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बारिश ने रोका 700 करोड़ के प्रोजेक्ट का काम

कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना में खुदाई के काम पर पड़ा असर, टनल का काम चल रहा

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। बेमौसम हुई तेज बारिश ने 700 करोड़ रुपए के कान्ह डाइवर्जन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट पर भी ब्रेक लगा दिया है, जहां टनल या नहर बनाने के लिए खुदाई का काम किया जा रहा था। इससे किसानों की जमीन अक्टूबर के बाद भी अधिग्रहित करने की नौबत आ सकती है। फिलहाल प्रोजक्ट का 30 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है।

बुधवार शाम हुई तेज बारिश ने जल संसाधन विभाग के अफसरों की नींद उड़ा दी। कान्ह डाइवर्जन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट सिंहस्थ से पहले पूरा करना है और बारिश के कारण टनल खुदाई का काम रोकना पड़ा है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिन स्थानों पर टनल बनाई जा चुकी है, वहां जमीन के अंदर काम चल रहा है, लेकिन गंगेड़ी गांव के पास खुदाई का काम रोकना पड़ा है। यह काम किसानों के खेतों में चल रहा है और बारिश के कारण कई जगह पानी भर गया या मिट्टी गीली हो गई है, जिससे डंफर आदि ले जाने में परेशानियां आ रहीं। चिंतामन जवासिया के पास जमीन के अंदर करीब सौ फीट गहरा कुआं खोदा गया है, जहां से जमीन के अंदर टनल बनाने का काम चल रहा है। टनल बनाने के लिए मोटरों से पानी को बाहर निकाला जा रहा है।

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जमीन के अंदर 100 फीट नीचे बन रही टनल

प्रोजक्ट के तहत जमीन के अंदर 100 फीट नीचे 12 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जा रही है। इसमें पाइप फिटिंग का काम अभी चल रहा है। जमीन के अंदर होने से यह काम कठिन है और बारिश ने परेशानियां बढ़ा दी है। हालांकि टनल का काम जारी रखा गया है। यह प्रोजेक्ट 30. 15 किलोमीटर का है लेकिन 18.15 किलोमीटर का काम कट एंड कवर सेक्शन का यानी नहर का है। अधिकारियों के अनुसार 32 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अभी गंगेडी में खुदाई का काम किया जा रहा है। किसानों की जमीन का समतलीकरण करने के लिए एक बार फिर जमीन अधिग्रहण किया जाएगा। अभी जल संसाधन विभाग ने अक्टूबर तक का मुआवजा देकर किसानों की जमीन अधिग्रहित की है। टनल बनाने के लिए चार शॉफ्ट से उर्ध्वाकार और क्षैतिज खुदाई की जा रही है।

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जानने योग्य खास बातें

परियोजना अंतर्गत जमीन के अंदर 100 फीट नीचे दुनिया की सबसे लंबी टनल बन रही है।

प्रोजक्ट की कुल लंबाई 30.15 किमी है और जमीन के अंदर टनल की लंबाई 12 किमी।

इस टनल के ऊपर किसान अपनी खेती भी कर सकेंगे।

कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए यह काम हो रहा।

32 फीसदी काम पूरा हो चुका है।

जून 2024 में इस प्रोजेक्ट का काम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुरू किया था।

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