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उज्जैन-महाकाल का नाम लेकर बेच रही सूअर के दांत

वन विभाग ने ग्राहक बनकर छानबीन की तो महिला दिल्ली की निकली, 4 करोड़ का कारोबार किया

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। दिल्ली की एक महिला इंस्टाग्राम पर खुद को उज्जैन की तांत्रिक बताकर सूअर के दांत सहित अन्य वन्य जीवों के अंगों का कारोबार कर रही थी। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने जब ग्राहक बनकर जांच की तो महिला दिल्ली की निकली। जांच रिपोर्ट बनाकर कार्रवाई के लिए दिल्ली वन विभाग को सौंपा गया है।

इंस्टाग्राम पर बाबा महाकाल का नाम लेकर और खुद को उज्जैन की बताकर लोगों की हर परेशानी दूर करने का दावा करने वाली एक महिला रंजना वन विभाग के रडार पर आई है। जो शादी-ब्याह में आ रही रुकावट हो, वशीकरण करना हो या नौकरी-रोजगार की समस्या का समाधान तंत्र-मंत्र से करने का दावा कर रही है। वन्य जीवों के दांत, नाखून, बाल और हड्डियां भी तंत्र-मंत्र मेें उपयोग करने का अंधविश्वास महिला द्वारा फैलाकर उनका व्यापार किया जा रहा था।

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वन विभाग की टीम ग्राहक बनकर जांच की तो खुला राज

डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर वन्य जीवों के प्रतिबंधित अवशेषों को सिद्ध कर बेचने की शिकायत मिली थी। जांच के दौरान जब वन विभाग की टीम ने फर्जी ग्राहक बनकर उक्त महिला से संपर्क किया, तो उसकी असलियत सामने आ गई। महिला ने पैसे ट्रांसफर करने के लिए जो बैंक खाते दिए, उनकी केवाईसी जांच कराने पर पता चला कि सभी खाते दिल्ली के पते पर रजिस्टर्ड हैं और महिला का उज्जैन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

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केवल 6 महीने में 4 करोड़ का लेन-देन
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा बैंक खातों की जांच में हुआ है। रंजना के दिल्ली स्थित खातों में पिछले महज 6 महीनों के भीतर लगभग 4 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है। यह पूरी रकम ऑनलाइन माध्यमों से छोटे-छोटे टुकड़ों में जमा की गई है। वन विभाग और साइबर सेल अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि क्या यह पूरी रकम देश के अलग-अलग हिस्सों में वन्य जीवों के अवशेष और अंग बेचकर ही कमाई गई है?

महाकाल की भस्म आरती के वीडियो से जीतती थी भरोसा
महिला ने इंस्टाग्राम पर अपने पैर जमाने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया था। वह अपनी प्रोफाइल पर रोजाना बाबा महाकाल की भस्म आरती के वीडियो और तस्वीरें पोस्ट करती थी। इसके अलावा, वह खुद को उज्जैन की साबित करने के लिए स्थानीय मंदिरों के दौरों के वीडियो भी डालती थी। वह अक्सर उन लोगों की चैट के स्क्रीनशॉट भी शेयर करती थी, जो दावा करते थे कि महिला द्वारा दिए गए तांत्रिक अवशेषों से उन्हें चमत्कारी आर्थिक लाभ हुआ है।

भोपाल से अब दिल्ली ट्रांसफर हुआ केस: चूंकि मामला अंतर-राज्यीय वन्य जीव तस्करी और धोखाधड़ी से जुड़ा है, इसलिए उज्जैन वन विभाग के डीएफओ तिवारी ने जांच से जुड़े सभी पुख्ता दस्तावेज और डिजिटल सबूत वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो भोपाल को सौंप दिए हैं। भोपाल हेडक्वार्टर से यह पूरी फाइल अब दिल्ली विंग को भेजी जा रही है, जिसके बाद दिल्ली में स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम महिला की गिरफ्तारी और वन्य जीवों के अंगों की बरामदगी के लिए छापेमारी करेगी।

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