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Parenting tips : जि़म्मेदार बनेंगे बच्चे, जानिए कैसे

बच्चों में उम्र के अनुसार छोटे-मोटे काम करने की आदत डालें, इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और आत्मनिर्भर बनेंगे…

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1. जि़म्मेदारी इंसान को भूल करने से बचने का विश्वास और रास्ता देती है। इसीलिए कहा जाता है कि बच्चों में छुटपन से ही छोटे-मोटे काम करने की आदत बनाना ज़रूरी है।

2.  आत्मविश्वास बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें उम्र के अनुसार जि़म्मेदारियां सौंपें।

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3. उम्र बढऩे के साथ-साथ उनकी जि़म्मेदारियां बढ़ाते जाएं।

3 साल की उम्र तक

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बच्चों को छोटी-छोटी चीज़े संभालना सिखाएं। उदाहरण के तौर पर बिखरे हुए खिलौने उठाना और सहेजना सिखाएं। घर का सामान या उनके खिलौने जहां से उठाएं वहीं रखना सिखाएं। पशु और पक्षियों की देखभाल और उन्हें भोजन खिलाना सिखाएं। अगर घर में पालतू है तो उसकी देखभाल की छोटी-छोटी जि़म्मेदारियां दें। किताबों या अख़बार की देखभाल करना या उनको शेल्फ में रखना भी बच्चों को जि़म्मेदार बनाएगा।

3 से 5 साल की उम्र में

बच्चों को तीन साल की उम्र तक जो सिखा रहे हैं उसे जारी करते हुए नई जि़म्मेदारियां जोड़ें। उन्हें पौधों को पानी डालने के लिए कहें। घर के छोटे-छोटे कार्य जैसे डायनिंग टेबल पर सामान लगाना, सफ़ाई करना, बड़ों के साथ कपड़ों और घर की सफ़ाई कराना आदि। इसके अलावा इस उम्र में उन्हें ख़ुद नहाने दें। साथ ही कपड़ों का चुनाव करने दें और तैयार होने दें। बच्चे स्वयं की जि़म्मेदारी उठाना इसी उम्र में अच्छी तरह सीख पाते हैं।

5 से 7 साल की उम्र में

बच्चों में 3 साल से लेकर 7 साल तक की आदतें जारी रखने के साथ जि़म्मेदारियां बढ़ाएं। उन्हें बिस्तर लगाना, घर की साफ़ सफ़ाई भी सिखाएं। उन्हें ये जि़म्मेदारियां अकेले निभाने दें, लेकिन शुरुआत में कैसे करना है इसमें मदद कर सकते हैं। इस उम्र में बच्चे थोड़े समझदार हो जाते हैं इसलिए उन्हें घर का पता और फोन नंबर याद कराएं ताकि ज़रूरत पडऩे पर वह ख़ुद की मदद कर सकें।

8 साल से लेकर किशोरावस्था तक

तीन साल से लेकर सात साल की उम्र वाली जि़म्मेदारियां बच्चों को अभी भी निभाने दें। साथ में नई जि़म्मेदारियां सौंपें। मूलभूत कुकिंग और ख़ुद का टिफिन पैक करना सिखाएं। घर का कचरा कूड़ेदान में डालना और बाज़ार से सामान खऱीदना सिखाएं। जब बच्चे किशोर अवस्था में आएं, तो उन्हें हफ्ते में एक बार खाना बनाने दें। इसके अलावा ख़ुद के कपड़े धोने दें और सुबह के वक़्त अलार्म लगाकर ख़ुद उठने की जि़म्मेदारी दें।

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