स्कूल शिफ्टिंग के खिलाफ सांसद दफ्तर पहुंचे छात्राएं और अभिभावक

सुमित कुमार उज्जैन। जेन-जी एवं जेन- अल्फा का दाउदखेड़ी सांदीपनि स्कूल में अन्य स्कूलों को मर्ज करने का मसला एक बार फिर तूल पकडऩे लगा है। गुरुवार को शासकीय माध्यमिक विद्यालय महाकाल मैदान एवं नूतन स्कूल के विद्यार्थियों ने अभिभावकों के साथ सांसद कार्यालय पर प्रदर्शन किया और स्कूल को पुरानी जगह ही रखे जाने की मांग की। यह दोनों स्कूल दाऊदखेड़ी स्थित सांदीपनि स्कूल में शिफ्ट किए जा चुके हैं। शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित स्कूल तक आने-जाने में हो रही परेशानी को लेकर बच्चे और अभिभावकों सांसद कार्यालय पहुंचे थे। इन्होंने सांसद कार्यालय पर ज्ञापन दिया।
क्या हो रही है परेशानी
स्कूल शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर है। ऐसे में विद्यार्थियों को आने-जाने में अधिक समय लग रहा है।
वे सुबह 8.30 घर से निकलते हैं और शाम करीब 6 बजे तक घर पहुंचते हैं। बच्चों का ज्यादातर समय आवागमन में ही चला जा रहा है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में पढऩे वाले अधिकतर बच्चे कामकाजी परिवारों से आते हैं। बस नहीं आने की स्थिति में इन बच्चों को रोज स्कूल छोडऩा और वापस लाना संभव नहीं हो पा रहा है।
कई विद्यार्थियों ने स्कूल से टीसी भी निकाल ली है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल को पुराने स्थान पर वापस लाया जाना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो वे बच्चे वापस लौट आएंगे, जिन्होंने टीसी निकाली है।
अभिभावकों ने कहा कि अभी सांसद कार्यालय पर ज्ञापन दिया है, आगे जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपेगे। अभिभावक और विद्यार्थी स्कूल वापस चारधाम क्षेत्र में पुराने स्थान पर शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
यह भी सामने आया
21 जुलाई से 14 अगस्त के बीच स्कूल में अध्ययनरत 282 में से 119 छात्राओं ने एडमिशन निरस्त करवा लिया है।
इनमें कक्षा सातवीं के 60 में से 30 और कक्षा आठवीं के 65 में से 24 विद्यार्थी शामिल हैं। अभिभावकों और विद्यार्थियों ने स्कूल को वापस चारधाम क्षेत्र में पुराने स्थान पर शुरू करने की मांग की है।
छात्राओं ने क्या कहा
सांदीपनि स्कूल मेरे घर से करीब 8 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी में है। स्कूल दूर होने के कारण हमें बस से जाना पड़ता है। बस का समय जल्दी होने से अक्सर यह छूट जाती है। इससे हमारी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूल को पहले वाली जगह पर ही लाया जाए।
रवीना मालवीय, कक्षा 8वीं
सांदीपनि स्कूल के लिए हमें रोजाना सुबह करीब 8:30 बजे घर से निकलना पड़ता है। यहां से शाम करीब 6 बजे तक घर पहुंचते हैं। ऐसे में पढ़ाई के लिए समय ही नहीं बचता। अगर हमारा परिणाम बिगड़ा तो उसका जिम्मेदार कौन रहेगा।
स्नेहा, कक्षा 7वीं
जिस तरह हमारी बड़ी बहनों का स्कूल स्थानांतरित होने से रोका गया, उसी तरह हमारा स्कूल भी पुराने स्थान पर लगाया जाना चाहिए। अभी स्कूल आने-जाने में ही बहुत समय लग जाता है। पढ़ाई के लिए समय ही नहीं बचता। जिन रास्तो से बस आती-जाती है उसकी हालत भी बहुत खराब है, ऐसे में अगर कोई दुर्घटना हो जाती है तो किसकी जिम्मेदारी रहेगी।
काजल माली, कक्षा 7वीं
स्कूल का समय छह घंटे है। पर आने-जाने में तीन घंटे लग जाते हैं। ऐसे में स्कूल से लौटने के बाद हम कोई और काम नही कर पाते हैं। पढ़ाई के लिए भी समय नहीं मिलता। स्कूल का इतनी दूर शिफ्ट होना सीधे हमारी पढ़ाई को प्रभावित कर रहा है।
पूनम माली, कक्षा 7वी
अभिभावकों ने क्या कहा
मेरी बेटी दूसरी कक्षा में पढ़ती है। उसे थैलेसीमिया है। कई बार काम में व्यस्त होने के कारण हम उसे समय पर बस में नहीं बैठा पाते हैं। बस निकलने पर छोडऩे भी नहीं जा सकते। इससे मेरी बेटी की पढ़ाई बिगड़ रही है।
वंदना, जयसिंहपुरा
बच्चों की पढ़ाई में बहुत परेशानी आ रही है। स्कूल जहां पहले था, वहीं वापस शुरू हो। अगर स्कूल से लौटते समय बच्चे की बस छूट जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? कई बार हमें यह जानकारी भी नहीं मिल पाती कि बच्चे की बस छूट गई है।
हेमलता, चारधाम मंदिर के पास
बच्चे सुबह करीब 8:30 बजे स्कूल के लिए निकलते हैं। लौटते में शाम हो जाती है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी परेशानी है। हम चाहते हैं कि स्कूल पहले वाली जगह पर ही शुरू हो, जिससे बच्चों को पढ़ाई और परिवार को भी सुविधा रहे।
मंजू गौड़, चारधाम मंदिर के पास








