गणपति स्थापना के लिए बाहर के लोग उज्जैन से ले जाते हैं प्रतिमा

जबकि उज्जैन के लोग बाहर से लाते हैं, 15 से अधिक स्थानों पर बनती है गणपति प्रतिमा
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। गणेश चतुर्थी सोमवार को है। इसकी तैयारी अंतिम दौर में है। उज्जैन शहर में 50 से ज्यादा स्थानों पर सार्वजनिक और घर-घर में गणेश विराजित किए जाते हैं। पिछले सालों में उज्जैन में मनमोहक और मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं स्थापित करने का चलन बढ़ा है, ऐसे में प्रतिमा तैयार करने का काम अंतिम दौर में है। कच्चे माल की कीमत और मजदूरी बढऩे के कारण पिछले साल की तुलना में इस साल लागत 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ी है।
उज्जैन शहर में नागझिरी, नानाखेड़ा, अवंतीपुरा, कवेलू कारखाना, शंकरपुर, नीलगंगा, आगर रोड, गोपाल मंदिर आदि क्षेत्रों में गणेश प्रतिमा बनाने का काम चल रहा है। यहां उज्जैन के अलावा मुंबई, गुजरात और बिहार के कलाकार प्रतिमा तैयार कर रहे हैं। प्रतिमा चाक मिट्टी से बनती है। यह मिट्टी कोलकाता और गुजरात से आती है हालांकि यह इंदौर में भी मिल जाती है। प्रतिमा बनाने का काम जनवरी से शुरू हो जाता है। इस समय यह चरम पर है। इस बार मिट्टी की प्रतिमा का जोर है।
यह सामग्री उपयोग होती है
कारीगरों ने बताया मिट्टी, चावल के पौधे की घास (पैरा), नीम की लकड़ी, बांस और टाट का उपयोग होता है। मिट्टी स्थिर रखने के लिए टाट काम में आता है। 6 इंच से तीन फीट तक की प्रतिमा तो सांचे से बन जाती है। मगर इससे ऊंची को सहारा देने के लिए भीतर बांस लगाना पड़ता है। 6 से 8 फीट ऊंची प्रतिमा के सहारे के लिए लकड़ी भी लगाते हैं। इससे अधिक ऊंचाई की प्रतिमा में लोहे के पाइप, प्लेट, नट-बोल्ट का उपयोग होता है।
मजदूरी करने कोलकाता गए थे वहीं यह कला सीखी
नागझिरी में 30 बाय 50 का डोम बनाकर प्रतिमा बनाने वाले पाली निवासी नरेंद्र भाटी ने बताया वे मजदूरी के लिए कलकत्ता (अब कोलकोता) गए थे। वहीं यह कला सीखी। उज्जैन में 20 साल से प्रतिमा बना रहे हैं। उनके पास एक से साढ़े छह फीट तक ऊंची प्रतिमा है। प्रतिमा की सजावट में वाटर कलर का उपयोग करते हैं।
कोलकाता से आती है प्रतिमा, कलर उज्जैन में करते हैं
कवूलू कारखाना निवासी मुकेश प्रजापत ने बताया मिट्टी के साथ पेपर की लुगदी मिलाकर प्रतिमा बनाते हैं। कोलकाता से मिट्टी आती है। यह मिट्टी इंदौर में 500 रुपए प्रति बोरी मिल जाती है। बोरी में 20 किलो मिट्टी होती है। पिछले साल के मुकाबले कच्चे माल की कीमत 10 से 25 प्रतिशत तक बढ़ी है। सांचे से प्रतिमा बनाते हैं। सांचे से प्रतिमा बनाने के बाद घिसाई, फिनिशिंग और कलर करने में ज्यादा मेहनत लगती है। कोलकाता से भी प्रतिमा मंगवाते हैं जो बगैर कलर की होती है। वहां से प्रतिमा लाकर डिमांड के अनुसार डिजाइन प्रिंट करते हैं।
गणेश को भगवान के रूप में ही पूजें
कवेलू कारखाना के ही आयुष परिहार ने बताया सोशल मीडिया को देखकर लोग कार्टून और कॉमिक्स हीरो के रूपों में गणेश प्रतिमा की डिमांड करते हैं। गणपति पूजनीय हैं उन्हें उसी रूप में ही पूजना चाहिए। इस बार मूषक, सिंहासन, कमल और नंदी पर विराजित प्रतिमाएं बनाई हैं। परिहार ने बताया वे भी गणेश प्रतिमा स्थापना करते हैं। पिछले साल 24 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की थी।
भुसावल से आई थी सबसे ऊंची प्रतिमा
उज्जैन शहर में सार्वजनिक आयोजन के लिए तेलंगाना राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र से भी प्रतिमा लाई जाती हैं। हालांकि पिछले साल 24 फीट ऊंची प्रतिमा भुसावल से आई थी। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्र के आयोजक उज्जैन से प्रतिमाएं ले जाते हैं। उज्जैन में बनी प्रतिमाएं राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र भी जाती हैं।








