नया बस किराया कल से लागू होने की संभावना

वैकल्पिक साधनों की मांग उठी, इंदौर-उज्जैन-देवास सर्कल ट्रेन चलाने की मांग
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 5 अगस्त को प्रदेश सरकार ने बसों का किराया बढ़ा दिया है। नया किराया 8 अगस्त से लागू होने की संभावना है। अत्यधिक किराया वृद्धि के विरोध में अब सोशल मीडिया पर वैकल्पिक साधनों की मांग उठने लगी है। इसके लिए इंदौर-फतेहाबाद-उज्जैन-देवास सर्कल मेें लोकल ट्रेनें चलाने पर जोर दिया जा रहा है।
बस ऑपरेटरों को किराया बढ़ाने की अनुमति मिल गई है। किराया तकरीबन 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़ेगा। हालाकि शुक्रवार तक किराया नहीं बढ़ा है। नया किराया शनिवार से लागू होने की संभावना है। डेली अपडाउनर्स सहित आम जनता ने किराया वृद्धि तर्कसंगत नहीं बताते हुए इसका विरोध किया है, साथ ही सर्कल ट्रेन चलाने की मांग उठाई है।
रोज 10 हजार से अधिक लोग जाते हैं इंदौर
व्यापार और नौकरी के सिलसिल में उज्जैन से रोज करीब 10 हजार लोग इंदौर जाते हैं। विद्यार्थियों की संख्या भी जोड़ी जाए तो आंकड़ा और अधिक होगा। डेली अपडाउनर्स में कई ऐसे हैं जो मात्र 15-20 हजार रुपए की नौकरी करते है। इन लोगों के लिए बसों का नया किराया गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर देगा। फिलहाल जो ट्रेन सुविधाएं इंदौर-उज्जैन के बीच है, वो अपडाउनर्स के लिए ज्यादा सुविधाजनक नहीं है। ऐसे में रेलवे से इंदौर, फतेहाबाद, उज्जैन, देवास होते हुए सर्कल ट्रेन चलाने की मांग उठने लगी है।
सोशल मीडिया पर शुरू हो गई मुहिम
जब से बस किराए मे बढ़ोत्तरी हुई है तब से सोशल मीडिया पर सर्कल ट्रेन को लेकर बहस शुरू हो गई है। वाट्सएप ग्रुप उज्जैन शहर विचार मंच पर गुरुवार रात से शुक्रवार तक इस पर बहस चलती रही। किसी ने सर्कल ट्रेन चलाने की मांग की तो किसी ने किराया वृद्धि कम करने का सुझाव दिया। एक ने तो काकरोच आंदोलन करने की अपील भी की।
इस तरह चली चर्चा
किराया बढ़ाने की आवश्यकता थी परंतु इतना भी नहीं बढ़ाना था। आज तक के इतिहास में जहां प्रति सवारी 15 या 20 रुपए किराया बढ़ता था अब 75 रुपए से सीधे 110 रुपए कर रहे हैं।
मैं सहमत हूं किराया अधिक बढ़ा है। इतनी अधिक वृद्धि तो कमर तोड़ देगी। 15 हजार की नौकरी करने वालों का भी विचार करना चाहिए।
बस हड़ताल होती तो तीन दिन बाद सरकार से चर्चा होती। चर्चा होने पर शायद इतना नहीं बढ़ता
सरकार करोड़पति बस मालिकों पर ज्यादा ही उदार हो गई है। थोड़ा आम जनता का भी विचार कर लेते।
उज्जैन-इंदौर से मुंबई-पुणे के लिए ट्रेनों की सख्त आवश्यकता है परंतु बस लॉबी स्पेशल ट्रेन नहीं चलने देती, क्योंकि बसों में नेताओं की पार्टनरशिप रहती है।
जितनी तत्परता से किराया बढ़ाया है उतनी ही तत्परता से बसों में टिकट जारी करना लागू कर दें। इससे सरकार को होने वाली कर की हानि की पोल भी खुल जाएगी।
व्हाया देवास-फतेहाबाद सर्कल ट्रेन चलाना चाहिए। सबके दिमाग ठिकाने आ जाएंगे। ट्रेन यात्रा सस्ती है।









