अब जागे अफसर… नर्मदा लाइन से जोड़ रहे गंभीर

…और पानी से बना रहे पैसा…चंबल का पानी लाने के लिए 12 करोड़ की डाली थी लाइन, 12 दिन भी नहीं चली
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शहर अब गंभीर जलसंकट के मुहाने पर खड़ा हो गया, तब पीएचई के अफसर जागे हैं और दो साल से बंद गंभीर डेम को नर्मदा लाइन से जोडऩे का काम करने की मशक्कत कर रहे हैं, जबकि गंभीर डेम में 162 एमसीएफटी पानी ही बचा है। इस संकट के बीच अक्षरविश्व की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि अफसर पानी से पैसा बनाने का खेल कैसे खेलते हैं। शहर को पेयजल संकट से बचाने के लिए 12 करोड़ रुपए खर्च कर अमलावदाबिका से डेम तक लाइन डाली गई थी, लेकिन इससे 12 दिन भी पानी नहीं लिया गया।
गंभीर डेम में पानी खत्म होने की स्थिति में नर्मदा का पानी सीधे डेम तक पहुंचाने के लिए लालपुल से डेम तक लाइन बिछाने का काम दो साल पहले किया गया था, लेकिन अब तक उसका टी कनेक्शन नहीं हो सका। अब यह कनेक्शन करने का काम ताबड़तोड़ किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार आज दोपहर से ही कनेक्शन करने का काम शुरू कर दिया जाएगा। अभी तक ये कहा जा रहा था कि लालपुल के नीचे से लाइन डालने की अनुमति नहीं मिल पा रही और अब निगम के अफसर कह रहे हैं कि ऐसी कोई स्थिति नहीं है। अब जबकि शहर जलसंकट के किनारे खड़ा हो गया है तब इस लाइन को कनेक्ट किया जा रहा, जबकि ये काम पहले भी किया जा सकता था।
केस 1: पेयजल के नाम पर 12 करोड़ रुपए खर्च किए करीब 16 साल पहले 2009 में जब शहर में जलसंकट की स्थिति बनी तब चंबल नदी का पानी गंभीर डेम तक लाने के लिए अमलावदाबिका से डेम तक करीब 22 किलोमीटर लंबी लाइन डाली गई थी, लेकिन इसका उपयोग मुश्किल से 12 दिन भी नहीं किया जा सका था। लाइन डालने के बाद ही गंभीर डेम बारिश के पानी से भर गया था और लाइन का उपयोग नहीं हो सका था। बाद में लाइन कहां चली गई, किसी को पता नहीं। इससे लाखों रुपए अफसरों की जेब में कमीशन के रूप में जरूर चले गए थे।
केस 2: किराए के ट्रांसफार्मर से चल रहा काम: गंभीर डेम के इंटेकवेल से पानी की सप्लाई करने के लिए किराए के ट्रांसफार्मर से काम चलाया जा रहा। सूत्रों के अनुसार इसका किराया प्रतिदिन 14 हजार रुपए दिया जा रहा। इतनी राशि किराए पर देने की जगह नया ट्रांसफार्मर खरीदा जा सकता है, लेकिन इस मामले में अफसर भी ध्यान नहीं दे रहे, इससे बड़ा आश्चर्य क्या हो सकता है। आशंका है कि किराए के ट्रांसफार्मर से पैसा बनाने का खेल चल रहा। गंभीर डेम पर पानी सप्लाई सबसे जरूरी काम है तो इसके लिए नया ट्रांसफार्मर क्यों नहीं खरीदे जा रहे। इस सवाल का जवाब हमें इसलिए नहीं मिला क्योंकि प्रभारी कार्यपालन यंत्री को पांच बार मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन न उन्होंने अटेंड किया न वापस लगाने की जरूरत समझी। बताया जा रहा है कि यह लाइन अस्थाई रूप से डाली गई थी।
काम शुरू कर रहे
गंभीर डेम से नर्मदा की लाइन को जोडऩे का काम आज से शुरू कर दिया जाएगा। लाइन डालने के लिए किसी विभाग से अनुमति न मिलने जैसी कोई बात नहीं।
मनोज टिकलकर, ऐसई, पीएचई
अभी किराया देना पड़ रहा
ये सही है कि अभी गंभीर डेम पर किराए के ट्रांसफार्मर से काम करना पड़ रहा। अमलावदाबिका से लाइन डाली गई थी लेकिन अब उसका उपयोग नहीं क्योंकि नर्मदा का पानी आने लगा है।
प्रकाश शर्मा
प्रभारी जलकार्य समिति