब्त हो चुकी है। रवि शुक्ला इधर-उधर होते रहते हैं। आजाद यादव अपने ही वार्ड में बेटे हर्ष को पार्षद चुनाव तक नहीं जीता पाए। नाना तिलकर खुद पार्षद चुनाव हार चुके हैं।










