सरकार की मंशा को पलीता लगा रहे उज्जैन नगर निगम के अधिकारी

भवन अनुज्ञा के लिए चक्कर खा रहे लोग
मनमानी – कभी सर्वर-पोर्टल डाउन, तो कभी अधिकारी के अवकाश पर होने का बोल के कर रहे गुमराह
अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। प्रदेश सरकार ने नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सभी निकायों को ऑनलाइन नक्शे स्वीकृत करने के आदेश दिए थे। नगरीय आवास एवं विकास विभाग ने पहले ऑनलाइन बिल्डिंग परमिशन की सुविधा दी और फिर डीम्ड परमिशन का दायरा भीे बढ़ा दिया है।
प्रदेश की जनता को लाभ पहुंचाने के सरकार द्वारा किए जा रहे तमाम प्रयासों के विपरीत नगर निगम उज्जैन में तरह-तरह के बहाने बनाकर भवन अनुज्ञा जारी करने में आनाकानी की जा रही है। इससे लोग परेशान हो रहे हैं। निगम के इंजीनियर और भवन शाखा के कर्मचारी सर्वर डाउन रहने और अधिकारियों की अनुपस्थिति को अपनी मनमानी करने का सहारा बना रहे हैं। नगरीय आवास एवं विकास विभाग ने ऑन लाइन बिल्डिंग परमिशन की सुविधा शुरू कर दी।
नगर निगम के भवन शाखा में आवेदन होने के बावजूद भी लोगों को नक्शा पास करवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। सुविधा के लिए बनाए सॉफ्टवेयर में भी इंजीनियरों की मनमानी चल रही है। जनता से सीधे जुड़े इस काम को लेकर अरसे से ना तो महापौर ने कोई समीक्षा बैठक की ना ही निगमायुक्त को इसकी चिंता है। यही कारण है निगम के उपयंत्री, डीसीसीआर सेल से लेकर भवन अधिकारी तक अपने हिसाब से काम करते हैं।
काकस बना लिया
अब घर बैठे पास होंगे नक्शे, नहीं लगाना पड़ेंगे नगर निगम जोन के चक्कर। इंजीनियरों को नक्शे के लिए घूस देना अब हुआ बंद, फाइल रोकी तो तय होगी जवाबदेही। कुछ इस तरह की शब्दावली नक्शे के ऑनलाइन सिस्टम शुरू होने के दौरान चर्चाओं में रही, लेकिन धीरे-धीरे इंजीनियरों ने इस सिस्टम पर ऐसा काकस बना लिया कि जब तक फाइल पर वजन नहीं पहुंचे वे क्लिक ही नहीं करते। या फिर कुछ भी खामियां निकालकर फाइल को रिजेक्ट कर देते हैं। अनुमति नहीं देने और नक्शा पास नहीं करने में इन दिनों सबसे अधिक बहाना पोर्टल और सर्वर के नहीं चलने के साथ अधिकारी की अनुपस्थिति का बनाया जा रहा है। कुल मिलाकर शासन की मंशा को निगम के इंजीनियर धता बता रहे हैं।
सिस्टम को अपने हिसाब से चला रहे इंजीनियर
मैन्यूअल नक्शा फाइल में इंजीनियरों की मनमानी व कारस्तानी रोकने शासन ने सभी निकायों में ऑनलाइन अनुज्ञा सिस्टम लागू किया है, लेकिन इंजीनियरों ने इसे भी अपने हिसाब से चलाना शुरू कर दिया। आला अधिकारियों की आकस्मिक चेकिंग व मॉनिटरिंग नहीं होने से इंजीनियर बेलगाम होकर काम रहे हैं।
इतना ही नहीं भवन अनुज्ञा शाखा में यदि कोई अधिकारी अवकाश पर जाता है, तो प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वह फाइलों पर हस्ताक्षर करें, लेकिन प्रभारी अधिकारी फाइल को देखते तक नहीं। कारण सभी को पता है, पर कोई बोलने वाला नहीं है। अधिकारी के अवकाश काल में प्रभारी द्वारा ऑनलाइन प्रस्तुत फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं होने से नक्शे अटकते है। किसी जिम्मेदार अधिकारी ने जनता की इस समस्या पर संज्ञान तक नहीं लिया।
खोजने पड़ रहे हैं कॉलोनियों के नक्शे
भवन बनाने के लिए नगर निगम के अफसरों के चक्करों से मुक्त करने के लिए शासन ने डीम्ड परमिशन का दायरा 1129 वर्गफीट से बढ़ाकर 2000 वर्गफीट कर दिया है। लोगों की सुविधा के लिए नगरीय आवास एवं विकास विभाग ने डीम्ड परमिशन का दायरा तो बढ़ा दिया हैं। इसमें शर्त यह है कि टीएंडसीपी और नगर निगम से नक्शा पास कराकर बनाई वैध कॉलोनियों मेें प्लॉट खरीदने वाले ही डीम्ड परमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में जिन लोगों को इसकी जानकारी नहीं है उन्हें कॉलोनियों के नक्शे खोजना पड़ रहे हैं। वे इस कारण परेशान हैं। ऑन लाइन बिल्डिंग परमिशन की सुविधा शुरू होने के बाद भी लोगों को नक्शा पास कराने निगम में चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बता दें कि नगर निगम में फिलहाल नगर शिल्पज्ञ का पद रिक्त है।
यह है नक्शे की प्रक्रिया
30 दिन में होना जरूरी
आवेदक लाइसेंसी आर्किटेक्ट के जरिए फाइल प्रस्तुत करता है।
7 दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण कर फाइल को स्वीकृत या अस्वीकृति करना।
अस्वीकृति की दशा में संबंधित दस्तावेज की कमी व उचित कारण दर्शाना।
डीसीआर सेल के बाबू द्वारा दस्तावेज परीक्षण कर संबंधित अनुज्ञा पर लगने वाले शुल्क का निर्धारण।
भवन अधिकारी के एप्रुवल के बाद ऑनलाइन शुल्क जमा होता है।
शुल्क वेरिफिकेशन के बाद अनुज्ञा फाइल पर डिजिटल हस्ताक्षर होते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्थिति में 30 दिन से अधिक अवधि नहीं लगना चाहिए।
यह फायदें बताएं थे
नक्शे संबंधी प्रकरण में थोड़ी भी चूक होने पर सॉफ्टवेयर स्वत: उसकी जानकारी दर्शा देगा।
प्रक्रिया पहले से ज्यादा पारदर्शी होगी। तय समय सीमा में काम नहीं हुआ तो वरिष्ठ अधिकारियों तक इसकी जानकारी पहुंच जाएगी।
एक से दूसरी टेबल तक फाइल बढऩे में लगने वाले समय की बचत होगी। ऑनलाइन ही परमिशन की फाइल मूव होगी।
इंजीनियर मनमानी नहीं कर सकेंगे क्योंकि पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में रहेगी।
बिल्डिंग की परमिशन नागरिक आनॅलाइन ही कहीं पर भी निकाल सकेंगे।
रिकॉर्ड रखने की मशक्कत खत्म होगी, आनॅलाइन डेटा सुरक्षित रहेगा।
ऐसे करते हैं लेतलाली
ऑनलाइन सिस्टम में कौन सी फाइल किसके पास पेंडिंग है यह दिखता है।
शुरुआती दौर में उपयंत्री लटकाते हैं, जब बात बन जाए तो फिर इइ लेवल पर पेंडेंसी।
जिन कामों में आर्किटेक्ट राशि मुहैया करा देते हैं वे काम समय से होने लगते हैं।
जिनमें आवेदक कुछ नहीं दे तो उन्हें दस्तावेजी कमी के नाम पर तंग किया जाता है। जैसे फोटो साफ नहीं, रजिस्ट्री कॉपी ठीक से अपलोड करें, आर्किटेक्ट लाइसेंस लगाएं।
तंग होकर आवेदक खुद ही आर्किटेक्ट को कह देते हैं जो लगे आप बात कर लो, नक्शा जल्दी चाहिए।
नक्शे की कई फाइल तीन से चार माह तक निगम के ऑनलाइन सिस्टम में घूमती रहती है।
इतना सब होने के साथ सबसे बड़ा बहाना बनाया जाता है कि सर्वर नहीं चल रहा। पोर्टल बंद है,अधिकारी अवकाश पर है।
इनका कहना
सर्वर/पोर्टल की वजह से कुछ दिक्कत है। भवन अनुज्ञा का काम समयावधि में पूर्ण हो इसके लिए सभी को निर्देश है। यदि अन्य कोई रुकावट है,तो जानकारी निकालकर उचित कार्रवाई करेंगे। – आशीष पाठक, उज्जैन नगर निगम आयुक्त।









