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iPhone से MacBook तक महंगे होंगे, Apple ने दिए संकेत

तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एपल के उत्पाद पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए आने वाले समय में अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक ने संकेत दिया है कि मेमोरी चिप की बढ़ती लागत के कारण अब पुराने दामों पर उपकरण बेचना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में आईफोन, मैकबुक और अन्य उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि नई कीमतें कब से लागू होंगी और किन उत्पादों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।

 

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मेमोरी चिप की बढ़ती लागत बनी बड़ी वजह

दुनियाभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लगभग हर तकनीकी कंपनी अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य उपकरणों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुविधाएं जोड़ रही है। इसके कारण मेमोरी चिप और अन्य आवश्यक पुर्जों की मांग में भारी वृद्धि हुई है।

इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं ने भी चिप निर्माण उद्योग को प्रभावित किया है। चिप निर्माण में उपयोग होने वाली कई आवश्यक गैसों और कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होने से लागत बढ़ी है। इसी का असर यह हुआ कि पिछले वर्ष अक्टूबर के बाद से रैम जैसे प्रमुख पुर्जों की कीमतों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

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ग्राहकों को राहत देने की कोशिश, लेकिन विकल्प सीमित

टिम कुक ने एक साक्षात्कार में कहा कि कंपनी ने ग्राहकों को बढ़ती लागत का बोझ कम से कम महसूस हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किया। लेकिन चिप निर्माण कंपनियों द्वारा लगातार बढ़ती कीमतों के कारण अब स्थिति को संभालना कठिन हो गया है।

कुक का कहना है कि यदि चिप की कीमतों में जल्द कमी नहीं आती, तो तकनीकी उत्पादों की लागत को नियंत्रित रखना लगभग असंभव हो जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि उद्योग को स्थिरता देने के लिए चिप बाजार में संतुलन लौटना बेहद आवश्यक है।

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पुराने आईफोन मॉडल भी पड़ सकते हैं महंगे

कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का असर केवल नए उपकरणों तक सीमित नहीं रह सकता। जानकारी के अनुसार भारत में पुराने आईफोन मॉडल जैसे आईफोन 16, आईफोन 15 और आईफोन 14 भी पहले की तुलना में अधिक कीमत पर बिक सकते हैं।

इसके पीछे एक प्रमुख कारण यह है कि एपल ने खुदरा विक्रेताओं को मिलने वाला वह विशेष प्रोत्साहन बंद करने का फैसला किया है, जिसके माध्यम से विक्रेता ग्राहकों को अतिरिक्त छूट उपलब्ध कराते थे। इस सहायता के समाप्त होने के बाद बाजार में मिलने वाली छूट घट सकती है और ग्राहकों को वही उत्पाद अधिक कीमत पर खरीदने पड़ सकते हैं।

छूट कम होने से बढ़ेगा ग्राहकों का खर्च

अब तक खुदरा विक्रेता कंपनी की ओर से मिलने वाले प्रोत्साहन का उपयोग कर ग्राहकों को आकर्षक रियायतें देते थे। लेकिन इस व्यवस्था के समाप्त होने के बाद छूट की गुंजाइश काफी कम हो जाएगी।

बाजार से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार लोकप्रिय आईफोन मॉडलों की प्रभावी कीमत में लगभग पाँच हजार रुपये तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि उत्पाद की आधिकारिक अधिकतम खुदरा कीमत में बदलाव नहीं होगा, लेकिन ग्राहकों को मिलने वाले लाभ कम हो जाएंगे।

अमेरिका में चिप निर्माण पर बढ़ा जोर

इस बीच अमेरिका में चिप निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रयास तेज हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बताया कि एपल और इंटेल के बीच सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उनका उद्देश्य चिप डिजाइन और निर्माण का बड़ा हिस्सा अमेरिका के भीतर विकसित करना है, ताकि वैश्विक आपूर्ति पर निर्भरता कम हो सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ता है तो भविष्य में लागत पर नियंत्रण संभव हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव दिखने में अभी समय लगेगा।

सिर्फ एपल नहीं, पूरी तकनीकी दुनिया प्रभावित

बढ़ती लागत का असर केवल एपल तक सीमित नहीं है। दुनिया की प्रमुख चिप निर्माण कंपनियों ने भी उत्पादन लागत बढ़ने की बात स्वीकार की है। कई बड़े स्मार्टफोन निर्माताओं ने पिछले कुछ महीनों में अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की है।

स्मार्टफोन उद्योग के अलावा गेमिंग उपकरणों के क्षेत्र में भी महंगाई का असर दिखाई दे रहा है। कई कंपनियां पहले ही अपने लोकप्रिय गेमिंग उपकरणों की कीमतें बढ़ाने की घोषणा कर चुकी हैं।

क्या बिक्री पर पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि कीमत बढ़ने के बावजूद आईफोन की मांग में बहुत बड़ी गिरावट आने की संभावना नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि बड़ी संख्या में ग्राहक इन उपकरणों को मासिक किस्तों के माध्यम से खरीदते हैं। ऐसे में बढ़ी हुई कीमत का बोझ कई महीनों में बंट जाता है।

हालांकि दूसरी ओर, सामान्य स्मार्टफोन बाजार में बढ़ती लागत का असर अधिक दिखाई दे सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और वैश्विक आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के कारण आने वाले महीनों में कई तकनीकी उपकरण पहले से अधिक महंगे हो सकते हैं।

आईफोन 18 की कीमत पर टिकी निगाहें

अब सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि सितंबर में पेश किए जाने वाले आईफोन 18 की कीमत क्या होगी। यदि चिप और मेमोरी की लागत इसी तरह बढ़ती रही, तो कंपनी नए मॉडल को पहले की तुलना में अधिक कीमत पर बाजार में उतार सकती है।

फिलहाल एपल ने किसी आधिकारिक मूल्य वृद्धि की घोषणा नहीं की है, लेकिन उद्योग के हालात को देखते हुए तकनीकी उत्पादों के महंगे होने की संभावना लगातार मजबूत होती जा रही है।

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