Jagannath Rath Yatra : जगन्नाथ मंदिर में क्यों नहीं बजाया जाता शंख?

Jagannath Rath Yatra : रहस्यों से भरे जगन्नाथ मंदिर में क्यों नहीं बजाया जाता शंख? जानें पौराणिक मान्यताएं और इसकी खास वजह
Jagannath Rath Yatra : भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सनातन धर्म के सबसे प्रमुख और भव्य पर्वों में से एक मानी जाती है। हर साल आषाढ़ मास में ओडिशा के पुरी से निकलने वाली इस रथयात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन्हीं में से एक है कि मंदिर के गर्भगृह में शंख नहीं बजाया जाता। आइए जानते हैं इसके पीछे जुड़ी प्रमुख पौराणिक मान्यताएं।
शंखासुर राक्षस से जुड़ी पौराणिक कथा
मान्यता है कि पुरी क्षेत्र का प्राचीन नाम शंखक्षेत्र था, जिसका संबंध शंखासुर नामक राक्षस से माना जाता है। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने शंखासुर का वध यहीं किया था। कहा जाता है कि राक्षस अंत समय में शंख के भीतर छिप गया था और भगवान विष्णु ने उसका संहार किया।
लोकमान्यता के अनुसार, उसी घटना की स्मृति में मंदिर के गर्भगृह में शंखनाद नहीं किया जाता, ताकि उस राक्षस की स्मृति या प्रतीकात्मक उपस्थिति दोबारा न जागे।
माता लक्ष्मी और तुलसी से जुड़ी मान्यता
एक अन्य कथा के अनुसार, माता लक्ष्मी तुलसी रूप में तपस्या कर रही थीं, तभी भगवान विष्णु ने शंखासुर का वध किया। मान्यता है कि उस घटना की याद माता लक्ष्मी को न आए, इसलिए जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में शंख बजाने की परंपरा नहीं रखी गई।
समुद्र देव से जुड़ा संबंध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शंख की उत्पत्ति समुद्र से हुई है और समुद्र देव को माता लक्ष्मी के पिता माना जाता है। भगवान जगन्नाथ, माता लक्ष्मी के पति हैं। इसी कारण कुछ परंपराओं में शंख को समुद्र देव का प्रतीक मानते हुए मंदिर के गर्भगृह में शंखनाद नहीं किया जाता।
जूठन से जुड़ी धार्मिक परंपरा
जगन्नाथ मंदिर की पूजा-पद्धति अन्य मंदिरों से काफी अलग मानी जाती है। यहां ऐसी किसी वस्तु का उपयोग नहीं किया जाता जिसे व्यक्ति के मुख का स्पर्श हुआ हो। चूंकि शंख को फूंककर बजाया जाता है, इसलिए गर्भगृह की पूजा में इसका उपयोग नहीं किया जाता।
सेवायत परंपरा भी बताई जाती है कारण
मंदिर की पूजा विभिन्न सेवायत परिवारों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी संपन्न कराई जाती है। मान्यता है कि हर सेवा का अधिकार एक निश्चित परिवार के पास होता है। कुछ परंपराओं के अनुसार, जिन सेवाओं से जुड़े परिवार अब उपलब्ध नहीं हैं, उनसे संबंधित कुछ अनुष्ठान भी समय के साथ बंद हो गए। शंख न बजाने की वजह को इससे भी जोड़ा जाता है।
क्या रथयात्रा में शंख बजाया जाता है?
हां। शंख बजाने की मनाही केवल जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह तक सीमित मानी जाती है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, धार्मिक जुलूस और अन्य पूजा-अनुष्ठानों में शंखनाद किया जाता है।
जगन्नाथ मंदिर की अन्य अनोखी परंपराएं
- मंदिर को कई रहस्यमयी मान्यताओं के लिए जाना जाता है।
- यहां की पूजा-पद्धति अन्य मंदिरों से अलग मानी जाती है।
- भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद (भात) विशेष महत्व रखता है।
- रथयात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं।
नोट: शंख न बजाने के कारण मुख्य रूप से पौराणिक कथाओं और स्थानीय धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था और परंपरा के संदर्भ में देखा जाता है।









