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पॉश कॉलोनी पाश्र्वनाथ में गांव से बुरे हाल, हर महीने बत्ती गुल

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। देवासरोड नागझिरी स्थित पाश्र्वनाथ कॉलोनी… 1100 प्लॉट… लगभग 350 आबाद घरों की बस्ती। मंगलवार की सुबह सभी लोग आम दिनों की तरह अपने घरों में थे, बच्चे स्कूल जाने की तैयारी में, महिलाएं घर के काम में जुटी थीं। एकाएक इस कॉलोनी की बत्ती गुल हो गई, लोगों के बिजली सबंधी सारे काम धरे के धरे रह गए, पता चला बिजली कंपनी वाले कॉलोनी का कनेक्शन ही काट गए हैं। इसके बाद पूरे दिन कभी कलेक्टर से बात, कभी नेताओं से, दोपहर बीती, शाम बीती और इसके बाद अंधेरा हो गया, रात करीब 9 बजे जाकर कॉलोनी का बिजली सप्लाय वापस शुरू हो सकी। यह कहानी यहां हर महीने में दो से तीन बार दोहराई जाती है। शहरी क्षेत्र की इस कॉलोनी के हाल गांव से बदतर है।

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पाश्र्वनाथ कॉलोनी को 2007 में मुंबई की कंपनी पाश्र्वनाथ डेवलपर के डायरेक्टर संजीव जैन ने डेवलप किया था। बिजली सप्लाय के मामले में यह कॉलोनी तभी से विवादों में रही है। इस मामले में रहवासियों को कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है। दरअसल, कॉलोनी डेवलप करने के साथ ही तय शर्तों के मुताबिक यहां कॉलोनाइजर ने बिजली ग्रिड का निर्माण कराए बगैर ही लोगों को प्लॉट बेच दिए थे।

शुरुआती पांच साल अस्थाई बिजली कनेक्शन लेकर काम चलाया और जब यह अवधि पूरी हो गई तो दूसरे नामों से अस्थाई कनेक्शन वह लेता रहा और काम चलता रहा। ताजा हालात में बिजली वितरण कंपनी को कॉलोनाइजर से करीब 3 करोड़ 75 लाख रुपए की वसूली करना है। इसके ठीक विपरीत कॉलोनाइजर का हर बार तर्क रहता है कि कॉलोनी के लोगों से बिल रकम की वसूली ही नहीं हो पाती है।

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दो साल में 10 प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ काम
पाश्र्वनाथ कॉलोनी में बंधक प्लॉट के विक्रय और उनके स्थान पर सार्वजनिक उपयोग के प्लॉट्स को बंधक बनाए जाने के मामले में नगर निगम के कुछ पूर्व इंजीनियर्स के खिलाफ जांच चल रही है। इस कॉलोनी में बिजली ग्रिड बनाने और यहां से रहवासियों को स्थाई कनेक्शन देने से जुड़े आदेश होने के बाद कॉलोनाइजर द्वारा 9 करोड़ रुपए से बिजली ग्रिड स्थापित करने का काम शुरू किया गया। मई 2026 तक इस काम को पूरा होना है लेकिन हाल फिलहाल यहां 10 प्रतिशत भी काम पूरा नहीं हो सका है। रहवासियों ने इस मामले में हाइकोर्ट में भी कॉलोनाइजर के खिलाफ केस लगा रखा है।

जब से यहां मकान बनाया है, हर महीने ही बिजली सप्लाय संकट झेलते हंै। हाईकोर्ट में भी केस लगाया लेकिन वहां भी कॉलोनाइजर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है। वह हर बार कोर्ट में जाकर बताता है कि उसने ग्रिड का काम शुरू करवा दिया है जबकि अभी तक ग्रिड का काम लगभग पूर्ण हो जाना था।
राकेश सक्सेना, रहवासी

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महीने में एक से दो बार तो बिजली कटौती झेलना ही पड़ती है। कॉलोनाइजर और उसके ठेकेदार रहवासियों से तो पैसा वसूलते हंै लेकिन बिजली कंपनी में समय पर जमा नहीं कराते हैं, इसका खामियाजा हम सभी को भुगतना पड़ता है।
विजय जैन, प्रबंधक पाश्र्वनाथ सोसायटी

हमने निजी इंजीनियर के जरिए ग्रिड के काम का आंकलन कराकर हाइकोर्ट में भी वस्तुस्थिति रखी है। कॉलोनाइजर चाहता है कि लाइन लॉस और स्ट्रीट लाइट की रकम भी रहवासी भरें, जबकि स्थाई कनेक्शन उपलब्ध कराने तक यह कॉलोनाइजर की ही जिम्मेदारी होती है।
मनीष शर्मा, अध्यक्ष पाश्र्वनाथ सोसायटी

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