उज्जैन में पहली बार 15 फरवरी से विंध्य हर्बल वन मेला

शिवरात्रि से छह दिनों के लिए दशहरा मैदान में होगा आयोजन, सीएम ने की घोषण

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। महाकाल की नगरी अब आयुर्वेद और प्रकृति के रंगों में रंगने वाली है। उज्जैन के दशहरा मैदान में आगामी 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) से 20 फरवरी तक पहली बार विंध्य हर्बल वन मेला आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भोपाल के अंतरराष्ट्रीय वन मेले में की गई घोषणा के बाद, उज्जैन वन विभाग इस बड़े आयोजन की तैयारियों में जुट गया है।
मेले में बच्चों और युवाओं के लिए चीता परिवार का विशाल स्कल्पचर (प्रतिमाएं) सबसे बड़ा आकर्षण होगा। साथ ही, वन्य प्राणियों को सुरक्षित पकडऩे के लिए इस्तेमाल होने वाला बोमा भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके माध्यम से आम जनता को चीतों के पुनस्र्थापन और जैव विविधता के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी।
दाल पानिया व गौंडी व्यंजन का मिलेगा स्वाद
मेले में केवल जड़ी-बूटियां ही नहीं, बल्कि दुर्लभ पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी मिलेगा। बांधवगढ़ के प्रसिद्ध गोंडी व्यंजन और अलीराजपुर का दाल-पनिया विशेष रूप से उपलब्ध रहेंगे। आयुर्वेदिक कॉलेज के विशेषज्ञ इन व्यंजनों के औषधीय गुणों और पोषण के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे।
महाकाल से दशहरा मैदान तक चलेगी मुफ्त बस
प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। महाकाल मंदिर से मेला परिसर (दशहारा मैदान) तक मुफ्त बस चलेगी।कम शुल्क पर ई-रिक्शा और बुजुर्गों/दिव्यांगों के लिए गोल्फ कार्ट व व्हीलचेयर की व्यवस्था रहेगी। प्रतिदिन लगभग 250 आयुर्वेदिक चिकित्सक मरीजों को मुफ्त परामर्श देंगे।
बड़ा हर्बल बाजार भी रहेगा मेले में
मेले में छह विशाल डोम बनाए जाएंगे, जहाँ विंध्य हर्बल के 140 से अधिक उत्पाद (जैसे महुआ बॉडी लोशन, एंटी-एजिंग क्रीम, शुद्ध शहद और शिलाजीत) उपलब्ध होंगे।
इनका कहना है
मध्यप्रदेश शासन से मेले से संबंधित दिशा-निर्देश प्राप्त हो गए हैं। इसी के मुताबिक तैयारियां की जा रही है।
अनुराग तिवारी, डीएफओ









