टैक्स : अनंत चतुर्दशी के बाद उज्जैन में भी हो सकता है व्यापारियों का विरोध

मीटिंग में बनाएंगे प्रदर्शन की योजना
इंदौर में नो यूपीआई डे : उज्जैन में व्यापारियों में कसक, पर अभी विरोध करना तय नहीं
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 2 हजार रुपए से अधिक की बिक्री पर यूपीआई भुगतान पर लगाए गए एमडीआर टैक्स को लेकर उज्जैन के व्यापारियों में भी कसमसाहट है। वह सरकार के इस फैसले से नाराज तो हैं पर अब तक विरोध कैसे और कब करना है यह तय नहीं कर सके हैं। टैक्स से सबसे ज्यादा प्रभावित, सोना-चांदी, रिटेल किराना, कपड़ा, जूते-चप्पल और बर्तन व्यापारी हो रहे हैं। ऑटोमोबाइल पर भी इसका असर रहेगा। फिलहाल गुस्से से भरे व्यापारी चैंबर ऑफ कामर्स और अपनी एसोसिएशन का रूख देख रहे हैं। इनकी मीटिंग जल्दी ही होना है। ऐसे में अनंत चतुर्दशी के बाद उज्जैन में भी विरोध के स्वर उठ सकते हैं।
दरअसल, इंदौर के व्यापारियों ने एमडीआर टैक्स के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। बुधवार को उन्होंने नो यूपीआई डे रखा और पूरा बिजनेस कैश में किया। यहां के व्यापारियों का कहना है कि क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर 18 फीसदी जीएसटी वे पहले ही चुका रहे हैं, ऐसे में 0.40 फीसदी का एमडीआर उनका मुनाफा और हल्का करेगा।
क्यों है व्यापारियों को दिक्कत
1 हजार रुपए से अधिक की खरीदी पर 40 रुपए एमडीआर बनता है। अधिकतम यह 300 रुपए तक रहेगा।
2 किराना, सोना-चांदी, कपड़ा और बर्तन बाजार में बिल 2 हजार रुपए से ज्यादा का ही बनता है।
3 अभी ग्राहक क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले टैक्स का भुगतान ही बड़ी मुश्किल से होता है।
- बढ़ा टैक्स व्यापारी देगा नहीं, और ग्राहक को देना नहीं है, ऐसे में कीमत बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं होगा।
- यूपीआई ने कारोबार को पिछले कुछ सालों में सुविधजनक बनाया था, अब टैक्स लगने से कैश में व्यापार होगा।
- कैश लेकर चलना रिस्की होगा और जेबकटी और लूट जैसी वारदातें बढऩे की आशंका रहेंगी।
मुनाफे पर डाका, मार्जिन पहले से ही कम: यह टैक्स व्यापारी के मुनाफे पर डाका है। मार्जिन पहले से ही कम है, अब सरकार बचा मुनाफा भी छीनना चाहती है। हम एक दो दिन में मीटिंग कर विरोध का फैसला करेंगे।
-प्रकाश आच्छा,
सचिव बर्तन विक्रेता एवं निर्माता संघ
सोना-चांदी कारोबारियों को नुकसान: सोना-चांदी कारोबारियों के लिए यह टैक्स किसी काले कानून से कम नहीं है। व्यापार में स्पर्धा पहले से ही बहुत है। ऐसे में काम कैसे होगा? जल्दी ही एसोसिएशन की मीटिंग कर विरोध की रणनीति तैयार करेंगे।
-शिवनारायण सोनी
अध्यक्ष, सरार्फ एसोसिएशन
पहले सुविधा दी, अब आंतक फैला रहे: यूपीआई सुविधा के तौर पर शुरू हुआ था। अब इस पर टैक्स लिया जा रहा है। देश में बदलाव होना चाहिए, पर इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक और व्यापारी पर बोझ डाल दिया जाए। यदि सुविधा परेशानी बन जाएगी तो उसे अपनाएगा कौन? एमडीआर टैक्स पर फिर से विचार करने की जरूरत है। आखिर यह शुल्क देगा कौन ?
-अनिल राठौर
सचिव फ्रीगंज व्यापारी एसोसिएशन
महंगाई के दौर में टैक्स उचित नहीं : महंगाई के इस दौर में व्यापारियों पर लगाया गया एमडीआर टैक्स उचित नहीं है।अतिरिक्त शुल्क के कारण ग्राहक और व्यापारी नगद लेन-देन की ओर जाएंगे।
-प्रसन्न जैन
व्यापारी, विक्रमादित्य क्लाथ मार्केट
अंतत: टैक्स का भार ग्राहक पर ही पड़ेगा: सरकार ने यह टैक्स भले ही व्यापारी पर लगाया हो, लेकिन इसका भार अंतत: ग्राहक को ही चुकाना होगा। अभी अमूमन एक ग्राहक 2 हजार रुपए से ज्यादा की ही खरीदी करता है। अगर व्यापारी को टैक्स देना पड़ा तो वह ग्राहक से ही वसूल करेगा। सरकार को विचार करना चाहिए।
-राजेश पलोड़
व्यापारी, विक्रमादित्य क्लॉथ मार्केट
व्यापारी के लिए यह मीठा खर्च : एमडीआर का सबसे ज्यादा नुकसान किराना व्यापारियों को होना है। अमूमन चार सदस्यों वाले परिवार का महीने का किराना बिल 5 हजार रुपए तक बनता है। व्यापारी को अगर टैक्स देना पड़ा तो नगद का चलन बढ़ेगा। यह व्यापारी के लिए मीठा खर्च है।
-कैलाश सोमानी, संचालक सीताराम माहेश्वरी
व्यापारी तो मर जाएगा: एमडीआर का सबसे ज्यादा असर किराना व्यापारियों को होगा। त्योहार चल रहे हैं, एसोसिएशन एक दो दिन में मीटिंग कर विचार करेगी कि सरकार तक अपना पक्ष कैसे पहुंचाया जाए।
हकीमउद्दीन हकीम,
संचालक, रायल सुपर मार्केट फ्रीगंज
थोक बाजार पर ज्यादा असर नहीं: थोक बाजार में बिजनेस आरटीजीएस से होता है। यूपीआई से केवल १० फीसदी कारोबार होता है। फिर भी परेशानी तो थोक कारोबार में भी होगी। एक दो दिन में एसोसिएशन की बैठक कर विचार करेंगे।
अजय रोहरा,
अध्यक्ष दौलतगंज होलसेल किराना बाजार
ग्रामीण क्षेत्र का कारोबार प्रभावित होगा: एमडीआर टैक्स से ग्रामीण क्षेत्र का कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। अभी ग्रामीण व्यापारी यूपीआई कर देते हैं और हम लोग सामान भिजवा देते हैं। टैक्स के चक्कर में नगद लेन-देन बढ़ेगा। ऐसे में जब तक भुगतान नहीं होगा, माल कैसे देंगे ? ग्रामीण कारोबार बंद होने की आशंका रहेगी।
अशोक अग्रवाल,
अध्यक्ष, एफएमसीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स एसोसिएशन
हम्माल का काम होगा प्रभावित : मंडी में यूपीआई का काम कम है लेकिन हम्माल और तुलावटियों को यूपीआई से ही पेमेंट होता है। उनका काम प्रभावित होगा। सरकार को विचार करना चाहिए।
-जितेंद्र अग्रवाल
अध्यक्ष, अनाज तिलहन व्यापारी संघ
टैक्स लगाना गलत, व्यापारी विरोध में एमडीआर टैक्स लगाना गलत है। व्यापारी इसके विरोध में हैं। लगातार चर्चा चल रही है। जल्दी ही मीटिंग करेंगे और आगे की रणनीति तैयार करेंगे।
-महेश पायलवाला
अध्यक्ष लखेरवाड़ी व्यापारी एसोसिएशन
एसोसिएशन है, इसलिए चैंबर दूर: चूंकि अब अलग-अलग कारोबार की अलग-अलग एसोसिएशन हो गई है, इसलिए चैंबर ऑफ कामर्स ने इस संबंध में अब तक विचार नहीं किया है। अब चूंकि बात आ रही है तो एक दो दिन में चैंबर की मीटिंग बुलाकर विरोध का तरीका तय किया जा सकता है।
-माणकलाल गिरिया
अध्यक्ष चैंबर ऑफ कामर्स









