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शुक्र ग्रह नाराज होने पर मिलते हैं ये संकेत, ऐसे करें दोष दूर

ज्योतिष के अनुसार ग्रहों का संबंध आपके जीवन से होता है और इनकी गति से ही आपके जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई भी ग्रह आपसे नाराज है तो आपके जीवन में बाधाएं आ सकती हैं और आपको असफलता मिल सकती है।

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पूरे नौ ग्रहों का स्थान कुंडली में महत्व रखता है और उनसे ही जीवन की गति संचालित होती है। सभी  9 ग्रहों का अपना स्वभाव और गुण होते हैं, जो उन्हीं के अनुसार फल प्रदान करते हैं। सभी ग्रहों की तरह वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सुख,संपदा और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है।

शुक्र दोष के लक्षण

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जब कुंडली में शुक्र अशुभ भावों का स्वामी हो, अशुभ भावों में बैठा हो, अपनी नीच राशि में हो, लग्नेश का शत्रु हो या पापी ग्रहों के साथ बैठा हो, तो इसे शुक्र ग्रह दोष कहा जाता है। आइये जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में-

  • अगर प्रेम संबंधों में बार-बार असफलता मिले, व्यक्तित्व में आकर्षण का अभाव हो, महिलाएं दूर भागती हों, तो ये कमजोर शुक्र के लक्षण हैं।
  • जीवन में स्त्री सुख की कमी हो, या कामेच्छा का अभाव हो, तो ये भी शुक्र दोष की वजह से हो सकता है।
  • अगर विवाह के बाद वीर्य की समस्या हो, संतान प्राप्ति में दिक्कत आ रही हो, तो ये कमजोर शुक्र के लक्षण हैं।
  • विवाह में बाधा आ रही हो, या देरी हो, बार-बार रिश्ते टूट जाते हों, या विवाह के बाद भी सामंजस्य नहीं बैठ रहा हो, तो आपको शुक्र के उपाय करने चाहिए।
  • जीवन में अच्छे भोजन, अच्छे वाहन, अच्छे बिस्तर की कमी हो, आवश्यकता से कम धन हो, तो ये भी शुक्र दोष की वजह से हो सकता है।
  • अगर गंदा रहने की आदत हो, नहाना पसंद ना हो, साफ-सफाई की जरुरत महसूस ना हो, तो ये भी कमजोर शुक्र के लक्षण हैं। ऐसे लोगों से लक्ष्मी हमेशा दूर रहती हैं।

शुक्र को शुभ बनाने के तरीके :

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1.लक्ष्मी की उपासना करें। शुक्रवार का व्रत रखें। खटाई न खाएं।
2.स्त्री का सम्मान करें, पत्नी को खुश रखें। पराई स्त्री से संबंध न रखें।
3.गृह कलेश छोड़कर परिवार के सदस्यों के साथ प्यार से रहें।
4.घर को वास्तु अनुसार ठीक रखें।
5.सफेद वस्त्र दान करें।
6.भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवे और कुत्ते को दें।
7.दो मोती लेकर एक पानी में बहा दें और एक जिंदगीभर अपने पास रखें।
8.स्वयं को और घर को साफ-सुथरा रखें और हमेशा साफ कपड़े पहनें। नित्य नहाएं।शरीर को जरा भी गंदा न रखें।
9.सुगंधित इत्र या सेंट का उपयोग करें। पवित्र बने रहें।

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