सिंधु का पानी रुका तो बौखलाया पाकिस्तान, LoC पर बढ़ी हलचल

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा उठाए गए कड़े कूटनीतिक और जल-रणनीति (Water Strategy) के कदमों ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। भारत द्वारा सिंधु नदी के पानी के प्रवाह को रोके जाने के बाद पाकिस्तान में हाहाकार मचा हुआ है। इस्लामाबाद ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में भी उठाया, लेकिन वहां से उसे कोई राहत नहीं मिली। इस कूटनीतिक करारी हार और जल संकट से बौखलाए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ अब भारत को सीधे तौर पर युद्ध छेड़ने की गीदड़भभकी दे रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल असीम मुनीर भारत के खिलाफ नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक बड़ी सैन्य साजिश रचने में मरुस्थल की तरह जुट गए हैं। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा पर अपनी 8 ब्रिगेड के साथ 35 अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन यूनिट्स तैनात कर दी हैं।
LoC पर एआई फेंसिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ग्रिड सक्रिय
पाकिस्तानी सेना ने भारत की आक्रामक रणनीति का मुकाबला करने के लिए सीमा पर नई तकनीक का सहारा लिया है:
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फेंसिंग: पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा के संवेदनशील इलाकों में एआई-आधारित फेंसिंग (बाड़) लगाई है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की तरफ टारगेटिंग और सर्विलांस (निगरानी) को अत्यधिक तेज करना है।
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इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ग्रिड: हाल ही में सीमा पर एक नया इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और काउंटर-ड्रोन ग्रिड तैयार किया गया है।
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अफगान सीमा से सैनिकों की री-तैनानी: सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा पर तैनात अपनी 5 सैन्य बटालियनों को वहां से हटाकर एलओसी के रावलाकोट, कोटली और भीम्बर सेक्टर्स में तैनात कर दिया है। गौरतलब है कि ये वही इलाके हैं जहां से पाकिस्तानी सेना भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराती रही है।
चीन देगा 5वीं जेनरेशन का खतरनाक फाइटर जेट J-35
भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अपनी सैन्य कमजोरी को भांपते हुए पाकिस्तान ने अपने सदाबहार दोस्त चीन के सामने हाथ फैलाए हैं:
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जे-सीरीज की सप्लाई: चीन ने आनन-फानन में पाकिस्तान को 36 मल्टी-रोल जे-सीरीज (J-Series) फाइटर जेट्स की खेप सौंप दी है।
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स्टील्थ जेट J-35: पेंटागन (Pentagon) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी एफ-35 (F-35) की टक्कर का माना जाने वाला चीन का 5वीं जनरेशन का स्टील्थ फाइटर जेट J-35 भी साल के अंत तक पाकिस्तानी वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा। इस विमान के सभी जरूरी परीक्षण और टेस्ट फ्लाइट्स पूरी हो चुकी हैं।
तुर्किये बना रहा है ड्रोन हब; पनडुब्बी की डिलीवरी जल्द
चीन के अलावा तुर्किये भी पाकिस्तान के सैन्य आधुनिकीकरण में पूरी मदद कर रहा है:
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कराची में ड्रोन प्लांट: तुर्किये ने कराची के नजदीक पाकिस्तान के साथ मिलकर एक जॉइंट कॉम्बैट ड्रोन असेंबली प्लांट स्थापित किया है। इस अत्याधुनिक प्लांट में हर साल 700 लड़ाकू ड्रोन बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पाकिस्तान ने इन ड्रोन्स को बांग्लादेश को निर्यात (Export) करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए हैं।
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MILGEM क्लास सबमरीन: तुर्किये की नौसेना पाकिस्तान के लिए ‘मिलजैम क्लास’ की घातक पनडुब्बियां (Submarines) तैयार कर रही है, जिनकी डिलीवरी इसी साल के अंत तक पाकिस्तान को मिल जाएगी।
“पानी रुका, तो भारत पर करेंगे हमला” — ख्वाजा आसिफ
दो दिन पहले पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी समाचार चैनल ARY न्यूज से बात करते हुए सीधे तौर पर भारत को युद्ध की धमकी दी थी।
“अगर पाकिस्तान को लगा कि भारत की हरकतों से उसकी जल सुरक्षा (Water Security) खतरे में पड़ रही है, तो हमारे पास भारत के खिलाफ जंग छेड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। भारत द्विपक्षीय जल समझौते को निलंबित कर पानी को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।” — ख्वाजा आसिफ, रक्षा मंत्री (पाकिस्तान)
हालाँकि, इसी इंटरव्यू में उन्होंने यह भी माना कि उन्हें पिछले एक साल में इस समझौते को लेकर हुए नए घटनाक्रमों की पूरी तकनीकी जानकारी नहीं है।
पृष्ठभूमि: अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने 1960 की ऐतिहासिक ‘सिंधु जल संधि’ को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। भारत का रुख बेहद कड़ा और स्पष्ट है—जब तक पाकिस्तान सीमा पार से जारी आतंकवाद और लॉन्च पैड्स के खिलाफ कोई ठोस और जमीनी कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह जल संधि बहाल नहीं की जाएगी।
क्या है ऐतिहासिक सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty)?
सिंधु नदी प्रणाली के तहत कुल छह नदियां आती हैं: सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज।
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विशाल जल क्षेत्र: इन नदियों का बेसिन करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। इसका भौगोलिक विभाजन इस प्रकार है:
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पाकिस्तान: 47% हिस्सा
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भारत: 39% हिस्सा
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चीन: 8% हिस्सा
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अफगानिस्तान: 6% हिस्सा
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बंटवारे का इतिहास: जल विवाद का इतिहास 1947 के विभाजन से भी पुराना है। आजादी के ठीक बाद दोनों देशों के बीच एक ‘स्टैंडस्टिल समझौता’ हुआ था, जो 31 मार्च 1948 को समाप्त हो गया। इसके बाद 1 अप्रैल 1948 को जब भारत ने नहरों का पानी रोका, तो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ कृषि भूमि सूखे की चपेट में आ गई थी।
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विश्व बैंक की मध्यस्थता: लगभग एक दशक तक चली लंबी वार्ताओं और वर्ल्ड बैंक (World Bank) की मध्यस्थता के बाद, 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस ऐतिहासिक ‘सिंधु जल संधि’ पर हस्ताक्षर किए थे।









