रतलाम-नीमच की तरह इंदौर-उज्जैन रूट पर भी कम होना चाहिए ट्रेन का रनिंग टाइम

दो साल पहले डबल हो चुका है ट्रैक, फिर भी पुरानी रफ्तार से दौड़ रहीं ट्रेनें
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। इंदौर-देवास-उज्जैन रेल ट्रैक डबलिंग का काम पूरा हुए दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इस रूट पर ट्रेनों की रफ्तार अब भी पुरानी ही है। दोहरीकरण के बावजूद ट्रेनें अब भी पुराने टाइम टेबल पर ही चलाई जा रही हैं। दूसरी तरफ, रेलवे ने रतलाम-नीमच सेक्शन में दोहरीकरण का काम पूरा होते ही इंदौर-दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस का रनिंग टाइम 30 मिनट घटा दिया है। रेलवे के इस कदम के बाद अब इंदौर-उज्जैन रूट पर भी ट्रेनों का रनिंग टाइम कम करने की मांग जोर पकडऩे लगी है।
इंदौर-उज्जैन के बीच दोहरीकरण पूरा होने से ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए बेवजह नहीं रुकना पड़ता और आवाजाही सुगम हुई है। जब पूरा सेक्शन डबल हो चुका है, तो रेलवे को टाइम टेबल की तकनीकी समीक्षा करनी चाहिए। जहाँ परिचालन संबंधी रुकावटें खत्म हो चुकी हैं, वहां रनिंग टाइम घटाकर यात्रियों को राहत देनी चाहिए। रतलाम-नीमच सेक्शन में दोहरीकरण का सीधा लाभ यात्रियों को मिलने लगा है। इंदौर-दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस (19337) अब नए शेड्यूल के तहत संचालित हो रही है।
यह ट्रेन अब इंदौर से 30 मिनट देरी से शाम 7.50 बजे रवाना हो रही है, जबकि दिल्ली पहुंचने का समय यथावत रखा गया है। रेलवे जनसंपर्क विभाग के अनुसार, इंदौर से नीमच के बीच शेड्यूल में आंशिक बदलाव कर रनिंग टाइम कम किया गया है। यदि रेलवे इंदौर-उज्जैन सेक्शन पर भी रनिंग टाइम कम करने का निर्णय लेता है, तो इस व्यस्त रूट की कई प्रीमियम और एक्सप्रेस ट्रेनों को सीधा फायदा मिलेगा। जिनमें अवंतिका एक्सप्रेस, मालवा एक्सप्रेस, शिप्रा एक्सप्रेस, इंदौर-नई दिल्ली इंटरसिटी, देहरादून एक्सप्रेस आदि ट्रेनें प्रमुख हैं।









