महाकाल भक्त चाहते हैं वीआईपी कल्चर खत्म हो

मंदिर गर्भगृह में प्रवेश का मामला कोर्ट तक पहुंचने से आम दर्शनार्थी उत्साहित
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूजउज्जैन। पिछले तीन सालों से भगवान महाकाल के गर्भगृह में आम दर्शनार्थियों का प्रवेश बंद है। जबकि प्रभावशाली लोग अंदर तक जा रहे हैं। यह मामला अब कोर्ट में पहुंचने के बाद आम दर्शनार्थियों में उत्साह है। सभी चाहते हैं वीआईपी कल्चर मंदिर से समाप्त हो।
आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पर रोक और नेताओं, वीआईपी और प्रभावशाली लोगों के विशेष प्रवेश को लेकर मामला अब इंदौर हाईकोर्ट पहुंच गया है। गुरुवार को युगलपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसमें प्रदेश सरकार, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट समिति, उज्जैन कलेक्टर और एसपी को पक्षकार बनाया गया हैं। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। इंदौर के याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने एडवोकेट चर्चित शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में दलील दी कि प्रभावशाली लोगों को महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में पूजा का अवसर मिलता है, जबकि दूर-दराज से आने वाले लाखों श्रद्धालु केवल बाहर से ही दर्शन करने को मजबूर रहते हैं। इस फैसले की जानकारी लगने के बाद महाकाल भक्तों में भी उत्साह है। शुक्रवार को महाकाल मंदिर आए दर्शनार्थियों ने इस मुद्दे पर कहा दर्शन व्यवस्था एकजैसी होना चाहिए।
हजारों रुपए खर्च कर आते हैं-दूर से दर्शन करते हैं तो दु:ख होता है
भवानी मंडी के पवन यादव ने कहा वे आए दिन भगवान महाकाल के दर्शन को आते हैं। उन्हें तब दु:ख होता है जब कोई एक दम पास नंदी भगवान से दर्शन कर रहा होता है और हम दूर से दर्शन करते हैं। यह नहीं होना चाहिए।
ग्वालियर से आए अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि जिसने भी न्यायालय में दर्शन व्यवस्था में सुधार के लिए याचिका लगाई है उन्होंने सही काम किया है। जब कोई नहीं सुनता है तो फिर कोर्ट का ही सहारा लेना पड़ता है।
ग्वालियर के ही नरेंद्र वर्मा ने भी याचिका का समर्थन करते हुए कहा मंदिर मेें भेदभाव खत्म होना चाहिए। व्यवस्था ऐसी बने कि सभी लोग समान रूप से एक ही जगह से दर्शन करें। कोई दूर तो कोई पास से दर्शन करे यह ठीक नहीं है।
यूपी के बलिया निवासी सुनील यादव ने कहा हजारों रुपए खर्च कर दर्शन के लिए आते हैं। एक बार भगवान को स्पर्श कर जल चढ़ा लें तो मन को बड़ी शांति मिलेगी। हमारी ऐसी अपील है कि मंदिर वालों को ऐसी व्यवस्था करना चाहिए।