यूडीए ने बेगमबाग में अवैध मकानों पर चलवाई जेसीबी

विरोध करने जमा हुई भीड़ को शहरकाजी ने समझाया

अभी पांच मकान ही तोड़े हैं, प्राधिकरण की सूची में और भी मकान बाकी हैं
अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। बेगमबाग के मुख्य मार्ग पर बने अवैध मकानों पर जेसीबी चलाने के लिए पहुंची उज्जैन विकास प्राधिकरण की टीम को विरोध का सामना पड़ा। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सडक़ पर बैठकर आक्रोश जताया। मौके पर पहुंचे शहरकाजी ने अधिकारियों से बात की। पूरे मामले को समझने के बाद आक्रोशित लोगों को समझाया तब भीड़ छंटी और प्रशासन ने कार्रवाई की। लोगों ने जेसीबी से बचने के लिए मकानों को खुद भी तोडऩा शुरू कर दिया था। भीड़ और कार्रवाई के चलते हरिफाटक से महाकाल की ओर जाने वाला मार्ग बंद रहा।
रात 3 बजे से जमा हो गई थी भीड़
प्राधिकरण द्वारा २८ संपत्तियों (मकान, दुकान, होटल) के मालिकों को नोटिस भेज दिए थे। मामला न्यायालय तक पहुंचा था। स्टे की अवधि खत्म होने के बाद प्राधिकरण को अपनी कार्रवाई करना था। यह जानकारी मिलते ही बेगमबाग की सडक़ पर रात ३ बजे से ही बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई थी। प्रशासन को भी इस बात की जानकारी मिल गई थी। लिहाजा, बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
अधिकारियों को देखते ही आक्रोश भडक़ा
प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी, एसडीएम एलएन गर्ग और एसएसपी नितेश भार्गव दल बल के साथ बेगमबाग पहुंचे। टीम उन मकानों को जमीदोज करना चाहती थी जो अवैध घोषित हो चुके थे। वहां मौजूद लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों का विरोध किया। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने शहरकाजी खलीकुर्रहमान को बुलाया। अधिकारियों ने दस्तावेज दिखाए और कहा कि इस कार्रवाई में गलत कुछ भी नहीं है। प्रशासन कोर्ट के आदेशानुसार ही कार्रवाई कर रहा है। शहरकाजी ने दस्तावेज देखे और अधिकारियों के तर्क से सहमत हुए। उन्होंने उत्तेजित लोगों को समझाया तब जाकर प्राधिकरण की टीम ने दो प्लॉट पर बने पांच मकानों पर जेसीबी चलाई।
सीईओ ने बताया नोटिस दे दिए थे
उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने मीडिया को बताया कि प्राधिकरण ने इस क्षेत्र में कुल २८ मकान चिह्नित किए हैं। इनके मालिकों ने प्राधिकरण को बताए बिना कमर्शियल रूप में तब्दील कर दिया। यह लीज की शर्त का उल्लंघन था। डेढ़ साल पहले ही लीज समाप्त हो गई थी। संपत्ति के मालिकों ने प्राधिकरण के संझान में लाए बिना ही ट्रांजेक्शन कर दिया। प्राधिकरण ने नोटिस भी जारी कर दिए थे। संपत्ति मालिक कोर्ट में गए। स्टे मिला। १५ दिन पहले स्टे की अवधि खत्म हुई। प्राधिकरण ने प्लॉट ४९ और ५५ पर बने अवैध मकानों पर कार्रवाई की है।









