UPI लेनदेन पर शुल्क से जुड़ा बिल पास

नईदिल्ली, एजेंसी। लोकसभा ने सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को यूपीआई और अन्य इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार देने संबंधी विधेयक पारित कर दिया।
यह सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को यूपीआई और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की अनुमति प्रदान करने का अधिकार देता है। सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, चर्चा के बिना पारित किए गए ‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026’ का मकसद उस मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाना है, जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान तरीकों पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू करने से रोकता है।
आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए होने वाले रियल-टाइम भुगतान के लिए सेवा शुल्क देना पड़ता है। हालांकि, अब तक यूपीआई लेनदेन को ऐसे शुल्क से छूट प्राप्त है। ‘संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम’ में प्रस्तावित बदलाव कराधान से जुड़े एक बड़े कानून का हिस्सा हैं।
कराधान संशोधन विधेयक से क्या बदलेगा
सरकार ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, विदेशी निवेश, डेटा सेंटर, डिजिटल भुगतान और पूंजी बाजार को बढ़ावा देना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स को प्रोत्साहन
मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर व इनके पुर्जों का अनुबंध आधारित निर्माण करने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट 2040-41 तक बढ़ाई जाएगी।
सीमा शुल्क गोदामों में रखे गए इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों की आपूर्ति से विदेशी कंपनियों आय को भी 15 वर्ष कर छूट मिलेगी।
एमडीआर का रास्ता खुला
सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर एमडीआर (मर्चेेंट डिस्काउंट रेट) लागू होगा।
फिलहाल यूपीआई या रुपे पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है।
भविष्य में जरूरत पडऩे पर सरकार अलग-अलग भुगतान माध्यमों के लिए अलग नीति बना सकेगी।
डेटा सेंटर में निवेश बढ़ेगा
विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए कई मंजूरी संबंधी शर्तें हटेंगी।
डेटा सेंटर अब लीज या किराये पर भी संचालित किए जा सकेंगे।
सरकार का लक्ष्य भारत को एआई डेटा सेंटर हब बनाना है।









