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सम्राट विक्रमादित्य विवि मेें फिर रखे जाएंगे हटाए गए अतिथि विद्वान

7 दिन तक सूनी रहीं कई अध्ययनशालाएं

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए उन सभी अतिथि विद्वानों, विजिटिंग फैकल्टी और अंशकालीन शिक्षकों को दोबारा आमंत्रित करने का पत्र जारी कर दिया है, जिनकी सेवाएं 30 जून को समाप्त कर दी गई थीं। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के सातवें दिन मंगलवार देर शाम विश्वविद्यालय कुलसचिव की ओर से यह राहत भरा आदेश जारी किया गया। इस फैसले से विवि की विभिन्न अध्ययनशालाओं में ठप पड़ा शैक्षणिक कार्य एक बार फिर पटरी पर लौट सकेगा।

उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूर्व में आदेश जारी कर 100 से अधिक अतिथि विद्वानों का आमंत्रण 30 जून को स्वत: समाप्त कर दिया था। इसके ठीक अगले दिन यानी 1 जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र (2026-27) तो शुरू हो गया, लेकिन विवि ने इन्हें दोबारा रखने के संबंध में कोई गाइडलाइन जारी नहीं की थी। नतीजा यह हुआ कि बीते सात दिनों से कई अध्ययनशालाएं पूरी तरह सूनी रहीं और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती रही। विश्वविद्यालय के कई महत्वपूर्ण विभाग ऐसे हैं, जो पूरी तरह से इन अतिथि विद्वानों के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं। इस निर्णय से जहां पिछले एक हफ्ते से परेशान हो रहे छात्रों को राहत मिलेगी, वहीं बेरोजगार हो चुके विद्वानों ने भी राहत की सांस ली है।

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इन शर्तों व नियमों के अधीन होगा दोबारा आमंत्रण: जारी पत्र के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कार्यरत रहे अतिथि विद्वानों को सत्र 2026-27 के लिए कार्यपरिषद् की स्वीकृति की प्रत्याशा में दोबारा आमंत्रित किया जा रहा है। हालांकि, यह आमंत्रण कुछ अनिवार्य शर्तों के अधीन रहेगा। जैसे उम्मीदवारों का आमंत्रण उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, यूजीसी के नए निर्देशों और मप्र उच्च शिक्षा विभाग के नियमों के आलोक में ही किया जाएगा। स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल उन्हीं विद्वानों को मौका मिलेगा जो योग्यता, गुण-दोष और पात्रता की शर्तों को पूरी तरह पूरा करते हों। यह नियुक्ति नितांत अस्थाई आधार पर होगी। विभाग में शैक्षणिक आवश्यकता समाप्त होने, पद पर नई नियमित नियुक्ति होने या आगामी आदेश जारी होने (जो भी पहले हो) तक ही यह व्यवस्था प्रभावी रहेगी।

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