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सिर्फ बेटियों नहीं, बेटों को भी सिखाएं ये 5 जरूरी बातें, वरना शादी के बाद बढ़ सकती हैं रिश्तों में कड़वाहट

हर घर में बचपन से बेटियों को परफेक्ट होममेकर बनाने की ट्रेनिंग शुरू हो जाती है। गोल रोटी बनाने से लेकर घर चमकाने तक सब सिखाया जाता है। तर्क होता है कि अगले घर जाना है, सास-ससुर क्या कहेंगे। लेकिन क्या कभी सोचा है कि जब आपके घर किसी की बेटी ब्याहकर आएगी तो वह आपके लड़के और आपकी परवरिश के बारे में क्या सोचेगी? आज जमाना बदल चुका है। बेटियां फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं, कॉर्पोरेट लीडर बन रही हैं और घर की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं। जब जिम्मेदारियां बराबरी की हैं तो काम का बंटवारा पुराना क्यों हो? अगर आज अपने लाडले को आत्मनिर्भर नहीं बनाया तो भविष्य में उसे जिंदगी भर कड़वे ताने सुनने पड़ेंगे।

कुकिंग — सिर्फ शौक नहीं, सर्वाइवल स्किल है

अक्सर मां लड़के को किचन में देखकर कह देती है कि तू रहने दे मैं बना देती हूं। यह लाड़-प्यार आगे चलकर उसके लिए मुसीबत बनता है। खाना बनाना कोई जेंडर-स्पेसिफिक काम नहीं है बल्कि यह जीवित रहने की एक बुनियादी जरूरत है। अपने बेटे को कम से कम दाल-चावल, सब्जी, रोटी और चाय-नाश्ता बनाना जरूर सिखाएं। कल को जब पत्नी बीमार होगी या काम के घंटे लंबे होंगे तो आपका बेटा न भूखा मरेगा और न ही अपनी पत्नी पर बोझ बनेगा।

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कपड़े धोना और आयरन करना

कमरे के फर्श पर गंदे मोजे फेंकना और गीला तौलिया बेड पर छोड़ देना कई घरों में लड़कों की शान समझी जाती है। लेकिन शादी के बाद यही आदतें रोज के झगड़ों की वजह बन जाती हैं। बेटों को सिखाएं कि वे अपने कपड़े खुद वॉशिंग मशीन में डालें, सुखाएं और अलमारी सहेजकर रखें। जब वह खुद कपड़े आयरन करना सीखेगा तो उसे समझ आएगा कि किसी के पीछे-पीछे सफाई करने में कितनी मेहनत और वक्त लगता है।

क्लीनिंग और ऑर्गेनाइजेशन

जिस घर में बेटा रहता है उसे साफ रखने की जिम्मेदारी उसकी भी उतनी ही है जितनी घर की बाकी सदस्यों की। झाड़ू-पोछा करना, बर्तन समेटना या डस्टिंग करना कोई ऐसा काम नहीं जिससे किसी की मर्दानगी कम हो जाए। उसे सिखाएं कि खाना खाने के बाद अपनी जूठी प्लेट खुद सिंक में रखे। जो बेटा आज मां की मदद करेगा वही कल एक समझदार और मददगार पति साबित होगा।

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इमोशनल इंटेलिजेंस और सम्मान — ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ वाले लूप से बाहर निकालें

लड़कों को बचपन से सिखाया जाता है कि लड़कियों की तरह रो मत। नतीजा यह होता है कि वे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते और शादी के बाद पार्टनर की भावनाओं को भी नहीं समझ पाते। अपने बेटे को रोने की आजादी दें और दूसरों की ना का सम्मान करना सिखाएं। उसे यह भी बताएं कि घर की किसी भी महिला पर चिल्लाना या हाथ उठाना ताकत नहीं बल्कि सबसे बड़ी कमजोरी की निशानी है।

सुई-धागे का काम और बेसिक होम रिपेयर

बटन टूट जाने पर मां या पत्नी के सामने हाथ फैलाकर खड़े हो जाना समझदारी नहीं है। सुई-धागा चलाना, फटे कपड़े टांकना, जूते पॉलिश करना और बेसिक सामान खुद व्यवस्थित करना हर लड़के को आना चाहिए। ये छोटी-छोटी चीजें उसे असली मायनों में आत्मनिर्भर बनाती हैं।

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पैरेंट्स के लिए जरूरी टिप्स

जब आप अपने बेटे को ये काम सिखाते हैं तो आप बहू पर कोई एहसान नहीं कर रहे होते। दरअसल आप अपने बेटे को एक बेहतर, स्वतंत्र और जिम्मेदार इंसान बना रहे होते हैं। एक ऐसा इंसान जो अपनी जिंदगी के फैसले और जिम्मेदारियां खुद संभाल सके। तो देर किस बात की? आज ही से अपने राजकुमार को आत्मनिर्भर जेंटलमैन बनाने की शुरुआत कीजिए। वरना याद रखिए जब भविष्य में बहू कहेगी कि आपकी मां ने कुछ सिखाया नहीं क्या, तो वह दर्द सीधे आपके दिल को लगेगा।

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