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रोज ‘स्कूल में क्या किया?’ पूछने से बेहतर है संडे का रिवर्स इंटरव्यू, बच्चे खुलकर करेंगे बातें

“आज स्कूल में क्या हुआ?”, “मैडम ने क्या पढ़ाया?”, “टिफिन पूरा खत्म किया या नहीं?” स्कूल से लौटते ही अधिकांश माताएं अपने बच्चों से ऐसे ही सवाल पूछती हैं। एक कामकाजी मां के लिए दिनभर की व्यस्तता के बाद बच्चे की दिनचर्या जानने की इच्छा स्वाभाविक है। लेकिन अक्सर इन सवालों के जवाब में बच्चों का उत्तर केवल “कुछ नहीं”, “सब ठीक था” या “हां” तक ही सीमित रह जाता है।

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लगातार एक जैसे सवाल बच्चों को पूछताछ जैसे लगने लगते हैं। धीरे-धीरे वे अपनी भावनाएं और मन की बातें साझा करना कम कर देते हैं। यदि आप वास्तव में जानना चाहती हैं कि आपके बच्चे के मन में क्या चल रहा है, तो इस रविवार से एक नया तरीका अपनाया जा सकता है, जिसे ‘रिवर्स इंटरव्यू’ कहा जाता है।

क्या है ‘रिवर्स इंटरव्यू’ का तरीका?

रिवर्स इंटरव्यू का अर्थ है सवालों की दिशा बदल देना। इसमें मां बच्चे से सवाल नहीं पूछती, बल्कि बच्चा मां का साक्षात्कार लेता है। बच्चों को बड़ों की भूमिका निभाना और जिज्ञासावश सवाल पूछना बेहद पसंद होता है, इसलिए यह तरीका उनके लिए एक खेल जैसा बन जाता है।

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हर रविवार आधे घंटे का एक विशेष समय तय करें और उसे कोई मजेदार नाम दें। इस दौरान बच्चे को साक्षात्कारकर्ता की भूमिका दें और कहें कि आज वह सवाल पूछेगा और मां जवाब देगी। बच्चा आपसे आपकी पसंद, काम, बचपन, अनुभवों और भावनाओं के बारे में सवाल कर सकता है।

बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार

जब बच्चा खुद सवाल पूछता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। वह यह समझने लगता है कि बड़े भी गलतियां करते हैं, परेशान होते हैं और अपनी भावनाएं साझा करते हैं। इससे उसके मन में गलतियां छिपाने या डांट का डर कम होता है और वह खुलकर बातचीत करने लगता है।

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कैसे खुलते हैं बच्चे के मन के राज?

इस प्रक्रिया का सबसे रोचक हिस्सा तब शुरू होता है जब बच्चा कुछ सवाल पूछ चुका होता है। इसके बाद खेल-खेल में मां बच्चे से दो हल्के और कल्पनाशील सवाल पूछ सकती है।

जैसे, “अगर तुम्हें अपनी कक्षा के किसी एक दोस्त को अंतरिक्ष यात्रा पर भेजना हो तो किसे भेजोगे और क्यों?” या “इस सप्ताह मेरी कौन-सी बात तुम्हें बिल्कुल अच्छी नहीं लगी?” ऐसे सवालों से बच्चे की दोस्ती, पसंद-नापसंद, परेशानियां और भावनाएं सहज रूप से सामने आने लगती हैं।

सच बोलने की आदत को मिलता है बढ़ावा

जब घर में बातचीत का माहौल दोस्ताना और सहज हो जाता है, तो बच्चों को अपनी बातें छिपाने की जरूरत महसूस नहीं होती। वे स्कूल की परेशानियां, किसी दोस्त से जुड़ा विवाद, डर या किसी अप्रिय अनुभव के बारे में भी खुलकर बात करने लगते हैं। इससे माता-पिता समय रहते उनकी समस्याओं को समझ पाते हैं।

रविवार को बनाएं रिश्तों को मजबूत करने का दिन

व्यस्त दिनचर्या के कारण माता-पिता और बच्चों के बीच गहरी बातचीत के अवसर कम हो जाते हैं। ऐसे में रविवार का यह छोटा-सा प्रयास पूरे सप्ताह की दूरी को कम कर सकता है। केवल आधे घंटे का यह संवाद बच्चों को सुने जाने का एहसास देता है और माता-पिता को उनके मन की दुनिया समझने का अवसर प्रदान करता है। यही कारण है कि रिवर्स इंटरव्यू को बच्चों के साथ मजबूत रिश्ता बनाने का एक प्रभावी और रोचक तरीका माना जा रहा है।

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