जहां महाकाल के जयघोष की आवाजें आती थीं अब वहां पर दिनभर गूंजती है हथौड़ों की आवाज

बाहर से आने वाले दर्शनार्थी परेशान हुए, रिक्शा चालकों ने खूब लाभ कमाया
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भगवान महाकालेश्वर मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते महाकाल घाटी पर जहां बुधवार तक महाकाल का जयघोष और दर्शनार्थी भक्तों की भीड़ रहती थी अब वहां हथौड़े चलने की आवाजें गूंज रहीं हैं। लोग अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान और आशियाना खुद ही तोड़ रहे है। कारण है कि सिंहस्थ की तैयारियों के लिए मास्टर प्लान में इस सड़क को 24 मीटर चौड़ा किया जाना।
सड़क के बीच से नपती करने के बाद स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने पहले ही नोटिस जारी कर दिए थे। मंगलवार को सामान हटाने के लिए दो दिन का समय दिया था और गुरुवार को सुबह 6:00 बजे से कार्रवाई शुरू हो गई थी। एहतियात के बतौर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था और पुलिस ने फायरब्रिगेड की लॉरी भी मंगवा ली थी। शुक्रवार को भी यह जारी रही।
कार्रवाई शुरू होने से एक दिन पहले ही व्यवसायियों ने अपना सामान हटा लिया था। कार्यवाही तो महाकाल घाटी से चौराहे तक होना थी परंतु स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण दूसरी तरफ चौराहे से जुड़े कोट मोहल्ला के कुछ व्यापारियों ने भी सामान हटा लिए थे। गुरुवार सुबह महाकाल घाटी की तरफ बैरिकेडिंग हुई तो उन्होंने राहत की सांस ली।
सर्वाधिक नुकसान अपंग सेवाश्रम का
सड़क चौड़ीकरण में सर्वाधिक नुकसान अपंग सेवाश्रम का हुआ है। महाकाल घाटी स्थित अपंग सेवाश्रम की क्षेत्र में 19 दुकानें हैं जो किराए से दी गई हैं। इनमें से कुछ दुकानें तो पूरी तरह साफ हो जाएंगी। चौड़ीकरण में उनकी जमीन तो जा ही रही है। नई दुकानें बनाने के लिए अतिरिक्त खर्च भी उठाना होगा।
बाहर से आने वाले दर्शनाथी परेशान
महाकाल चौराहे पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी है। स्थानीय रहवासियों को इसकी जानकारी थी परंतु बाहर से आने वाले दर्शनार्थी महाकाल मंदिर जाने के लिए दिनभर परेशान होते रहे। वे पुलिसकर्मियों से रास्ता पूछते और क्षेत्र की जानकारी नहीं होने के कारण भटक जाते। दर्शनार्थियों की इस मजबूरी का लाभ ई-रिक्शा चालकों ने खूब उठाया और मनमाना किराया वसूला।
शनिवार तक चलेगा काम
महाकाल घाटी में 39 स्ट्रक्चर तोड़े जा रहे थे। पूर्व में अनुमान था कि एक-डेढ़ दिन में काम हो जाएगा परंतु काम शुरू होने के बाद लग रहा है कि इस कार्य में ढाई से तीन दिन लग जाएंगे। व्यापारी शुभम पालीवाल ने बताया काम के लिए श्रमिकों पर निर्भर हैं। उन्होंने काम पूरा कर दिया तो पुनर्निर्माण जल्द शुरू होकर समय पर खत्म हो जाएगा अन्यथा देर लगेगी और व्यापार का नुकसान होगा।
सामान ज्यादा, इसलिए समय लग रहा
उधर स्मार्ट सिटी के इंजीनियर दीपक टोकरिया ने बताया पूर्व के अनुमान से ज्यादा समय लग सकता है। क्षेत्र में व्यापारी और रहवासी पूरा सहयोग कर खुद ही अपना निर्माण तोड़ रहे हैं। उनका सामान ज्यादा है इसलिए सामान हटाने में समय भी ज्यादा लग रहा है। एक डेढ़ दिन के अनुमान के बजाय ढ़ाई से तीन दिन लग सकते हैं।









